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जिला अस्पताल को चाहिए संजीवनी
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Sat, 23 Jul 2016 11:32 PM IST
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इलाज
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सूबे में जनपद का विशेष महत्व है। सपा सरकार के समय उम्मीद की जाती है कि जिले में हर सुविधा प्राथमिकता के आधार पर मिलेगी, लेकिन ऐसा है नहीं। अस्पताल में चिकित्सकों और कर्मियों की तैनाती न होने से रोगियों को ठीक से इलाज तक नहीं मिल रहा है। जिला अस्पताल को खुद ही संजीवनी चाहिए, ताकि वहां पर लोगों का ठीक से इलाज हो सके।
अस्पतालों में न तो डाक्टर हैं और न ही पर्याप्त मात्रा उपकरण। जिला अस्पताल की बात करें तो यहां मात्र एक ही सर्जन है जबकि दो होने चाहिए। ऐसे में सामान्य रोगियों को भी सर्जरी के लिए बाहर रेफर कर दिया जाता है। पैथोलॉजिस्ट की तैनाती न होने से मेडिकोलीगल के मामलों में पीड़ित और पुलिस को फीरोजाबाद जाना पड़ता है। सीटी स्कैन मशीन, टीएमटी मशीन, अल्ट्रासाउंड भी स्थापित हैं। विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के चलते इनकी सुविधाएं भी लोगों को नहीं मिल पा रही हैं।
वहीं जिला महिला अस्पताल की बात करें तो यहां के लिए 20 करोड़ रुपये की लागत से 100 बेड की महिला विंग भी बनवाई गई है, लेकिन इसमें व्यवस्था पुराने अस्पताल लायक भी नहीं है। अस्पताल में सिर्फ एक महिला सीएमएस डा. निम्मी बेगम की ही स्थायी तैनाती है। सीएमएस के कार्य के अलावा वह रोगियों को भी देखती हैं। वहीं संविदा पर तैनात डा. नीतू, डा. सपना चौहान, डा. शैलजा मरीजों की देखती हैं। वहीं हफ्ते में एक दिन इन डाक्टरों में से ही एक को सीएचसी या पीएचसी पर बैठना पड़ता है। महिला अस्पताल में डाक्टरों की कमी के चलते एक डाक्टर एक दिन में 200 से लेकर 300 मरीज देखता है। इससे डाक्टर और रोगी दोनों को परेशानी उठानी पड़ती है। यदि मानक के अनुरूप डाक्टर हों तो लंबी लाइन न लगानी पड़े। वहीं सर्जन न होने के चलते अधिकांश प्रसव पीड़ा से परेशान महिलाओं को सीजेरियन आपरेशन के लिए बाहर रेफर दिया जाता है।
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एक वर्ष खराब पड़ी
वर्तमान में जिला अस्पताल में ब्लड सुगर, ब्लड यूरिया, सीरम क्रेटिनन, कोलिस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड, सीरम ब्लूबिरिन, एसजीओटी, एसजीपीटी, सीरम कैलिश्यम आदि जांचों के लिए रोगियों को भटकना पड़ रहा है। कारण, एक वर्ष से पैथोलॉजी में एनेलॉइजर का खराब होना है। इसके चलते रोगी मजबूरन काफी अधिक कीमत पर यह जांच निजी पैथोलॉजी पर करा रहे हैं।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों और शासन को कई बार लिखा गया है। शासन से आश्वासन भी मिला है कि शीघ्र ही चिकित्सक आएंगे।
डा. केके शर्मा, सीएमओ मैनपुरी
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अस्पतालों में न तो डाक्टर हैं और न ही पर्याप्त मात्रा उपकरण। जिला अस्पताल की बात करें तो यहां मात्र एक ही सर्जन है जबकि दो होने चाहिए। ऐसे में सामान्य रोगियों को भी सर्जरी के लिए बाहर रेफर कर दिया जाता है। पैथोलॉजिस्ट की तैनाती न होने से मेडिकोलीगल के मामलों में पीड़ित और पुलिस को फीरोजाबाद जाना पड़ता है। सीटी स्कैन मशीन, टीएमटी मशीन, अल्ट्रासाउंड भी स्थापित हैं। विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के चलते इनकी सुविधाएं भी लोगों को नहीं मिल पा रही हैं।
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वहीं जिला महिला अस्पताल की बात करें तो यहां के लिए 20 करोड़ रुपये की लागत से 100 बेड की महिला विंग भी बनवाई गई है, लेकिन इसमें व्यवस्था पुराने अस्पताल लायक भी नहीं है। अस्पताल में सिर्फ एक महिला सीएमएस डा. निम्मी बेगम की ही स्थायी तैनाती है। सीएमएस के कार्य के अलावा वह रोगियों को भी देखती हैं। वहीं संविदा पर तैनात डा. नीतू, डा. सपना चौहान, डा. शैलजा मरीजों की देखती हैं। वहीं हफ्ते में एक दिन इन डाक्टरों में से ही एक को सीएचसी या पीएचसी पर बैठना पड़ता है। महिला अस्पताल में डाक्टरों की कमी के चलते एक डाक्टर एक दिन में 200 से लेकर 300 मरीज देखता है। इससे डाक्टर और रोगी दोनों को परेशानी उठानी पड़ती है। यदि मानक के अनुरूप डाक्टर हों तो लंबी लाइन न लगानी पड़े। वहीं सर्जन न होने के चलते अधिकांश प्रसव पीड़ा से परेशान महिलाओं को सीजेरियन आपरेशन के लिए बाहर रेफर दिया जाता है।
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एक वर्ष खराब पड़ी
वर्तमान में जिला अस्पताल में ब्लड सुगर, ब्लड यूरिया, सीरम क्रेटिनन, कोलिस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड, सीरम ब्लूबिरिन, एसजीओटी, एसजीपीटी, सीरम कैलिश्यम आदि जांचों के लिए रोगियों को भटकना पड़ रहा है। कारण, एक वर्ष से पैथोलॉजी में एनेलॉइजर का खराब होना है। इसके चलते रोगी मजबूरन काफी अधिक कीमत पर यह जांच निजी पैथोलॉजी पर करा रहे हैं।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों और शासन को कई बार लिखा गया है। शासन से आश्वासन भी मिला है कि शीघ्र ही चिकित्सक आएंगे।
डा. केके शर्मा, सीएमओ मैनपुरी