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Mathura News: आशीर्वाद की ऊर्जा के बाद अब भक्ति का सहारा
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आशीर्वाद की ऊर्जा के बाद अब भक्ति का सहारा
- पीएम के मीराबाई जन्मोत्सव में शामिल होने के निकाले जा रहे हैं सियासी मायने
- धार्मिक दृष्टिकोण से भी राजस्थान और कृष्ण नगरी मथुरा का है गहरा संंबंध
विजय त्रिपाठी/ अमर उजाला ब्यूरो
मथुरा। राजस्थान के चुनाव में फतह के लिए भाजपा हर संभव जतन कर रही है। खासकर मेवाड़, मारवाड़ और ब्रज क्षेत्र (भरतपुर संभाग) की 80 सीटों पर। इसकी पटकथा चुनावी समर शुरू होने से पहले ही तैयार कर ली गई थी।
भरतपुर की सभा में लोगों से आशीर्वाद की ऊर्जा मांगने के बाद एक बार फिर पीएम 23 नवंबर को ब्रज क्षेत्र में होंगे। पर, स्थान भरतपुर की बजाय मथुरा और प्रदेश राजस्थान की बजाय उत्तर प्रदेश होगा। कार्यक्रम भी ऐसे समय जब राजस्थान में चुनाव प्रचार खत्म हो चुका होगा। विधानसभा चुनाव की सियासी सरगर्मी के बीच पीएम मोदी के मथुरा में मीराबाई जन्मोत्सव में शामिल होने के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। मीरा की भक्ति राजस्थान की भाजपा को शक्ति देगी, इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है। मीराबाई का जन्म राजस्थान के पाली जिले में एक राजपूत परिवार में हुआ था।
पीएम मोदी भले ही कृष्ण की नगरी मथुरा में रहें, लेकिन इसका सियासी प्रभाव राजस्थान के चुनाव में भी कहीं न कहीं पड़ेगा। मथुरा से सटे राजस्थान के इलाके को भी ब्रज क्षेत्र का हिस्सा माना जाता है। कृष्ण भक्त मीराबाई का वृंदावन में मंदिर भी है। धार्मिक दृष्टिकोण से भी राजस्थान और कृष्ण नगरी मथुरा का गहरा संंबंध है। राजस्थान सरकार के अधीन कई मंदिर कृष्ण की नगरी में हैं। भरतपुर की सभा में भी पीएम ने 23 नवंबर को मथुरा जाने की बात कही थी। एमजेएस कॉलेज के राजनीति विज्ञान विभाग के प्रो. डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि मथुरा में मीराबाई के कार्यक्रम में शामिल होना कहीं न कहीं मथुरा से सटी डीग, भरतपुर, कामा सीट के साथ ही भरतपुर संभाग ही नहीं पूरे राजस्थान पर प्रभाव डालेगा।
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राजपूत वोटों को रिझाने की कवायद तो नहीं
राजस्थान के राजपूत राजघरानों में मीराबाई को बहुत श्रद्धा के साथ याद किया जाता है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो कृष्ण भक्त मीराबाई के जन्मोत्सव के सहारे राजस्थान के राजपूत मतदाताओं को आकर्षित करने का यह एक तरीका भी हो सकता है। मीरा नाम के सहारे भाजपा सिर्फ ब्रज क्षेत्र के राजपूतों को ही नहीं समूचे राजस्थान के राजपूतों को साधने की कवायद भी हो सकती है। समूचे मरूधरा में राजपूतों का अपना ही महत्व है।
कांग्रेस भी पीछे नहीं
चुनावी साल में जून माह में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ब्रज क्षेत्र धार्मिक विकास बोर्ड और थार क्षेत्र विकास बोर्ड के गठन किया था। जिससे ब्रज क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिले। वहीं थार क्षेत्र विकास बोर्ड क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर पहचान, पर्यटन को बढ़ावा देने, क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने का काम करेगा।
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- पीएम के मीराबाई जन्मोत्सव में शामिल होने के निकाले जा रहे हैं सियासी मायने
- धार्मिक दृष्टिकोण से भी राजस्थान और कृष्ण नगरी मथुरा का है गहरा संंबंध
विजय त्रिपाठी/ अमर उजाला ब्यूरो
मथुरा। राजस्थान के चुनाव में फतह के लिए भाजपा हर संभव जतन कर रही है। खासकर मेवाड़, मारवाड़ और ब्रज क्षेत्र (भरतपुर संभाग) की 80 सीटों पर। इसकी पटकथा चुनावी समर शुरू होने से पहले ही तैयार कर ली गई थी।
भरतपुर की सभा में लोगों से आशीर्वाद की ऊर्जा मांगने के बाद एक बार फिर पीएम 23 नवंबर को ब्रज क्षेत्र में होंगे। पर, स्थान भरतपुर की बजाय मथुरा और प्रदेश राजस्थान की बजाय उत्तर प्रदेश होगा। कार्यक्रम भी ऐसे समय जब राजस्थान में चुनाव प्रचार खत्म हो चुका होगा। विधानसभा चुनाव की सियासी सरगर्मी के बीच पीएम मोदी के मथुरा में मीराबाई जन्मोत्सव में शामिल होने के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। मीरा की भक्ति राजस्थान की भाजपा को शक्ति देगी, इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है। मीराबाई का जन्म राजस्थान के पाली जिले में एक राजपूत परिवार में हुआ था।
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पीएम मोदी भले ही कृष्ण की नगरी मथुरा में रहें, लेकिन इसका सियासी प्रभाव राजस्थान के चुनाव में भी कहीं न कहीं पड़ेगा। मथुरा से सटे राजस्थान के इलाके को भी ब्रज क्षेत्र का हिस्सा माना जाता है। कृष्ण भक्त मीराबाई का वृंदावन में मंदिर भी है। धार्मिक दृष्टिकोण से भी राजस्थान और कृष्ण नगरी मथुरा का गहरा संंबंध है। राजस्थान सरकार के अधीन कई मंदिर कृष्ण की नगरी में हैं। भरतपुर की सभा में भी पीएम ने 23 नवंबर को मथुरा जाने की बात कही थी। एमजेएस कॉलेज के राजनीति विज्ञान विभाग के प्रो. डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि मथुरा में मीराबाई के कार्यक्रम में शामिल होना कहीं न कहीं मथुरा से सटी डीग, भरतपुर, कामा सीट के साथ ही भरतपुर संभाग ही नहीं पूरे राजस्थान पर प्रभाव डालेगा।
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राजपूत वोटों को रिझाने की कवायद तो नहीं
राजस्थान के राजपूत राजघरानों में मीराबाई को बहुत श्रद्धा के साथ याद किया जाता है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो कृष्ण भक्त मीराबाई के जन्मोत्सव के सहारे राजस्थान के राजपूत मतदाताओं को आकर्षित करने का यह एक तरीका भी हो सकता है। मीरा नाम के सहारे भाजपा सिर्फ ब्रज क्षेत्र के राजपूतों को ही नहीं समूचे राजस्थान के राजपूतों को साधने की कवायद भी हो सकती है। समूचे मरूधरा में राजपूतों का अपना ही महत्व है।
कांग्रेस भी पीछे नहीं
चुनावी साल में जून माह में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ब्रज क्षेत्र धार्मिक विकास बोर्ड और थार क्षेत्र विकास बोर्ड के गठन किया था। जिससे ब्रज क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिले। वहीं थार क्षेत्र विकास बोर्ड क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर पहचान, पर्यटन को बढ़ावा देने, क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने का काम करेगा।