फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mathura News ›   महामना के योगदान को नहीं भूला सकता मोहन का ब्रज

महामना के योगदान को नहीं भूला सकता मोहन का ब्रज

Wed, 25 Dec 2013 05:41 AM IST
Mathura
Mathura Updated Wed, 25 Dec 2013 05:41 AM IST
विज्ञापन
वृंदावन (राजीव अग्रवाल)। शिक्षा और सेवा के क्षेत्र में महामना पंडित मदनमोहन मालवीय के योगदान के लिए राष्ट्र तो सदैव उनका कृतज्ञ रहेगा ही ब्रजभूमि भी उनके योगदान को नहीं भुला सकती। शिक्षा से इतर हिंदुत्व और मानवता की सेवा के लिए मालवीय का योगदान अविस्मरणीय है। ब्रज में भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय गोवंश को बचाने के लिए उन्होंने अमूल्य योगदान दिया।
विज्ञापन

गोवंश संरक्षण और संवर्द्धन के लिए मालवीय जी ने सन 1935 में मथुरा-वृंदावन मार्ग पर हासानंद गोचर भूमि की स्थापना की। उन्होंने उस समय के तमाम उद्योगपतियों और समाजसेवियों को इस पवित्र कार्य के लिए प्रेरित किया। जिनमें उद्यमी जुगल किशोर बिड़ला, रायबहादुर चिरंजीलाल बागला, दीपचंद पोद्दार, भागीरथमल डालमिया जैसे उद्यमी प्रथम ट्रस्टी थे। इसके बाद गीता प्रेस के संपादक हनुमान प्रसाद पोद्दार, रायबहादुर, लक्ष्मीनिवास बिड़ला जैसी हस्तियां गोचर भूमि से ट्रस्टी के रूप में जुड़ीं। गोचर भूमि के लिए मालवीय जी ने एक हजार 64 एकड़ भूमि दान दी थी। हासानंद गोचरभूमि से जुड़े दिनेश पाठक ने बताया कि महामना के पुण्यमय प्रयासों का परिणाम यह गोचरभूमि आज ब्रज की अग्रणी गोशाला के रूप में प्रतिष्ठित है। यहां हजारों गायों की सेवा होती है।
विज्ञापन


कब्जों से नहीं बच सकी गोचर भूमि
वृंदावन (ब्यूरो)। हासानंद गोचरभूमि का अतीत जितना गौरवशाली है वर्तमान उतना ही दु:खद है, क्योंकि पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा प्रदान की गई एक हजार 64 एकड़ भूमि में से वर्तमान में 265 एकड़ ही बची है। बाकी भूमि माफियाओं के कब्जे से बच नहीं सकी। महामना के नाती और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश गिरधर मालवीय ने बताया कि गोचारण की भूमि को कब्जों से बचाने के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय में वाद भी चल रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

बाबा हासानंद ने किया महामना को प्रेरित
वृंदावन (ब्यूरो)। महामना के नाती गिरधर मालवीय बताते हैं उनके दादा ने पंजाब के साधु हासानंद बाबा के कहने पर ब्रज में गौ संरक्षण और गौ चारण के लिए एक हजार 64 एकड़ भूमि दान दी। इसके साथ मथुरा में सेवा समिति की स्थापना की। इस समिति का कार्य लोगों को मुफ्त दवाओं के साथ-साथ अन्य जनसेवा के कार्य करना रहा।


प्रेम महाविद्यालय की आधारशिला भी रखी
वृंदावन। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के अतिरिक्त वृंदावन के केशीघाट स्थित प्रेम महाविद्यालय महामना के शिक्षा के क्षेत्र में योगदान की याद दिलाता है। राजा महेंद्र प्रताप और महामना ने ही इस महाविद्यालय की आधारशिला रखी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed