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Mainpuri News: टूटती उम्मीदें घोंट रहीं युवाओं की सांसें

Thu, 10 Sep 2026 12:18 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Thu, 10 Sep 2026 12:18 AM IST
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mainpuri news suicide prevention day
मैनपुरी। छोटी-छोटी बातों पर तनाव, गुस्सा और पारिवारिक कलह युवाओं को आत्मघाती कदम उठाने की ओर धकेल रहे हैं। जिले में आत्महत्या के प्रयासों में सर्वाधिक मामले दहेज प्रताड़ना और मानसिक तनाव के सामने आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में युवाओं को पैसों या आर्थिक मदद से कहीं अधिक अपनों के भावनात्मक और मानसिक सहारे की जरूरत होती है।
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जिला अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, बीते 12 महीनों में आत्महत्या के प्रयास के 1009 मामले दर्ज किए गए। इनमें से 854 लोगों को समय पर इलाज मिलने से बचा लिया गया, जबकि 155 लोग अस्पताल पहुंचने से पहले या देरी के कारण अपनी जान गंवा बैठे।
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संवादहीनता बढ़ा रही जोखिम
युवाओं में आत्मघाती विचारों के पीछे कई बार बहुत छोटी लेकिन भावनात्मक वजहें होती हैं। जब कोई व्यक्ति अपनी पीड़ा किसी से साझा नहीं कर पाता, तो वह एकाकीपन का शिकार हो जाता है। उसे डर रहता है कि उसकी समस्या समाज के सामने न आ जाए। इच्छाओं और भावनाओं को समझने वाला कोई न होना भी इस स्थिति को और गंभीर बना देता है।
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8 महीने में 2612 लोगों की हुई काउंसलिंग
जिला अस्पताल में पिछले 15 वर्षों से संचालित ''''मन कक्ष'''' मानसिक स्वास्थ्य सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वर्ष 2026 में 1 जनवरी से 31 अगस्त के बीच 2612 लोगों ने यहां मानसिक परामर्श लिया। बढ़ती मांग को देखते हुए 1 सितंबर 2026 से मनोचिकित्सक डॉ. दुर्ग प्रताप सिंह की स्थायी तैनाती की गई है। वे प्रत्येक सोमवार, मंगलवार और बुधवार को ''''मन कक्ष'''' में परामर्श व उपचार उपलब्ध कराएंगे।


इन लक्षणों को न करें नज़रअंदाज़

· लगातार उदास और अलग-थलग रहना।
· मन की स्थिति में अचानक उतार-चढ़ाव (मूड स्विंग्स)।
· बिना वजह बेचैनी, घबराहट और नींद न आना।
· पसंदीदा गतिविधियों में रुचि खत्म होना।
· लगातार नकारात्मक या जीवन से हताशा भरी बातें करना।

इन बातों का रखें ध्यान

· आर्थिक सहायता के साथ-साथ युवाओं को शारीरिक और भावनात्मक संबल दें।
· समय-समय पर उनके साथ बैठकर आत्मीय बातचीत करें और उनकी परेशानी समझें।
· उनके मित्रों के संपर्क में रहें, ताकि उनके मन की स्थिति का आभास हो सके।
· उनकी भावनाओं का सम्मान करें और कभी भी उनकी बातों का मज़ाक न उड़ाएं।

वर्जन
मन में नकारात्मक या आत्मघाती विचार आना असामान्य नहीं है, लेकिन इनकी गंभीरता को समझते हुए सही समय पर काउंसलिंग लेना बेहद ज़रूरी है। ये विचार स्थायी नहीं होते और समय व सही मार्गदर्शन से बदले जा सकते हैं।
· डॉ. दुर्ग प्रताप सिंह चौहान, मनोचिकित्सक, जिला अस्पताल
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