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Mathura News: 60 माध्यमिक विद्यालयों का अब अपना होगा बैंड
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मथुरा। माध्यमिक विद्यालयों का अब अपना बैंड होगा। स्कूलों में सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग ने यह निर्णय लिया है। सत्र 2025-26 में बैंड की सामग्री खरीदी जाएगी। इसके बाद स्कूलों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा।
जिले के माध्यमिक शिक्षा के 60 विद्यालयों में छात्र-छात्राएं कला, संगीत व नृत्य सीखेंगे। इसके लिए विभाग ने विद्यालय में अपना बैंड बनाने के निर्देश दिए हैं। इसमें छात्र-छात्राओं को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे वे कला, संगीत और नृत्य में निपुण तो बनेंगे ही, साथ ही इससे वह पढ़ाई के दबाव को भी कम महसूस करेंगे।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रशिक्षण प्राप्त कर वह विद्यालय स्तर, मंडल स्तर व राज्य स्तर पर आयोजित होने वाली सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में भी प्रतिभाग कर सकेंगे। प्रतियोगिताओं में समन्वय के लिए जनपद स्तर पर शिक्षकों को नोडल अधिकारी नामित किया जाएगा। इसमें खेल, पीटी, स्काउट-गाइड, व्यायाम, एनसीसी से जुड़े शिक्षक शामिल होंगे। विद्यार्थियों में कलात्मक विधा बढ़ाने के लिए कला उत्सव का आयोजन भी किया जाएगा।
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अपना बैंड होने से छात्र-छात्राएं कला, नृत्य और गायन में प्रतिभाग कर सकेंगे। इससे उन पर पढ़ाई का दबाव भी कम होगा। वहीं इससे वह शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ भी रह सकेंगे। - रवींद्र सिंह, डीआईओएस
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जिले के माध्यमिक शिक्षा के 60 विद्यालयों में छात्र-छात्राएं कला, संगीत व नृत्य सीखेंगे। इसके लिए विभाग ने विद्यालय में अपना बैंड बनाने के निर्देश दिए हैं। इसमें छात्र-छात्राओं को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे वे कला, संगीत और नृत्य में निपुण तो बनेंगे ही, साथ ही इससे वह पढ़ाई के दबाव को भी कम महसूस करेंगे।
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शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रशिक्षण प्राप्त कर वह विद्यालय स्तर, मंडल स्तर व राज्य स्तर पर आयोजित होने वाली सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में भी प्रतिभाग कर सकेंगे। प्रतियोगिताओं में समन्वय के लिए जनपद स्तर पर शिक्षकों को नोडल अधिकारी नामित किया जाएगा। इसमें खेल, पीटी, स्काउट-गाइड, व्यायाम, एनसीसी से जुड़े शिक्षक शामिल होंगे। विद्यार्थियों में कलात्मक विधा बढ़ाने के लिए कला उत्सव का आयोजन भी किया जाएगा।
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अपना बैंड होने से छात्र-छात्राएं कला, नृत्य और गायन में प्रतिभाग कर सकेंगे। इससे उन पर पढ़ाई का दबाव भी कम होगा। वहीं इससे वह शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ भी रह सकेंगे। - रवींद्र सिंह, डीआईओएस