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रातभर जागकर की अल्लाह की इबादत

Sun, 22 May 2016 11:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी Updated Sun, 22 May 2016 11:33 PM IST
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To wake up throughout the night worshiping Allah
इबादत - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
 शब-ए-बारात का पर्व पूरी अकीदत के साथ मनाया गया। दिनभर घरों में विशेष पकवान बने। शाम को फातिहा हुई। लोगों ने मस्जिदों में रातभर जागकर विशेष नफिल नमाज पढ़ी। 
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रविवार को शब-ए-बरात का पर्व था। त्योहार के मद्देनजर घरों में लजीज पकवान बनाए गए। विशेष रूप से कई किस्म के हलवे तैयार किए गए। शाम को उस पर फातिहा हुई। इशा की नमाज के बाद मस्जिदों में तिलावत ए कुरान पाक के साथ लोगों ने यह रात अल्लाह की इबादत में गुजारी। वहीं महिलाओं ने घर में रातभर जागकर इबादत की। शब-ए-बरात इस्लामी वर्ष के माह शाबान अर्थात आठवें माह की 15 तारीख को मनाई जाती है। आज के दिन अल्लाह अपने बंदों को गुनाह से निजात दिलाता है। यानि जो बंदा सच्चे मन से खुदा से माफी मांगता है, आज की रात खुदा उसे माफ कर देता है। इसके अलावा फरिश्तों के लिए यह ईद की रात होती है। इस अवसर पर मस्जिदों व घरों में विशेष रोशनी की गई। जामा मस्जिद के पेश इमाम मोहम्मद शमी अहमद ने रातभर लोगों को नफिल की नमाज पढ़ाई। तकरीर भी की गई। 
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करहल में भी त्योहार की दिखी चहल-पहल
करहल। शब-ए-बरात का त्योहार कस्बा में भी अकीदत के साथ मनाया गया। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इस मौके पर मस्जिदों और घरों में नमाज पढ़कर खुदा की इबादत कर दुआ मांगी। साथ ही कब्रिस्तान जाकर अपने बुजुर्गों की कबरों पर रोशनी कर फातिहा पढ़ी। साथ ही रोजा भी रखा गया। त्योहार की चहल पहल सुबह से ही दिखाई देने लगी।
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कसबा में शब-ए-बरात पर मुसलमानों ने मस्जिदों में नमाज अदा की और पूरी रात जागकर इबादत करते हुए बिताई। महिलाओं ने घरों पर कुरआन-ए-पाक की तिलावत की। मस्जिदों में मीलाद एवं नातशरीफ का कार्यक्रम हुआ। जगह जगह जिक्र-ए नवी हुआ। मुस्लिम घरों में पकवान के रूप में विभिन्न प्रकार के हलवा आदि बनाया गया। इसके बाद शाम को अमीर हम्जा रहतुल्ला अलैह की फातिहा हुई। सुबह होते ही लोग कब्रिस्तान में पहुंचे और बुजुर्गों की मजार पर फूल अगरबत्ती लगाकर दुआ मांगी। खुदा की राह में रोजा रखा। इस त्योहार से ही रमजान के आगाज का पैगाम मिल जाता है। त्योहार पर नगर की मस्जिदों में इबादत की गई।


अल्लाह की इबादत और पूर्वजों को याद करने का दिन
मैनपुरी। खानकाहे रशिदिया के सज्जादानशीं अब्दुल रहमान चिश्ती उर्फ बबलू मियां का कहना है कि यह रात अल्लाह से गुनाहों की माफी मांगने उनकी इबादत करने का दिन है। साथ ही इस दिन पूर्वजों को कब्रिस्तान में जाकर याद किया जाता है। साथ ही उनकी कब्र पर रोशनी की जाती है। ताकि अल्लाह उन को कब्र के अजाब से दूर रखे। साथ ही हमारे गुनाहों को माफ कर हम पर रहमत फरमाए। ऐसा माना जाता है कि इस रात 117 नफिल नमाज पढ़ने पर सभी मुरादें पूरी होती हैं।
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