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फर्जीवाड़े की जांच के दायरे में 20 अफसर-कर्मचारी
अमर उजाला मथुरा
Updated Thu, 04 Aug 2016 11:24 PM IST
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चिकित्सक
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स्वास्थ्य विभाग में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना में फर्जीवाडे़ के खुलासे के बाद जिलाधिकारी निखिल चंद्र शुक्ला ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी को चेतावनी दी है कि बिना परमिट के वाहन चला तो फिर उनकी जिम्मेदारी होगी। इस पूरे फर्जीवाड़े में 20 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी जांच के दायरे में आ गए हैं।
गौरतलब है अमर उजाला ने अपने तीन अगस्त के अंक में शीर्षक ‘स्कूल में हेल्थ चेकअप के नाम पर फर्जीवाड़ा’ से खबर प्रकाशित की थी। इसमें राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में संचालित वाहनों में फर्जीवाड़े की जांच रिपोर्ट का खुलासा किया था।
इस मामले में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में डीएम ने सभी चिकित्सा प्रभारियों से कड़े शब्दों में कहा कि वो अपने यहां केवल टैक्सी परमिट के वाहन ही इस योजना में चलाएं। अगर निजी वाहन चलाए तो फिर इसकी जिम्मेदारी चिकित्सा प्रभारियों की होगी। डीएम ने कहा कि इस पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में डीएम ने ओपीडी तक की ठीक व्यवस्था न होने, रोगियों को भोजन व्यवस्थित रूप से उपलब्ध न होने, जननी सुरक्षा योजना में प्रसव के उपरान्त महिलाओं को मिलने वाली राशि के अलावा आशाओं की प्रोत्साहन राशि का भुगतान तक समय से न होने का गंभीर लापरवाही बताया। सुधार के लिए सख्त निर्देश दिए।
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गौरतलब है अमर उजाला ने अपने तीन अगस्त के अंक में शीर्षक ‘स्कूल में हेल्थ चेकअप के नाम पर फर्जीवाड़ा’ से खबर प्रकाशित की थी। इसमें राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में संचालित वाहनों में फर्जीवाड़े की जांच रिपोर्ट का खुलासा किया था।
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इस मामले में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में डीएम ने सभी चिकित्सा प्रभारियों से कड़े शब्दों में कहा कि वो अपने यहां केवल टैक्सी परमिट के वाहन ही इस योजना में चलाएं। अगर निजी वाहन चलाए तो फिर इसकी जिम्मेदारी चिकित्सा प्रभारियों की होगी। डीएम ने कहा कि इस पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में डीएम ने ओपीडी तक की ठीक व्यवस्था न होने, रोगियों को भोजन व्यवस्थित रूप से उपलब्ध न होने, जननी सुरक्षा योजना में प्रसव के उपरान्त महिलाओं को मिलने वाली राशि के अलावा आशाओं की प्रोत्साहन राशि का भुगतान तक समय से न होने का गंभीर लापरवाही बताया। सुधार के लिए सख्त निर्देश दिए।