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‘समाधान न हुआ तो करेंगे आत्मदाह’
Mathura
Updated Sun, 26 Oct 2014 05:30 AM IST
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मथुरा। गोकुल बैराज जल भंडारण से प्रभावित किसानों ने डीएम को पत्र देकर एक नवंबर तक समस्या का समाधान न होने पर आत्मदाह की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि डेढ़ दशक से जमीन डूब क्षेत्र में है, लेकिन अब तक मुआवजा नहीं मिला है। अब परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट आ गया है।
गोकुल बैराज डूब क्षेत्र में प्रभावित किसानों ने समस्या के समाधान के लिए डेढ़ दशक में कई बार आंदोलन किए, लेकिन अब तक सुनवाई नहीं हुई। पिछले दिनों किसान केंद्रीय कृषि मंत्री से भी गुहार लगा चुके हैं। उन्होंने राज्य सरकार से समाधान कराने का आश्वासन दिया है, लेकिन जनपद स्तर पर इसके समाधान की अभी कोई सुगबुगाहट नजर नहीं आ रही है। रमन लाल, भगवती प्रसाद, कुंवर सिंह निषाद ने डीएम को पत्र देकर कहा कि तय समय के अनुसार एक नवंबर तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो किसान आत्मदाह के लिए मजबूर होंगे।
गोकुल बैराज की भंडारण की क्षमता के अनुरूप जल स्तर 165 मीटर निर्धारित है, लेकिन वर्तमान में यह 163.40 से 163.70 मीटर के स्तर तक ही हो पा रहा है। 1998 में जब क्षमता के मुताबिक गोकुल बैराज में जल भंडारण किया गया तो इससे आठ राजस्व गांवों के 982 किसानों की करीब 248 हेक्टेयर जमीन डूब गई थी।
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शासन से मिल चुके हैं 91 करोड़
सिंचाई विभाग ने शासन को जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव दिया है। इसके एवज में शासन से 91 करोड़ रुपये से अधिक राशि प्राप्त भी हो चुकी है, लेकिन जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूर्ण न होने के कारण इसका वितरण संभव नहीं हो पा रहा है। इसके खिलाफ अब किसानों का नेतृत्व भाजयुमो के प्रदेश महामंत्री कुंवर सिंह निषाद कर रहे हैं।
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गोकुल बैराज डूब क्षेत्र में प्रभावित किसानों ने समस्या के समाधान के लिए डेढ़ दशक में कई बार आंदोलन किए, लेकिन अब तक सुनवाई नहीं हुई। पिछले दिनों किसान केंद्रीय कृषि मंत्री से भी गुहार लगा चुके हैं। उन्होंने राज्य सरकार से समाधान कराने का आश्वासन दिया है, लेकिन जनपद स्तर पर इसके समाधान की अभी कोई सुगबुगाहट नजर नहीं आ रही है। रमन लाल, भगवती प्रसाद, कुंवर सिंह निषाद ने डीएम को पत्र देकर कहा कि तय समय के अनुसार एक नवंबर तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो किसान आत्मदाह के लिए मजबूर होंगे।
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गोकुल बैराज की भंडारण की क्षमता के अनुरूप जल स्तर 165 मीटर निर्धारित है, लेकिन वर्तमान में यह 163.40 से 163.70 मीटर के स्तर तक ही हो पा रहा है। 1998 में जब क्षमता के मुताबिक गोकुल बैराज में जल भंडारण किया गया तो इससे आठ राजस्व गांवों के 982 किसानों की करीब 248 हेक्टेयर जमीन डूब गई थी।
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शासन से मिल चुके हैं 91 करोड़
सिंचाई विभाग ने शासन को जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव दिया है। इसके एवज में शासन से 91 करोड़ रुपये से अधिक राशि प्राप्त भी हो चुकी है, लेकिन जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूर्ण न होने के कारण इसका वितरण संभव नहीं हो पा रहा है। इसके खिलाफ अब किसानों का नेतृत्व भाजयुमो के प्रदेश महामंत्री कुंवर सिंह निषाद कर रहे हैं।