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Mathura News: बोले कलाकार- ब्रज की कलाओं के संवर्धन को युवा आगे आएं
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मथुरा। ब्रज की लोक कलाओं के संवर्धन के लिए मथुरा के चार कलाकारों को उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। इनमें पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया, जानी-मानी लोक गायिका माधुरी शर्मा, नृत्यांगना प्रतिभा शर्मा और ध्रुपद धमार गायक आनंद कुमार मलिक शामिल हैं। इन कलाकारों का कहना है कि ब्रज की भाषा, संस्कृति और परंपराओं को समृद्ध करने के लिए युवा पीढ़ी को आगे आना होगा। ब्रज की कलाओं को आगे बढ़ाएं
पुरस्कार पाने पर पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया का कहना है कि ब्रज की कलाओं को बढ़ावा देने के लिए गंभीर प्रयासों की आवश्यकता है। उन्हें दुख है कि भगवान राधारानी की जन्मभूमि रावल के विकास पर ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने अभी तक ध्यान नहीं दिया है। राधारानी की जन्मस्थली उपेक्षित है। सरकारी उत्सवों में फिल्मी कलाकारों की जगह लोक कलाकारों को बुलाया जाना चाहिए। तभी ब्रज की कलाओं को बढ़ाया जा सकेगा।
ब्रज लोक परंपराओं में मिलावट न हो
जान-मानी लोक गायिका माधुरी शर्मा 50 वर्षों से ब्रज के लोक गायन को धार दे रही हैं। आकाशवाणी की टॉप ग्रेड कलाकार माधुरी शर्मा ने कला पर व्यावसायिकता को हावी नहीं होने दिया। उनका कहना है कि वह अब भी पारंपारिक वाद्य यंत्रों का प्रयोग करती हैं। उनका कहना है कि लोक संस्कृति को सहेजने की साधना कठिन है। वह देश-विदेश में मंचीय प्रस्तुतियां दे चुकी हैं, लेकिन ब्रज भाषा में किसी तरह की मिलावट उन्हें पसंद नहीं हैं। उनका कहना है कि रास लीला हो या लोक गायन ब्रज की भाषा में ही होना चाहिए। आकाशवाणी पर भी लोक संस्कृति के कार्यक्रमों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। इससे नए कलाकार सामने आएंगे।
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शास्त्रीय संगीत आध्यात्मिकता से जोड़ता है
मथुरा। शास्त्रीय गायन में ध्रुपद-धमार शैली के गायक पंडित आनंद कुमार मलिक भी 30 साल से शास्त्रीय संगीत को बढ़ावा देने में लगे हैं। दरभंगा संगीत घराने के पंडित विदुर मलिक के सुपुत्र आनंद कुमार मलिक बताते हैं कि बचपन से ही घर में संगीत का माहौल मिला। शास्त्रीय संगीत का ब्रज से गहरा नाता है। यह आध्यात्मिकता से जोड़ता है। वह वर्षों से इसी साधना में लगे हैं। शास्त्रीय संगीत में दैवीय शक्ति है। वह इस पुरस्कार को पाकर खासे उत्साहित हैं।
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पुरस्कार पाने पर पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया का कहना है कि ब्रज की कलाओं को बढ़ावा देने के लिए गंभीर प्रयासों की आवश्यकता है। उन्हें दुख है कि भगवान राधारानी की जन्मभूमि रावल के विकास पर ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने अभी तक ध्यान नहीं दिया है। राधारानी की जन्मस्थली उपेक्षित है। सरकारी उत्सवों में फिल्मी कलाकारों की जगह लोक कलाकारों को बुलाया जाना चाहिए। तभी ब्रज की कलाओं को बढ़ाया जा सकेगा।
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ब्रज लोक परंपराओं में मिलावट न हो
जान-मानी लोक गायिका माधुरी शर्मा 50 वर्षों से ब्रज के लोक गायन को धार दे रही हैं। आकाशवाणी की टॉप ग्रेड कलाकार माधुरी शर्मा ने कला पर व्यावसायिकता को हावी नहीं होने दिया। उनका कहना है कि वह अब भी पारंपारिक वाद्य यंत्रों का प्रयोग करती हैं। उनका कहना है कि लोक संस्कृति को सहेजने की साधना कठिन है। वह देश-विदेश में मंचीय प्रस्तुतियां दे चुकी हैं, लेकिन ब्रज भाषा में किसी तरह की मिलावट उन्हें पसंद नहीं हैं। उनका कहना है कि रास लीला हो या लोक गायन ब्रज की भाषा में ही होना चाहिए। आकाशवाणी पर भी लोक संस्कृति के कार्यक्रमों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। इससे नए कलाकार सामने आएंगे।
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शास्त्रीय संगीत आध्यात्मिकता से जोड़ता है
मथुरा। शास्त्रीय गायन में ध्रुपद-धमार शैली के गायक पंडित आनंद कुमार मलिक भी 30 साल से शास्त्रीय संगीत को बढ़ावा देने में लगे हैं। दरभंगा संगीत घराने के पंडित विदुर मलिक के सुपुत्र आनंद कुमार मलिक बताते हैं कि बचपन से ही घर में संगीत का माहौल मिला। शास्त्रीय संगीत का ब्रज से गहरा नाता है। यह आध्यात्मिकता से जोड़ता है। वह वर्षों से इसी साधना में लगे हैं। शास्त्रीय संगीत में दैवीय शक्ति है। वह इस पुरस्कार को पाकर खासे उत्साहित हैं।