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Mathura News: सर्कस से मुक्त कराए 4 हाथियों ने पूरे किए स्वतंत्रता के 10 साल
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मथुरा। फ्रूट फीस्ट का आनंद लेता हाथी।
- फोटो : mathura
मथुरा। दस साल पहले महाराष्ट्र के एक सर्कस से मुक्त कराकर हाथी संरक्षण केंद्र लाए गए चार हाथियों की आजादी के 10 साल शुक्रवार को पूरे हो गए। इस मौके पर हाथियों के साथ केंद्र में जश्न मनाया गया। चारों हाथियों के लिए फ्रूट फीस्ट का भी आयोजन किया गया, जिसका उन्होंने स्वाद लिया।
2015 में महाराष्ट्र के एक सर्कस से चार हाथियों को मुक्त कराया गया था। इनके नाम कोकोनट, पीनट, वॉलनट और मैकडेमिया हैं। नट हर्ड के नाम से मशहूर यह हाथी 2015 में मथुरा स्थित वाइल्डलाइफ एसओएस के हाथी संरक्षण और देखभाल केंद्र में आने के बाद उम्मीद के प्रतीक बन गए। इस साल, वाइल्डलाइफ एसओएस उनकी आजादी, दोस्ती और बदलाव के एक दशक का जश्न मना रहा है।
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने बताया कि 10 साल पहले जब चारों हाथियों को लाया गया तब वह बहुत छोटे थे। सर्कस में उन्हें कठोर प्रशिक्षण विधियों, लंबे समय तक जबरन प्रदर्शन, अपर्याप्त भोजन और चिकित्सा देखभाल में कमी का सामना करना पड़ा।
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प्यार से नट के नाम पर रखा गया प्रत्येक हाथी का नाम अपनी अलग-अलग विशेषताओं और आकर्षण के लिए जाना जाने लगा। समूह में सबसे शरारती कोकोनट, जल्दी ही एक उत्साहिक व्यक्तित्व के रूप में उभरी, जबकि मैकडेमिया और वॉलनट ने मजबूत बंधन और सौम्य व्यवहार प्रदर्शित किया। यह हाथी अपना पूरा दिन मड बाथ, पूल में डुबकी लगाने और अपने समृद्ध भोजन को खाने में बिताते हैं।
इस खास उपलब्धि को मनाने के लिए, वाइल्डलाइफ एसओएस ने नट हर्ड के लिए एक शानदार फ्रूट फीस्ट का आयोजन किया। तरबूज, कद्दू, पपीता, केला और ककड़ी जैसे मौसमी, रसीले फलों की एक रंग-बिरंगी फीस्ट हाथियों के खाने के लिए सजाई गई।
इस दौरान वाइल्ड लाइफ एसओएस के उप निदेशक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. इलियाराजा, सचिव गीता शेषमणि समेत अन्य मौजूद रहे।
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2015 में महाराष्ट्र के एक सर्कस से चार हाथियों को मुक्त कराया गया था। इनके नाम कोकोनट, पीनट, वॉलनट और मैकडेमिया हैं। नट हर्ड के नाम से मशहूर यह हाथी 2015 में मथुरा स्थित वाइल्डलाइफ एसओएस के हाथी संरक्षण और देखभाल केंद्र में आने के बाद उम्मीद के प्रतीक बन गए। इस साल, वाइल्डलाइफ एसओएस उनकी आजादी, दोस्ती और बदलाव के एक दशक का जश्न मना रहा है।
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वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने बताया कि 10 साल पहले जब चारों हाथियों को लाया गया तब वह बहुत छोटे थे। सर्कस में उन्हें कठोर प्रशिक्षण विधियों, लंबे समय तक जबरन प्रदर्शन, अपर्याप्त भोजन और चिकित्सा देखभाल में कमी का सामना करना पड़ा।
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प्यार से नट के नाम पर रखा गया प्रत्येक हाथी का नाम अपनी अलग-अलग विशेषताओं और आकर्षण के लिए जाना जाने लगा। समूह में सबसे शरारती कोकोनट, जल्दी ही एक उत्साहिक व्यक्तित्व के रूप में उभरी, जबकि मैकडेमिया और वॉलनट ने मजबूत बंधन और सौम्य व्यवहार प्रदर्शित किया। यह हाथी अपना पूरा दिन मड बाथ, पूल में डुबकी लगाने और अपने समृद्ध भोजन को खाने में बिताते हैं।
इस खास उपलब्धि को मनाने के लिए, वाइल्डलाइफ एसओएस ने नट हर्ड के लिए एक शानदार फ्रूट फीस्ट का आयोजन किया। तरबूज, कद्दू, पपीता, केला और ककड़ी जैसे मौसमी, रसीले फलों की एक रंग-बिरंगी फीस्ट हाथियों के खाने के लिए सजाई गई।
इस दौरान वाइल्ड लाइफ एसओएस के उप निदेशक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. इलियाराजा, सचिव गीता शेषमणि समेत अन्य मौजूद रहे।