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समान पक्षी विहार: हक के लिए करेंगे आंदोलन
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी।
Updated Sat, 07 May 2016 11:16 PM IST
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समान पक्षी विहार: हक के लिए करेंगे आंदोलन
- फोटो : अमर उजाला
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समान पक्षी विहार के लिए अधिग्रहीत जमीन का मुआवजा 26 साल पहले के सर्किल रेट पर मिलने की खबर से किसानों में आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि सरकार ने वर्तमान सर्किल रेट से मुआवजा नहीं दिया तो वे पैसा नहीं लेंगे। अपने हक के लिए वे आंदोलन करने से लेकर कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाएंगे।
उल्लेखनीय है कि जिले में समान पक्षी विहार के लिए 1990 में 1276.41 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की गई थी। इसमें से 841.66 एकड़ कृषि योग्य भूमि भी शामिल थी। तभी से लोग मुआवजा के लिए संघर्ष कर रहे थे। इसके लिए दो किस्तों में शासन से राशि भी भेज दी गई थी, लेकिन मुआवजा किस रेट से दिया जाए, इसका निर्धारण नहीं हो पा रहा था। लगभग एक हफ्ते पूर्व आए शासन के पत्र में स्पष्ट निर्देश हैं कि मुआवजा 1990 के सर्किल रेट से दिया जाएगा। यह खबर मिलते ही संबंधित किसानों और लोगों में आक्रोश फैल गया।
मैनपुरी विकास मंच के संस्थापक अनुराग पांडेय की समान पक्षी विहार में दस बीघा जमीन अधिग्रहीत की गई थी। वहीं मुआवजा के लिए भी उन्होंने काफी संघर्ष किया था। उनका कहना है कि सरकार यदि वर्तमान सर्किल रेट पर मुआवजा देगी तो ही वे लेंगे। अन्यथा कोर्ट की शरण लेंगे। उनका कहना है कि प्रदेश सरकार मुआवजा देना ही नहीं चाहती। यही कारण है कि आए दिन नए-नए नियम निकाले जा रहे हैं।
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वहीं राघवेंद्र सिंह चौहान उनके तीन भाई और मां की दस एकड़ जमीन अधिग्रहीत की गई थी। वह वर्तमान में किशनी के मोहल्ला हवेली में रहते हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार ने नए सर्किल रेट से मुआवजा नहीं दिया तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
वहीं सुभाष यादव की सौ बीघा, दो भाई रामवीर व श्यामवीर की 40-40 बीघा जमीन गई थी। उनका कहना है कि नए सर्किल रेट से मुआवजा नहीं मिला तो वे अपनी जमीन को जोतना शुरू कर देंगे। इसके अलावा किसान प्रकाश यादव की 25 बीघा और मोतीलाल शुक्ला की 20 बीघा जमीन भी अधिग्रहीत की गई थी। इन लोगों का कहना है कि सरकार मुआवजा न देने के लिए नए-नए नियम निकाल रही है।
पैसा आया, लेकिन वितरण में फंसा पेेंच
मैनपुरी। समान पक्षी विहार के लिए अधिग्रहीत जमीन के लिए शासन से चार माह पहले ही दो किस्तों में लगभग 83 करोड़ रुपया आ चुका है, लेकिन तभी से यह पेंच फंसा हुआ था कि आखिर मुआवाज किस सर्किल रेट से दिया जाए। यही कारण है पैसा आने के बाद भी मुआवजा का वितरण नहीं हो सका है।
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उल्लेखनीय है कि जिले में समान पक्षी विहार के लिए 1990 में 1276.41 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की गई थी। इसमें से 841.66 एकड़ कृषि योग्य भूमि भी शामिल थी। तभी से लोग मुआवजा के लिए संघर्ष कर रहे थे। इसके लिए दो किस्तों में शासन से राशि भी भेज दी गई थी, लेकिन मुआवजा किस रेट से दिया जाए, इसका निर्धारण नहीं हो पा रहा था। लगभग एक हफ्ते पूर्व आए शासन के पत्र में स्पष्ट निर्देश हैं कि मुआवजा 1990 के सर्किल रेट से दिया जाएगा। यह खबर मिलते ही संबंधित किसानों और लोगों में आक्रोश फैल गया।
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मैनपुरी विकास मंच के संस्थापक अनुराग पांडेय की समान पक्षी विहार में दस बीघा जमीन अधिग्रहीत की गई थी। वहीं मुआवजा के लिए भी उन्होंने काफी संघर्ष किया था। उनका कहना है कि सरकार यदि वर्तमान सर्किल रेट पर मुआवजा देगी तो ही वे लेंगे। अन्यथा कोर्ट की शरण लेंगे। उनका कहना है कि प्रदेश सरकार मुआवजा देना ही नहीं चाहती। यही कारण है कि आए दिन नए-नए नियम निकाले जा रहे हैं।
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वहीं राघवेंद्र सिंह चौहान उनके तीन भाई और मां की दस एकड़ जमीन अधिग्रहीत की गई थी। वह वर्तमान में किशनी के मोहल्ला हवेली में रहते हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार ने नए सर्किल रेट से मुआवजा नहीं दिया तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
वहीं सुभाष यादव की सौ बीघा, दो भाई रामवीर व श्यामवीर की 40-40 बीघा जमीन गई थी। उनका कहना है कि नए सर्किल रेट से मुआवजा नहीं मिला तो वे अपनी जमीन को जोतना शुरू कर देंगे। इसके अलावा किसान प्रकाश यादव की 25 बीघा और मोतीलाल शुक्ला की 20 बीघा जमीन भी अधिग्रहीत की गई थी। इन लोगों का कहना है कि सरकार मुआवजा न देने के लिए नए-नए नियम निकाल रही है।
पैसा आया, लेकिन वितरण में फंसा पेेंच
मैनपुरी। समान पक्षी विहार के लिए अधिग्रहीत जमीन के लिए शासन से चार माह पहले ही दो किस्तों में लगभग 83 करोड़ रुपया आ चुका है, लेकिन तभी से यह पेंच फंसा हुआ था कि आखिर मुआवाज किस सर्किल रेट से दिया जाए। यही कारण है पैसा आने के बाद भी मुआवजा का वितरण नहीं हो सका है।