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‘जिसकी दूसरे प्रशंसा करें वही सम्मान के योग्य’
अमर उजाला वृंदावन
Updated Wed, 25 May 2016 11:46 PM IST
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श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव में बुधवार को व्यासपीठ से भागवत वक्ता देवी चित्रालेखा
- फोटो : अमर उजाला वृंदावन
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रमणरेती मार्ग स्थित फोगला आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव में बुधवार को व्यासपीठ से भागवत वक्ता देवी चित्रालेखा ने कहा कि मानव की पूर्णता अंत:करण के निर्मल होने पर ही संभव है। उन्होंने कहा कि धर्म का पोषण सदैव सत्संग से होता है।
स्वयं की प्रशंसा करने वाला कभी सम्मान का पात्र नहीं होता। सम्मान के योग्य वही है जिसकी दूसरे प्रशंसा करें।
एक प्रसंग के दौरान देवी चित्रलेखा ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण संसार के सबसे बड़े आध्यात्मिक गुरु थे। इससे पहले कथा आयोजक सविता सिंह सोरोत ने वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य व्यासपीठ का पूजन-अर्चन किया।
राजन सिंह, बदन सिंह, राकेश सोंलकी, प्रधान राम गोपाल चौधरी, सुरेश चौधरी आदि उपस्थित थे।
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स्वयं की प्रशंसा करने वाला कभी सम्मान का पात्र नहीं होता। सम्मान के योग्य वही है जिसकी दूसरे प्रशंसा करें।
एक प्रसंग के दौरान देवी चित्रलेखा ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण संसार के सबसे बड़े आध्यात्मिक गुरु थे। इससे पहले कथा आयोजक सविता सिंह सोरोत ने वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य व्यासपीठ का पूजन-अर्चन किया।
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राजन सिंह, बदन सिंह, राकेश सोंलकी, प्रधान राम गोपाल चौधरी, सुरेश चौधरी आदि उपस्थित थे।