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Mathura News: जिले में 2.67 लाख किसानों पर 4723 करोड़ रुपये का कर्ज
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मथुरा। जिले में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) धारकों की संख्या 2.67 लाख पहुंच गई है। उन्होंने कृषि संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए बैंकों से 4723 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। बैंकों की ओर से किसानों को हाथों-हाथ केसीसी जारी किए जा रहे हैं, लेकिन किसान बैंकों का रुपये वापस नहीं कर रहे हैं। अब तक बैंकों द्वारा इन्हें 24 बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
जिला अग्रणी प्रबंधक विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिले के 10 ब्लॉकों में किसान साहूकारों के आगे हाथ न फैलाएं, इसके लिए उन्हें बैंकों द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराए जाते हैं। इनके जरिए किसानों को रियायती दरों पर ऋण दिया जाता है। इससे किसान कृषि संबंधी जरूरतों को पूरा कर सकें और अपने खेतों में अच्छी फसल कर सकें।
उन्होंने बताया कि केसीसी बनवाने वाले किसानों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। साल 2024 में इनकी संख्या 2 लाख 67 हजार के पार पहुंच गई है। इन किसानों ने बैंकों से 4723 करोड़ रुपये का कर्ज ले रखा है। ये किसान अब बैंकों का रुपये वापस नहीं कर रहे हैं। ऐसे में बैंक अधिकारी किसानों से रुपये वापस जमा कराने के लिए चक्कर लगा रहे हैं।
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समय से अदायगी न करने पर बढ़ता है ब्याज
बैंक के अधिकारियों ने बताया कि बैंकों से लिया गया कर्ज किसानों को एक साल में लौटाना पड़ता है। इस पर उन्हें महज 4 प्रतिशत की दर से सालाना ब्याज देना पड़ता है। समय से वापस नहीं करने पर किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ जाता है। इसके साथ ही बैंकों की ओर से ब्याज प्रतिशत को भी बढ़ा दिया जाता है। ऐसे में उन्हें 13 से 18 प्रतिशत वार्षिक दर से भुगतान करना पड़ता है।
लोक अदालत भी नहीं आई काम
जिला अग्रणी कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि जिन किसानों पर केसीसी का कर्ज बकाया है। उनसे समझौता के लिए लोक अदालत में बुलाया जा रहा है। जहां पर उनका ब्याज माफ होगा, लेकिन कितना कम हुआ यह जानकारी लेकर वापस लौट जाते हैं, लेकिन कर्ज चुका नहीं रहे हैं। अब उच्चाधिकारियों के स्तर से ही आगे की कार्रवाई होगी।
बैंकों की ओर से 2.67 लाख से अधिक किसानों को क्रेडिट कार्ड जारी किए गए। इसी का नतीजा है कि केसीसी धारकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन किसान बैंकों का रुपये लौटा नहीं रहे हैं। उन्हें नोटिस भी कई बार दिया गया है।
- रोहित टंडन, जिला अग्रणी प्रबंधक
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जिला अग्रणी प्रबंधक विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिले के 10 ब्लॉकों में किसान साहूकारों के आगे हाथ न फैलाएं, इसके लिए उन्हें बैंकों द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराए जाते हैं। इनके जरिए किसानों को रियायती दरों पर ऋण दिया जाता है। इससे किसान कृषि संबंधी जरूरतों को पूरा कर सकें और अपने खेतों में अच्छी फसल कर सकें।
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उन्होंने बताया कि केसीसी बनवाने वाले किसानों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। साल 2024 में इनकी संख्या 2 लाख 67 हजार के पार पहुंच गई है। इन किसानों ने बैंकों से 4723 करोड़ रुपये का कर्ज ले रखा है। ये किसान अब बैंकों का रुपये वापस नहीं कर रहे हैं। ऐसे में बैंक अधिकारी किसानों से रुपये वापस जमा कराने के लिए चक्कर लगा रहे हैं।
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समय से अदायगी न करने पर बढ़ता है ब्याज
बैंक के अधिकारियों ने बताया कि बैंकों से लिया गया कर्ज किसानों को एक साल में लौटाना पड़ता है। इस पर उन्हें महज 4 प्रतिशत की दर से सालाना ब्याज देना पड़ता है। समय से वापस नहीं करने पर किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ जाता है। इसके साथ ही बैंकों की ओर से ब्याज प्रतिशत को भी बढ़ा दिया जाता है। ऐसे में उन्हें 13 से 18 प्रतिशत वार्षिक दर से भुगतान करना पड़ता है।
लोक अदालत भी नहीं आई काम
जिला अग्रणी कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि जिन किसानों पर केसीसी का कर्ज बकाया है। उनसे समझौता के लिए लोक अदालत में बुलाया जा रहा है। जहां पर उनका ब्याज माफ होगा, लेकिन कितना कम हुआ यह जानकारी लेकर वापस लौट जाते हैं, लेकिन कर्ज चुका नहीं रहे हैं। अब उच्चाधिकारियों के स्तर से ही आगे की कार्रवाई होगी।
बैंकों की ओर से 2.67 लाख से अधिक किसानों को क्रेडिट कार्ड जारी किए गए। इसी का नतीजा है कि केसीसी धारकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन किसान बैंकों का रुपये लौटा नहीं रहे हैं। उन्हें नोटिस भी कई बार दिया गया है।
- रोहित टंडन, जिला अग्रणी प्रबंधक

पीलीभीत के जिला चिकित्सालय में मरीज देखते चिकित्सक।संवाद- फोटो : संवाद

पीलीभीत के जिला चिकित्सालय में मरीज देखते चिकित्सक।संवाद- फोटो : संवाद