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Mathura News: दुर्घटना क्लेम नहीं दिया तो बीमा कंपनी पर 6 लाख का जुर्माना
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मथुरा। दुर्घटना में क्षतिग्रस्त कार का क्लेम न देना टाटा जनरल इंश्योरेंस कम्पनी को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता फोरम ने कार मालिक को मय ब्याज धनराशि देने का आदेश दिया है।
बालाजीपुरम के पवन कुमार की कार 14 जून 2019 को नेशनल हाइवे पर कोसीकलां थाना क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी, जिसकी सूचना पुलिस और बीमा कम्पनी को दे दी गई और बीमा कम्पनी द्वारा कार को मरम्मत के लिए सर्विस सेंटर भेज दिया गया।
कार वहां कई महीने खड़ी रही और मरम्मत पर 5,76,674 रुपये खर्च हुए। टाटा जनरल इंश्योरेंस कम्पनी के अधिकारियों ने पवन कुमार को मरम्मत खर्च देने से इन्कार कर दिया। इस पर उन्होंने 2 मार्च 2020 में उपभोक्ता अदालत की शरण ली। बीमा कम्पनी ने क्लेम को खारिज करने का कारण वाहन स्वामी द्वारा ड्राइविंग लाइसेंस न दिया जाना व पुलिस थाने में एक दिन बाद सूचना देने को बताया।
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जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की ज्यूरी के अध्यक्ष नवनीत कुमार, सदस्य मनीष परमार व छवि सिंघल ने इस तर्क को खारिज करते हुए बीमा कम्पनी को कार स्वामी को मरम्मत खर्च मय ब्याज देने का आदेष दिया है। साथ ही उपभोक्ता को मानसिक, शारीरिक पीड़ा देने के लिए 20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। ज्यूरी ने यह राशि आदेश के 30 दिनों के भीतर दिए जाने का निर्णय दिया।
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बालाजीपुरम के पवन कुमार की कार 14 जून 2019 को नेशनल हाइवे पर कोसीकलां थाना क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी, जिसकी सूचना पुलिस और बीमा कम्पनी को दे दी गई और बीमा कम्पनी द्वारा कार को मरम्मत के लिए सर्विस सेंटर भेज दिया गया।
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कार वहां कई महीने खड़ी रही और मरम्मत पर 5,76,674 रुपये खर्च हुए। टाटा जनरल इंश्योरेंस कम्पनी के अधिकारियों ने पवन कुमार को मरम्मत खर्च देने से इन्कार कर दिया। इस पर उन्होंने 2 मार्च 2020 में उपभोक्ता अदालत की शरण ली। बीमा कम्पनी ने क्लेम को खारिज करने का कारण वाहन स्वामी द्वारा ड्राइविंग लाइसेंस न दिया जाना व पुलिस थाने में एक दिन बाद सूचना देने को बताया।
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जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की ज्यूरी के अध्यक्ष नवनीत कुमार, सदस्य मनीष परमार व छवि सिंघल ने इस तर्क को खारिज करते हुए बीमा कम्पनी को कार स्वामी को मरम्मत खर्च मय ब्याज देने का आदेष दिया है। साथ ही उपभोक्ता को मानसिक, शारीरिक पीड़ा देने के लिए 20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। ज्यूरी ने यह राशि आदेश के 30 दिनों के भीतर दिए जाने का निर्णय दिया।