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धर्म की रक्षा के लिए भगवान लेते है अवतार
Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
Anonymous User
ब्यूरो,अमर उजाला मैनपुरी
ब्यूरो,अमर उजाला मैनपुरी
Published by: Anonymous User
Updated Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
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मैनपुरी। वृंदावन धाम से आए कथा व्यास सुदर्शन जी महाराज ने कहा कि जब-जब धरती पर अत्याचार और अनाचार बढ़ते हैं तब-तब भगवान अवतार लेते हैं। धर्म की रक्षा और पापियों के विनाश के लिए भगवान कृष्ण ने अवतार लिया। भगवान कृष्ण जन्म का प्रसंग आते ही नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की जयकारों से पंडाल गूंज उठा।
बुधवार को ग्राम टिंडौली में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथाव्यास सुदर्शन जी महाराज ने कृष्ण जन्म की लीला का वर्णन लिया। भगवान कृष्ण के जन्म का प्रसंग आते ही हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की और बधाई गीतों पर महिलाएं और श्रद्धालु जमकर थिरके। परीक्षित बने राजेंद्र नाथ पांडेय सिर पर सूप में कृष्ण रूपी बालक को लेकर पंडाल में आए तो बाल रूपी कृष्ण के दर्शन और पूजा अर्चना करने की श्रद्धालुओं में होड़ लग गई। भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव पर खिलौने, टॉफी आदि लुटाए गए। कथा में प्रवचन करते हुए सुदर्शन जी महाराज ने कहा कि प्रहलाद जैसा अटल विश्वास और उनके जैसा भाव आ जाए तो भगवान दूर जा ही नहीं सकते। भगवान के प्रति विश्वास और शरणागति का भाव ही सर्वोत्तम है। विश्वास और श्रद्धा हो तो भगवान बिन बुलाए दौड़े चले आते हैं। भक्त के लिए भगवान सब कुछ करने को तत्पर रहते हैं। उन्होंने समुद्र मंथन और वामन अवतार के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि भक्त के कष्ट और प्रत्येक दुख के निवारण के लिए भगवान तत्पर रहते हैं।
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बुधवार को ग्राम टिंडौली में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथाव्यास सुदर्शन जी महाराज ने कृष्ण जन्म की लीला का वर्णन लिया। भगवान कृष्ण के जन्म का प्रसंग आते ही हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की और बधाई गीतों पर महिलाएं और श्रद्धालु जमकर थिरके। परीक्षित बने राजेंद्र नाथ पांडेय सिर पर सूप में कृष्ण रूपी बालक को लेकर पंडाल में आए तो बाल रूपी कृष्ण के दर्शन और पूजा अर्चना करने की श्रद्धालुओं में होड़ लग गई। भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव पर खिलौने, टॉफी आदि लुटाए गए। कथा में प्रवचन करते हुए सुदर्शन जी महाराज ने कहा कि प्रहलाद जैसा अटल विश्वास और उनके जैसा भाव आ जाए तो भगवान दूर जा ही नहीं सकते। भगवान के प्रति विश्वास और शरणागति का भाव ही सर्वोत्तम है। विश्वास और श्रद्धा हो तो भगवान बिन बुलाए दौड़े चले आते हैं। भक्त के लिए भगवान सब कुछ करने को तत्पर रहते हैं। उन्होंने समुद्र मंथन और वामन अवतार के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि भक्त के कष्ट और प्रत्येक दुख के निवारण के लिए भगवान तत्पर रहते हैं।
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