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दिल जिससे जिंदा है वो तमन्ना तुम्ही तो हो...
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी।
Updated Tue, 11 Apr 2017 11:15 PM IST
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दिल जिससे जिंदा है वो तमन्ना तुम्ही तो हो...
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा रोड स्थित खानकाहे रशीदिया में हजरत सूफी शाह महमूद मियां के एक दिवसीय उर्स का कुल शरीफ की रस्म के साथ समापन हो गया। दरबार में हाजिरी लगाकर अकीदतमंदों ने अमन चैन की दुआ मांगी।
उर्स की शुरुआत मौलाना हाफिज, कारी मोहम्मद आजाद, मोहम्मद मोमिन अशरफ साहब ने कुरआन-ए पाक की तिलावत के साथ की। इसके बाद तकरीर करते हुए मौलाना डा. अहमद नईमी और अलीगढ़ से आए मौलाना सरवर रजा ने बुजुर्गानेदीन की करामातों पर रोशनी डाली। इस दौरान नात ए नबी पेश की गईं। इसके बाद सूफियाना कव्वाली की महफिल सजाई गई, जिसमें कव्वाल उवैस फैज ने ‘दिल जिससे जिंदा है, वो तमन्ना तुम्हीं तो हो, हम जिसमें बस रहे हैं, वो दुनिया तुम्हीं तो हो’ पेश की। इसके अलावा कव्वाल रिहान, शफी, फरीद अहमद, भूरा अमजद, गुलाम अब्बास ने अपने-अपने सूफियाना कलाम पेश किए।
इसके बाद खानकाह के बच्चों ने नातिया कलाम पेश किए। इसमें हाफिज आलिम, हाफिज मोमिन, हाफिज जीशान, हाफिज आमिर, हाफिज नफीस, हाफिज अलियार, हाफिज शादाब, हाफिज इश्तियाक, हाफिज आफताब आदि शामिल हैं। वहीं अकीदतमंदों ने दरगाह पर चादरपोशी कर मन्नत मांगी। कार्यक्रम में हजरत अली की पैदाइश भी मनाई गई। इसके बाद कुल शरीफ की फातिहा हुई। इसमें देश में अमन और चैन की दुआ मांगी गई। इसके साथ ही उर्स का समापन हो गया। सज्जादानशीं हाजी अब्दुल रहमान खां चिश्ती, आफाक मियां, अकबर कुरैशी, इकरार इलाही, हाजी मरगूब, हाजी महमूद इलाही, हाजी असरार इलाही, हाजी जौहरी साहब आदि मौजूद रहे।
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उर्स की शुरुआत मौलाना हाफिज, कारी मोहम्मद आजाद, मोहम्मद मोमिन अशरफ साहब ने कुरआन-ए पाक की तिलावत के साथ की। इसके बाद तकरीर करते हुए मौलाना डा. अहमद नईमी और अलीगढ़ से आए मौलाना सरवर रजा ने बुजुर्गानेदीन की करामातों पर रोशनी डाली। इस दौरान नात ए नबी पेश की गईं। इसके बाद सूफियाना कव्वाली की महफिल सजाई गई, जिसमें कव्वाल उवैस फैज ने ‘दिल जिससे जिंदा है, वो तमन्ना तुम्हीं तो हो, हम जिसमें बस रहे हैं, वो दुनिया तुम्हीं तो हो’ पेश की। इसके अलावा कव्वाल रिहान, शफी, फरीद अहमद, भूरा अमजद, गुलाम अब्बास ने अपने-अपने सूफियाना कलाम पेश किए।
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इसके बाद खानकाह के बच्चों ने नातिया कलाम पेश किए। इसमें हाफिज आलिम, हाफिज मोमिन, हाफिज जीशान, हाफिज आमिर, हाफिज नफीस, हाफिज अलियार, हाफिज शादाब, हाफिज इश्तियाक, हाफिज आफताब आदि शामिल हैं। वहीं अकीदतमंदों ने दरगाह पर चादरपोशी कर मन्नत मांगी। कार्यक्रम में हजरत अली की पैदाइश भी मनाई गई। इसके बाद कुल शरीफ की फातिहा हुई। इसमें देश में अमन और चैन की दुआ मांगी गई। इसके साथ ही उर्स का समापन हो गया। सज्जादानशीं हाजी अब्दुल रहमान खां चिश्ती, आफाक मियां, अकबर कुरैशी, इकरार इलाही, हाजी मरगूब, हाजी महमूद इलाही, हाजी असरार इलाही, हाजी जौहरी साहब आदि मौजूद रहे।
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