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11 प्रभारी चिकित्सक, 205 एएनएम का वेतन रोका
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Fri, 13 Feb 2015 12:15 AM IST
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ग्रामीण स्वास्थ्य स्वच्छता समिति के मद में आई धनराशि व्यय न करने से अफसर नाराज हैं। मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय ने जिले के सभी सामुदायिक, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के 11 प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, उपकेंद्रों पर तैनात 205 एएनएम का वेतन रोकने की कार्रवाई की है। अधीनस्थों से भी स्पष्टीकरण मांगा है।
मामला राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत को हर साल दी जाने वाली दस-दस हजार की धनराशि के खर्च नहीं होने का है। ये धनराशि एएनएम और ग्राम प्रधान के संयुक्त खाते में जाती है। धनराशि का प्रयोग गांव के कुंओं में ब्लीचिंग पाउडर डालने, पानी की निकासी और मच्छरों पर अंकुश न पनपे इस पर खर्च किया जाता है।
जिले में कुल 479 ग्राम पंचायतों को हर साल दस हजार की धनराशि स्वच्छता के लिए दी जाती है। इसकी प्रथम किस्त के रूप में 23.95 लाख की धनराशि आवंटित की गई है। इसमें से मात्र 8.42 लाख रुपये ही खर्च हो सके हैं। अभी इतनी ही धनराशि की एक और किस्त दी जानी है। जबकि वित्तीय वर्ष समाप्त होने में डेढ़ माह ही शेष है।
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ग्रामीण स्वास्थ्य शिक्षा समिति का धन खर्च करने में लापरवाही बरती गई है। इस पर सभी प्रभारी चिकित्सा अधिकारी और एएनएम का वेतन रोक दिया गया है। जो धनराशि खर्च करने का प्रमाण उपलब्ध कराएगा उसी का वेतन जारी होगा।
-डा. बीएस यादव, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मथुरा
ये धनराशि एएनएम और प्रधान के संयुक्त खाते में जाती है उन्हीं की सहमति पर खर्च की जाती है। इसमें प्रभारी चिकित्सा अधिकारी की कोई भूमिका नही होती। ये धनराशि महज छह दिन पूर्व ही आवंटित की गई है। हम अपनी बात सीएमओ के सामने रखेंगे।
-डा. मुनेंद्र सिंह, सचिव, प्रादेशिक चिकित्सा सेवा, एमओआईसी राल
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मामला राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत को हर साल दी जाने वाली दस-दस हजार की धनराशि के खर्च नहीं होने का है। ये धनराशि एएनएम और ग्राम प्रधान के संयुक्त खाते में जाती है। धनराशि का प्रयोग गांव के कुंओं में ब्लीचिंग पाउडर डालने, पानी की निकासी और मच्छरों पर अंकुश न पनपे इस पर खर्च किया जाता है।
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जिले में कुल 479 ग्राम पंचायतों को हर साल दस हजार की धनराशि स्वच्छता के लिए दी जाती है। इसकी प्रथम किस्त के रूप में 23.95 लाख की धनराशि आवंटित की गई है। इसमें से मात्र 8.42 लाख रुपये ही खर्च हो सके हैं। अभी इतनी ही धनराशि की एक और किस्त दी जानी है। जबकि वित्तीय वर्ष समाप्त होने में डेढ़ माह ही शेष है।
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ग्रामीण स्वास्थ्य शिक्षा समिति का धन खर्च करने में लापरवाही बरती गई है। इस पर सभी प्रभारी चिकित्सा अधिकारी और एएनएम का वेतन रोक दिया गया है। जो धनराशि खर्च करने का प्रमाण उपलब्ध कराएगा उसी का वेतन जारी होगा।
-डा. बीएस यादव, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मथुरा
ये धनराशि एएनएम और प्रधान के संयुक्त खाते में जाती है उन्हीं की सहमति पर खर्च की जाती है। इसमें प्रभारी चिकित्सा अधिकारी की कोई भूमिका नही होती। ये धनराशि महज छह दिन पूर्व ही आवंटित की गई है। हम अपनी बात सीएमओ के सामने रखेंगे।
-डा. मुनेंद्र सिंह, सचिव, प्रादेशिक चिकित्सा सेवा, एमओआईसी राल