{"_id":"5790cd8a4f1c1b1a7fc4c93c","slug":"the-student-could-not-explain-the-meaning-of-indira","type":"story","status":"publish","title_hn":"छात्र नहीं बता सके इंद्रा शब्द का अर्थ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छात्र नहीं बता सके इंद्रा शब्द का अर्थ
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Thu, 21 Jul 2016 10:57 PM IST
विज्ञापन
निरीक्षण
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डीआईओएस ने गुरुवार को दो इंटर कालेजों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्हाेंने छात्रों से मुहावरे और शब्दों के अर्थ पूछे, लेकिन छात्र इंद्रा शब्द का अर्थ तक नहीं बता सके। साथ ही उपस्थिति भी काफी कम नजर आई। उन्होंने शिक्षकों से शैक्षिक स्तर में सुधार लाने को कहा।
डीआईओएस आरपी यादव सबसे पहले नगर के आरसी बालिका इंटर कालेज पहुंचे। यहां उन्हें छात्राओं की उपस्थित 70 प्रतिशत मिली। साथ ही उनके द्वारा पूछे गए कुछ सवालों का जवाब भी छात्राओं ने दिया। वहीं कोर्स धीमी गति से कराया जा रहा था। आगरा रोड स्थित राजकीय इंटर कालेज में पढ़ाई का स्तर काफी निम्न मिला। यहां छात्र मुहावरों का अर्थ नहीं बता सके। इतना ही नहीं इंद्रा शब्द का अर्थ भी नहीं बता सके। साथ ही इस स्कूल में बच्चों की उपस्थिति भी 50 प्रतिशत थी। डीआईओएस ने लगभग एक घंटे क्लास ली।
डीआईओएस ने शिक्षकों से शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने और उपस्थित बढ़ाने के निर्देश दिए। साथ ही कहा मंथ वार सिलेबस बनाकर पढ़ाएं। साथ ही प्रैक्टीकल की तैयारी कराते रहें। ताकि समय से कोर्स पूरा हो सके और विद्यार्थी रिवीजन कर सकें।
विज्ञापन
विज्ञापन
डीआईओएस आरपी यादव सबसे पहले नगर के आरसी बालिका इंटर कालेज पहुंचे। यहां उन्हें छात्राओं की उपस्थित 70 प्रतिशत मिली। साथ ही उनके द्वारा पूछे गए कुछ सवालों का जवाब भी छात्राओं ने दिया। वहीं कोर्स धीमी गति से कराया जा रहा था। आगरा रोड स्थित राजकीय इंटर कालेज में पढ़ाई का स्तर काफी निम्न मिला। यहां छात्र मुहावरों का अर्थ नहीं बता सके। इतना ही नहीं इंद्रा शब्द का अर्थ भी नहीं बता सके। साथ ही इस स्कूल में बच्चों की उपस्थिति भी 50 प्रतिशत थी। डीआईओएस ने लगभग एक घंटे क्लास ली।
विज्ञापन
डीआईओएस ने शिक्षकों से शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने और उपस्थित बढ़ाने के निर्देश दिए। साथ ही कहा मंथ वार सिलेबस बनाकर पढ़ाएं। साथ ही प्रैक्टीकल की तैयारी कराते रहें। ताकि समय से कोर्स पूरा हो सके और विद्यार्थी रिवीजन कर सकें।
विज्ञापन