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Mainpuri News: पूर्व में कई बार सामान्य प्रसव के दौरान भी बरती गई है लापरवाही

Wed, 05 Aug 2026 11:13 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Wed, 05 Aug 2026 11:13 PM IST
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MAINPURI news hiv lady treatment case
मैनपुरी। सौ शैया अस्पताल में एचआईवी संक्रमित महिला के सिजेरियन प्रसव से जुड़े मामले में विभागीय जांच तेज कर दी गई है। जांच टीम ने अस्पताल के डॉक्टर, स्टाफ के साथ ही महिला के परिजन से भी पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए हैं। जांच टीम जल्द ही अपनी रिपोर्ट मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को सौंप देगी।
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मामले की जांच के लिए गठित टीम में वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. डीके शाक्य और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. उमा चौधरी शामिल हैं। इन दोनों विशेषज्ञों ने मामले से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल शुरू कर दी है। जांच दल ने सिजेरियन प्रसव कराने वाले चिकित्सकों से विस्तृत पूछताछ की है। इसके अलावा, लैब टेक्नीशियन और अन्य संबंधित स्टाफ से भी जानकारी ली गई है और लैब में की गई जांचों से संबंधित कार्डों का भी अवलोकन किया गया है।
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जांच टीम ने प्रसूता की जिठानी, पति और अन्य परिजन से भी बात की है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि महिला एआरटी (एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी) सेंटर पर कराई गई जांच में एचआईवी पॉजिटिव पाई गई थी। इसके बाद से उसका एआरटी सेंटर की देखरेख में उपचार चल रहा था। यह भी पता चला है कि महिला के परिवार में अन्य सदस्य भी एचआईवी पॉजिटिव हैं। चिंताजनक बात यह है कि प्रसव के दौरान महिला की जिठानी ने एआरटी सेंटर की रिपोर्ट को छुपा लिया था।
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जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मामले में किसकी लापरवाही सामने आती है। यदि किसी भी स्तर पर कोई चूक पाई जाती है, तो विभाग नियमानुसार कार्रवाई करेगा। इस तरह के मामले स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनशीलता और प्रोटोकॉल के पालन के महत्व को रेखांकित करते हैं, खासकर जब एचआईवी जैसे संवेदनशील संक्रमणों से जुड़े रोगी हों।


दवा के चलते कम हो गया था वायरस लोड
सौ शैया अस्पताल के सीएमएस डॉ. अरुण कुमार का कहना है कि एआरटी (एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी) सेंटर पर एचआईवी पॉजिटिव मिलने के बाद से महिला लगातार एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी का लाभ ले रही थी। इससे मरीज सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। उन्होंने बताया कि लगातार दवा सेवन करने के कारण महिला के अंदर एचआईवी की स्थिति बहुत कम रह गई है। यही कारण है कि कार्ड की पहली जांच में महिला एचआईवी पॉजिटिव नहीं दिखी। दूसरी जांच में भी वायरस का लोड काफी कम दिख रहा था। महिला के परिजन ने जब बच्चे को सिरप दिए जाने की बात कही तो इसे गंभीरता से लिया। यदि डॉक्टर सिरप की बात पर ध्यान नहीं देतीं तो प्रसव के बाद महिला सामान्य मरीजों के वार्ड में पहुंच जाती, जहां वह अन्य मरीजों और स्टाफ के लिए भी खतरा बन सकती थी। डॉक्टर की समझदारी से अन्य मरीजों को एचआईवी संक्रमण के खतरे से बचा लिया गया। डॉक्टर की सलाह पर महिला के प्रसव के दौरान प्रयोग में लाए गए गद्दे, आदि को जलाकर उसी दिन नष्ट कर दिया गया था।
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