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रामवृक्ष के संगठन पास थी 100 करोड़ की संपत्ति
अमर उजाला मथुरा
Updated Sat, 18 Jun 2016 12:20 AM IST
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जवाहर बाग
- फोटो : अमर उजाला
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रामवृक्ष के स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह संगठन पर तकरीबन 100 करोड़ की संपत्ति हो गई थी। एक जून को ही जवाहर बाग में जब चंदे की रकम को जोड़ा गया था तो वह 80 लाख रुपये कैश निकली थी। सोना और चांदी भी थी। चंदनबोस से पूछताछ में और जांच में ये बात सामने आई है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, चंदनबोस से पूछताछ और जांच में सामने आया है कि एक जून को जवाहर बाग में रामवृक्ष के आफिस में राकेश गुप्ता और चंदनबोस की मौजूदगी में चंदे की रकम को गिना गया था। उस दिन नगद में 80 लाख रुपये थे। जबकि जेवरात भी भारी मात्रा में थे। सोने के सिक्के सर्वाधिक थे। जेवरात को भी तौला गया था। सोना ही 5 किलो निकला। चांदी भी दस किलो से ऊपर बताई जा रही है। इसे एक-दो दिन में अलग-अलग खातों में जमा कराया जाना था।
सूत्रों का कहना है कि रामवृक्ष के पास दो जून को भी चंदे की रकम आनी थी। सुबह के वक्त बिहार, झारखंड, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के जनपदों से भी पैसा पहुंच रहा था। इस हिसाब से माना जा रहा है कि एक से दो करोड़ रुपया और पहुंचता।
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कहां गई नगदी, सोना
अब सवाल यह उठ रहा है कि रामवृक्ष के आफिस में मौजूद पैसा, सोना और चांदी कहां गए। कहीं ऐसा तो नहीं कि रामवृक्ष का ही कोई आदमी यहां से पैसा लेकर भाग गया हो। यह भी हो सकता है कि चंदनबोस या फिर रामवृक्ष का बेटा यहां से पैसा लेकर भागा हो। पुलिस ने दो जून से पांच जून तक जब आपरेशन सर्च चलाया था, तब कुछ जेवरात ही पुलिस को मिले भी थे। ये भी चांदी के जेवरात थे।
बेटे और पत्नी के नाम कर रखा था पैसा
रामवृक्ष ने अपने बेटे विवेक स्वाधीन यादव और पत्नी के नाम से भी पैसा जमा कर रखा था। चंदे का जो भी पैसा उसके द्वारा वसूला जाता था वह पत्नी और बेटे के नाम से बैंक में जमा कर देता था। अब पुलिस भी उसका बैंक एकाउंट तलाशने में लग गई है। पुलिस पूछताछ में चंदनबोस ने बताया था कि कई जगह रामवृक्ष ने जमीन भी खरीद ली थी।
नेपाल तक फैला था रामवृक्ष का नेटवर्क
रामवृक्ष के संगठन का नेटवर्क नेपाल तक पहुंच गया था। वहां से भी पैसा आने की बात सामने आ रही है। चंदनबोस ने भी पुलिस पूछताछ में यह बताया था।
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पुलिस सूत्रों के अनुसार, चंदनबोस से पूछताछ और जांच में सामने आया है कि एक जून को जवाहर बाग में रामवृक्ष के आफिस में राकेश गुप्ता और चंदनबोस की मौजूदगी में चंदे की रकम को गिना गया था। उस दिन नगद में 80 लाख रुपये थे। जबकि जेवरात भी भारी मात्रा में थे। सोने के सिक्के सर्वाधिक थे। जेवरात को भी तौला गया था। सोना ही 5 किलो निकला। चांदी भी दस किलो से ऊपर बताई जा रही है। इसे एक-दो दिन में अलग-अलग खातों में जमा कराया जाना था।
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सूत्रों का कहना है कि रामवृक्ष के पास दो जून को भी चंदे की रकम आनी थी। सुबह के वक्त बिहार, झारखंड, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के जनपदों से भी पैसा पहुंच रहा था। इस हिसाब से माना जा रहा है कि एक से दो करोड़ रुपया और पहुंचता।
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कहां गई नगदी, सोना
अब सवाल यह उठ रहा है कि रामवृक्ष के आफिस में मौजूद पैसा, सोना और चांदी कहां गए। कहीं ऐसा तो नहीं कि रामवृक्ष का ही कोई आदमी यहां से पैसा लेकर भाग गया हो। यह भी हो सकता है कि चंदनबोस या फिर रामवृक्ष का बेटा यहां से पैसा लेकर भागा हो। पुलिस ने दो जून से पांच जून तक जब आपरेशन सर्च चलाया था, तब कुछ जेवरात ही पुलिस को मिले भी थे। ये भी चांदी के जेवरात थे।
बेटे और पत्नी के नाम कर रखा था पैसा
रामवृक्ष ने अपने बेटे विवेक स्वाधीन यादव और पत्नी के नाम से भी पैसा जमा कर रखा था। चंदे का जो भी पैसा उसके द्वारा वसूला जाता था वह पत्नी और बेटे के नाम से बैंक में जमा कर देता था। अब पुलिस भी उसका बैंक एकाउंट तलाशने में लग गई है। पुलिस पूछताछ में चंदनबोस ने बताया था कि कई जगह रामवृक्ष ने जमीन भी खरीद ली थी।
नेपाल तक फैला था रामवृक्ष का नेटवर्क
रामवृक्ष के संगठन का नेटवर्क नेपाल तक पहुंच गया था। वहां से भी पैसा आने की बात सामने आ रही है। चंदनबोस ने भी पुलिस पूछताछ में यह बताया था।