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कर्मयोगी ग्राम : जांच के बाद मानचित्र अस्वीकृत
Mathura
Updated Thu, 27 Sep 2012 12:00 PM IST
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मथुरा/आगरा। सदर तहसील के नवादा मौजे में बनी कर्मयोगी ग्राम कालोनी का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया है। विवादित जमीन पर विकास प्राधिकरण ने एक माह पूर्व जिस मानचित्र को अस्वीकार कर दिया, अब उसी जमीन पर नई फाइल व मानचित्र प्रस्तुत किया है। इसकी शिकायत कमिश्नर से की है।
नवादा के खसरा नंबर 135, 17, 140, 141 व 147 में कर्मयोगी नाम से कालोनी सन 1988 में बनाई गई। गेट बंद और सभी आधुनिक सुविधाओं युक्त इस कालोनी में 1992 तक कर्मयोगी ग्राम में लगभग तीन सौ प्लाट लोगों को बेचे गए। इसके बाद कालोनी डेवलपर्स में चले विवाद के चलते उक्त योजना खटाई में पड़ गई। गत वर्ष उक्त योजना पर फिर से काम शुरू हुआ और उक्त कालोनी गाहे बगाहे बेची गई। अप्रैल माह में कर्मयोगी बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड का टाइटल रद होने, एनएचएआई से अनुमति न लेने, मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण से मानचित्र पास न कराने, कालोनी को बिना आबादी में दर्ज कराए प्लाट काटने और अनुसूचित जाति के लोगों की जमीन को बेचने से पूर्व जिला प्रशासन से अनुमति न लेने के चलते उक्त कालोनी में काम बंद करा दिया था। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से करने के बाद जिला प्रशासन ने टीम गठित कर पूरे मामले की जांच कराई। गठित टीम की रिपोर्ट के बाद मथुरा निवासी अरविंद वर्मा द्वारा प्रस्तुत किए कालोनी के दोनों मानचित्र को 16 अगस्त 2012 को विकास प्राधिकरण ने निरस्त कर दिया।
प्लाट खरीददार श्रीराम गुप्ता ने कमिश्नर से की गई शिकायत में कहा है कि उक्त जमीन पर नई फाइल बनाकर उसी नाम से फिर से नया मानचित्र प्रस्तुत कर दिया गया है। शिकायत में कहा है कि नया मानचित्र पास होने पर पूर्व में खरीदे गए 300 प्लाट ग्राहकों के साथ ठगी होने के आशंका है।
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नवादा के खसरा नंबर 135, 17, 140, 141 व 147 में कर्मयोगी नाम से कालोनी सन 1988 में बनाई गई। गेट बंद और सभी आधुनिक सुविधाओं युक्त इस कालोनी में 1992 तक कर्मयोगी ग्राम में लगभग तीन सौ प्लाट लोगों को बेचे गए। इसके बाद कालोनी डेवलपर्स में चले विवाद के चलते उक्त योजना खटाई में पड़ गई। गत वर्ष उक्त योजना पर फिर से काम शुरू हुआ और उक्त कालोनी गाहे बगाहे बेची गई। अप्रैल माह में कर्मयोगी बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड का टाइटल रद होने, एनएचएआई से अनुमति न लेने, मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण से मानचित्र पास न कराने, कालोनी को बिना आबादी में दर्ज कराए प्लाट काटने और अनुसूचित जाति के लोगों की जमीन को बेचने से पूर्व जिला प्रशासन से अनुमति न लेने के चलते उक्त कालोनी में काम बंद करा दिया था। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से करने के बाद जिला प्रशासन ने टीम गठित कर पूरे मामले की जांच कराई। गठित टीम की रिपोर्ट के बाद मथुरा निवासी अरविंद वर्मा द्वारा प्रस्तुत किए कालोनी के दोनों मानचित्र को 16 अगस्त 2012 को विकास प्राधिकरण ने निरस्त कर दिया।
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प्लाट खरीददार श्रीराम गुप्ता ने कमिश्नर से की गई शिकायत में कहा है कि उक्त जमीन पर नई फाइल बनाकर उसी नाम से फिर से नया मानचित्र प्रस्तुत कर दिया गया है। शिकायत में कहा है कि नया मानचित्र पास होने पर पूर्व में खरीदे गए 300 प्लाट ग्राहकों के साथ ठगी होने के आशंका है।
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