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8 दिन में 15 की मौत 150 से ज्यादा बीमार
अमर उजाला ब्यूरो मथुरा
Updated Thu, 25 May 2017 11:59 PM IST
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अस्पताल
- फोटो : demo pic
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सुरीर में डायरिया नियंत्रण में स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से फेल साबित हो रहा है। यहां बीते आठ दिनों में डायरिया से 15 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। 150 से अधिक लोग बीमार बताए जा रहे हैं।
सुरीर में डायरिया को लेकर स्वास्थ्य विभाग की नींद अखबारों में खबरों के प्रकाशन के बाद टूटी। स्वास्थ्य विभाग का सूचना तंत्र फेल रहा। मामला बिगड़ा तो सेवाओं की कमान मुख्यालय के अफसरों ने संभाल ली। गांव-गांव टीम पहुंचीं और सैकड़ों रोगियों को उपचार दिए जाने का दावा किया गया।
लेकिन हाल ये रहा कि वहां हर दिन किसी न किसी गांव में मौत होती रही। इस पूरे प्रकरण में हैरानी करने वाली बात ये रही कि क्षेत्र के लोगों की जब तबियत बिगड़ी तो उन्होंने सरकारी अस्पताल में जाने के बजाय झोलाछापों से उपचार कराना बेहतर समझा। खुद स्वास्थ्य विभाग अधिक मौतों की वजह रोगियों का सरकारी अस्पताल में न आना मान रहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. आरके नैय्यर ने इस बिंदु पर जांच कराने की बात कही है।
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स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर सवाल
-डायरिया फैलने की जानकारी स्वास्थ्य कर्मियों ने समय रहते मुख्यालय पर नहीं दी।
-रोग फैलने के बाद भी सुरीर, मांट, नौहझील केंद्र पर समुचित व्यवस्थाएं नहीं की गईं।
-सरकारी अस्पतालों के बारे में जनता की राय खराब क्यों है कि वो झोलाछाप पर जा रहे हैं।
-गांवों में लगातार मौतों को रोकने के लिए विभाग ने पर्याप्त कदम क्यों नहीं उठाए।
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सुरीर में डायरिया को लेकर स्वास्थ्य विभाग की नींद अखबारों में खबरों के प्रकाशन के बाद टूटी। स्वास्थ्य विभाग का सूचना तंत्र फेल रहा। मामला बिगड़ा तो सेवाओं की कमान मुख्यालय के अफसरों ने संभाल ली। गांव-गांव टीम पहुंचीं और सैकड़ों रोगियों को उपचार दिए जाने का दावा किया गया।
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लेकिन हाल ये रहा कि वहां हर दिन किसी न किसी गांव में मौत होती रही। इस पूरे प्रकरण में हैरानी करने वाली बात ये रही कि क्षेत्र के लोगों की जब तबियत बिगड़ी तो उन्होंने सरकारी अस्पताल में जाने के बजाय झोलाछापों से उपचार कराना बेहतर समझा। खुद स्वास्थ्य विभाग अधिक मौतों की वजह रोगियों का सरकारी अस्पताल में न आना मान रहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. आरके नैय्यर ने इस बिंदु पर जांच कराने की बात कही है।
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स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर सवाल
-डायरिया फैलने की जानकारी स्वास्थ्य कर्मियों ने समय रहते मुख्यालय पर नहीं दी।
-रोग फैलने के बाद भी सुरीर, मांट, नौहझील केंद्र पर समुचित व्यवस्थाएं नहीं की गईं।
-सरकारी अस्पतालों के बारे में जनता की राय खराब क्यों है कि वो झोलाछाप पर जा रहे हैं।
-गांवों में लगातार मौतों को रोकने के लिए विभाग ने पर्याप्त कदम क्यों नहीं उठाए।