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नागिन के खौफ से परिवारीजन गांव से पलायन को मजबूर
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Thu, 15 Sep 2016 11:35 PM IST
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snake bite
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गांव उसनीधा में नागिन के बदले का अंधविश्वास जोरों पर है। ग्रामीण जहां रातों में जागकर रखवाली कर रहे हैं वहीं मृतक के परिवारीजन नागिन के भय से गांव से पलायन करने को विवश हैं।
गांव उसनीधा निवासी रवि ने घर में निकले एक सांप को कुछ समय पूर्व मार दिया था जिसके कुछ दिनों बाद ही सोते समय उसे सांप ने डस लिया। रवि की मौत के ठीक सातवें दिन पत्नी शशि की भी सांप के काटने से मौत हो गई। उक्त घटना के बाद गांव आए बायगीरों ने इसे नागिन का बदला बताकर ग्रामीणों में अंधविश्वास फैला दिया। कुछ दिनों बाद दादी और चाचा की देखरेख में पल रहे मृतक के दो वर्षीय पुत्र गोलू को भी सांप ने काटने की कोशिश की। इसके बाद भयभीत शशि के परिवारीजन गोलूू को साथ ले गए।
मृतक की मां रामश्री और छोटा भाई कन्हैया जिस कच्चे में रह रहा था। उसे ग्रामीणों ने नागिन की तलाश में ढहा दिया। दोनों अब मकान के एक हिस्से में टीनशेड में रह रहे हैं। वहीं ग्रामीणों में नागिन का भय इस कदर है कि वह मंदिरों में शरण ले रहे हैं। वहां भजन कीर्तन कर रात गुजारने को मजबूर हैं। कुछ ग्रामीण रात भर जागकर परिवार की रखवाली कर रहे हैं। वहीं मृतक का परिवार नागिन के भय और शासन से किसी भी प्रकार की सहायता न मिलने के बाद अब गांव से पलायन करने की बात कह रहा है।
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गांव उसनीधा निवासी रवि ने घर में निकले एक सांप को कुछ समय पूर्व मार दिया था जिसके कुछ दिनों बाद ही सोते समय उसे सांप ने डस लिया। रवि की मौत के ठीक सातवें दिन पत्नी शशि की भी सांप के काटने से मौत हो गई। उक्त घटना के बाद गांव आए बायगीरों ने इसे नागिन का बदला बताकर ग्रामीणों में अंधविश्वास फैला दिया। कुछ दिनों बाद दादी और चाचा की देखरेख में पल रहे मृतक के दो वर्षीय पुत्र गोलू को भी सांप ने काटने की कोशिश की। इसके बाद भयभीत शशि के परिवारीजन गोलूू को साथ ले गए।
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मृतक की मां रामश्री और छोटा भाई कन्हैया जिस कच्चे में रह रहा था। उसे ग्रामीणों ने नागिन की तलाश में ढहा दिया। दोनों अब मकान के एक हिस्से में टीनशेड में रह रहे हैं। वहीं ग्रामीणों में नागिन का भय इस कदर है कि वह मंदिरों में शरण ले रहे हैं। वहां भजन कीर्तन कर रात गुजारने को मजबूर हैं। कुछ ग्रामीण रात भर जागकर परिवार की रखवाली कर रहे हैं। वहीं मृतक का परिवार नागिन के भय और शासन से किसी भी प्रकार की सहायता न मिलने के बाद अब गांव से पलायन करने की बात कह रहा है।
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