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Mathura News: कोहिनूर की तरफ दमक रहा बिहारीजी का फूल बंगला
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मथुरा। बांकेबिहारी मंदिर में सजा फूल बंगला।
- फोटो : mathura
वृंदावन। श्रीबांकेबिहारी मंदिर में इन दिनों तरह-तरह के फूल बंगले सजाए जा रहे हैं। ब्रज मंडलीय मंदिरों में अंकुरित हुई फूल बंगला व शृंगार कला वैश्विक कला कोष में कोहिनूर की मानिंद दमक रही है।
ब्रज भूमि सनातन काल से वनों और उपवनों की भूमि रही है और यमुना के कलकल निनाद से गुंजित इस भूमि में पुष्पों की मादक सुगंध हमारी प्राण वायु का अंग है इसलिए यहां पुष्पों से अलंकरण और उनकी सजावट सदा से होती रही है। मंदिरों में देव पूजा के समय विशेष रूप से ग्रीष्मकाल में देव मूर्तियों का शृंगार पुष्पों से किया जाता है और उन्हें पुष्पों के वस्त्र विशेष रूप से धारण जा रहे हैं।
आचार्य विप्रांश वल्लभ गोस्वामी के मुताबिक भक्तिकाल में भगवान राधा कृष्ण के वस्त्र-आभूषणों के साथ-साथ पुष्पों के फूल बंगले बनाने की एक परंपरा ब्रज में विशेष रूप से विकसित हुई, जिसमें भगवान के श्रीविग्रहों को पुष्पों से सजाकर उन्हें फूलों के बंगलों (भवन) में विराजमान कर भक्तगण भावविभोर होकर उनकी झांकी का आनंद प्राप्त करते थे। इसलिए यह परंपरा आज भी जीवित है। इन दिनों पूरा मंदिर को सजाया गया है। सैकड़ों किलो फूल मंदिर में लगाए गए हैं।
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ब्रज भूमि सनातन काल से वनों और उपवनों की भूमि रही है और यमुना के कलकल निनाद से गुंजित इस भूमि में पुष्पों की मादक सुगंध हमारी प्राण वायु का अंग है इसलिए यहां पुष्पों से अलंकरण और उनकी सजावट सदा से होती रही है। मंदिरों में देव पूजा के समय विशेष रूप से ग्रीष्मकाल में देव मूर्तियों का शृंगार पुष्पों से किया जाता है और उन्हें पुष्पों के वस्त्र विशेष रूप से धारण जा रहे हैं।
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आचार्य विप्रांश वल्लभ गोस्वामी के मुताबिक भक्तिकाल में भगवान राधा कृष्ण के वस्त्र-आभूषणों के साथ-साथ पुष्पों के फूल बंगले बनाने की एक परंपरा ब्रज में विशेष रूप से विकसित हुई, जिसमें भगवान के श्रीविग्रहों को पुष्पों से सजाकर उन्हें फूलों के बंगलों (भवन) में विराजमान कर भक्तगण भावविभोर होकर उनकी झांकी का आनंद प्राप्त करते थे। इसलिए यह परंपरा आज भी जीवित है। इन दिनों पूरा मंदिर को सजाया गया है। सैकड़ों किलो फूल मंदिर में लगाए गए हैं।
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