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Mathura News: सिर पर पोटली, गोद में बच्चे....मुख पर राधे नाम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 01 Nov 2025 02:08 AM IST
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A bundle on the head, a child in the lap... the name of Radhe on the lips.
अक्षय नवमी पर मथुरा की पंचकोयीय परिक्रमा लगाते श्रद्वालु। 
मथुरा। अक्षय नवमी पर धर्म नगरी में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। बृहस्पतिवार से शुरू हुआ सप्तकोसीय परिक्रमा का सिलसिला शुक्रवार को भी जारी रहा। शुक्रवार को परिक्रमार्थियों की संख्या दोगुनी हो गई। 60 फीसदी से ज्यादा परिक्रमार्थियों में महिलाओं व युवतियों की भागीदारी है। पुण्य लाभ की कामना के साथ ही किसी ने संतान की मनौती मांगी है तो किसी को अच्छे वर की कामना है।
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पुण्य लाभ कमाने और अपनी मनोकामना लेकर श्रद्धालुओं के जत्थे शुक्रवार तड़के से सड़कों पर निकल पड़े। नंगे पैर, सिर पर बैग या पोटली रखे महिलाएं राधे-राधे का जाप करते हुुए आगे बढ़ रही थीं तो कई महिलाओं की गोदी में बच्चे लगे हुए थे। लेकिन उन्हें तो केवल राधा-कृष्ण की धुन लगी हुई थी। वह अपनी ही धुन में राधे का जाप करते हुए अपने पग बढ़ाए जा रही थीं। मथुरा में होली गेट, , महाविद्या कॉलोनी, डेंपियर नगर, पुराना बस स्टैंड, चौबियापाड़ा से लेकर हर मार्ग पर श्रद्धालुओं के जत्थे बहते पानी की तरह निकल रहे थे। सबकी जुबां पर राधा नाम था तो मन में परिक्रमा को पूरा करने का दृढ़ संकल्प। मथुरा-वृंदावन के अलावा हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और आसपास के जिलों से भी श्रद्धालु अक्षय नवमी की परिक्रमा करने पहुंचे हुए थे। हर किसी को अपनी मंजिल पर पहुंचने की जल्दी है।
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डिफेंस स्टेट की रश्मि ने बताया कि वह 10 साल से नवमी की परिक्रमा कर रही हैं। इससे आत्मिक शांति मिलती है। प्रभु की भक्ति का परिक्रमा करके स्मरण करने का अपना अलग ही मजा है। सौंख की गीता देवी का कहना था कि वह करीब पांच साल से परिक्रमा लगाने आती हैं। उन्हें मथुरा-वृंदावन की परिक्रमा करके जो मांगा है, वह मिला है। ऐसे में परिक्रमा को कैसे छोड़ दूं। महाविद्या कॉलोनी की नीता का कहना है कि प्रभु की परिक्रमा करने में असीम सुख की प्राप्ति होती है। यह पुण्य लाभ कमाने का अवसर कैसे छोड़ा जाए। पैरों में छाले पड़ गए हैं मगर यह दो तीन दिन में ठीक हो जाएंगे।
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श्रद्धालुओं के लिए लगाए भंडारे
परिक्रमा मार्ग पर भक्तों के लिए पूड़ी-सब्जी, लस्सी, कढ़ी-चावल, पुये से लेकर कचौ़ड़ी के स्टाल लगाए गए। परिक्रमार्थियों की सेवा करने वालों का उत्साह भी देखते बन रहा था। कोई भूखा व प्यासा नहीं रह जाए। श्रद्धालुओं को रोक-रोकर आग्रह कर रहे थे कि वह सूक्ष्म जलपान कर लें। पूरे परिक्रमा मार्ग पर ऐसे भक्तों का तांता लगा हुआ था।
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