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कागजों में अटकी ईशन नदी की सफाई
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Tue, 31 May 2016 11:20 PM IST
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ईशन नदी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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ईशन नदी की सफाई का कार्य अधिकारियों के कागजों में ही अटक गया है। 14 सालों में भी प्रस्ताव पर न तो मुहर लगी और न ही राशि ही जारी की गई। यही कारण है कि अभी तक नदी की हालत में कोई सुधार नहीं है। इस दौरान 2012 में शासन से मात्र 10 लाख रुपया आया भी तो उसका उपयोग स्थानीय अधिकारी नहीं कर पाए। ऐसे में ईशन नदी के स्वरूप को वापस लाना काफी मुश्किल लगता है।
ईशन नदी में सिल्ट सफाई और उसके चौड़ीकरण के लिए स्थानीय स्तर से अधिकारियों ने एक प्रस्ताव शासन को भेजा था। यह प्रस्ताव तब 89 करोड़ रुपये का था। तब से लेकर अभी तक यह प्रस्ताव शासन स्तर पर ही अटका हुआ है। इसको लेकर ने तो उसके बाद आए अधिकारियों ने ही कोई रुचि दिखाई और न ही शासन स्तर पर ही तेजी दिखाई गई। इसके चलते ईशन नदी की सफाई कागजों में ही सिमट कर रह गई। हालांकि इन 14 सालों में सन 2012 में शासन से जरूर ईशन नदी की सफाई के लिए 10 लाख रुपये की राशि आई, लेकिन यह भी स्थानीय अधिकारियों की उपेक्षा के चलते प्रयोग नहीं हो सकी। यदि इस राशि का प्रयोग कर लिया जाता तो शायद शहरी क्षेत्र में तो नदी की हालत को सुधारा जा सकता था।
नदी की सफाई के लिए लोगों को जागरूक होना जरूरी है, लेकिन यह काफी नहीं है। शासन स्तर पर दिखाई जा रही उदासीनता नदी की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार है। यदि अधिकारी थोड़ी सी भी तेजी दिखाएं तो नदी को उसका पुराना स्वरूप लौटाया जा सकता है।
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राम प्रकाश
नदी की सफाई के लिए शासन को प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए। यह संभव नहीं है कि स्थानीय लोग मिलकर इतनी राशि एकत्रित कर लें। यदि अधिकारी और शासन चाहे तो कुछ माह में ही नदी का स्वरूप बदल सकता है।
कमलेश
अधिकारियों की उदासीनता को दूर करने के लिए युवाओं और शहर के लोगों को आगे आना होगा। अन्यथा नदी की बदहाल सूरत को नहीं बदला जा सकता। जब लोग आवाज उठाएंगे तो अधिकारी और नेताओं को भी इस संबंध में सोचने और कुछ करने के लिए विवश होना पड़ेगा।
विवेक
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ईशन नदी में सिल्ट सफाई और उसके चौड़ीकरण के लिए स्थानीय स्तर से अधिकारियों ने एक प्रस्ताव शासन को भेजा था। यह प्रस्ताव तब 89 करोड़ रुपये का था। तब से लेकर अभी तक यह प्रस्ताव शासन स्तर पर ही अटका हुआ है। इसको लेकर ने तो उसके बाद आए अधिकारियों ने ही कोई रुचि दिखाई और न ही शासन स्तर पर ही तेजी दिखाई गई। इसके चलते ईशन नदी की सफाई कागजों में ही सिमट कर रह गई। हालांकि इन 14 सालों में सन 2012 में शासन से जरूर ईशन नदी की सफाई के लिए 10 लाख रुपये की राशि आई, लेकिन यह भी स्थानीय अधिकारियों की उपेक्षा के चलते प्रयोग नहीं हो सकी। यदि इस राशि का प्रयोग कर लिया जाता तो शायद शहरी क्षेत्र में तो नदी की हालत को सुधारा जा सकता था।
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नदी की सफाई के लिए लोगों को जागरूक होना जरूरी है, लेकिन यह काफी नहीं है। शासन स्तर पर दिखाई जा रही उदासीनता नदी की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार है। यदि अधिकारी थोड़ी सी भी तेजी दिखाएं तो नदी को उसका पुराना स्वरूप लौटाया जा सकता है।
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राम प्रकाश
नदी की सफाई के लिए शासन को प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए। यह संभव नहीं है कि स्थानीय लोग मिलकर इतनी राशि एकत्रित कर लें। यदि अधिकारी और शासन चाहे तो कुछ माह में ही नदी का स्वरूप बदल सकता है।
कमलेश
अधिकारियों की उदासीनता को दूर करने के लिए युवाओं और शहर के लोगों को आगे आना होगा। अन्यथा नदी की बदहाल सूरत को नहीं बदला जा सकता। जब लोग आवाज उठाएंगे तो अधिकारी और नेताओं को भी इस संबंध में सोचने और कुछ करने के लिए विवश होना पड़ेगा।
विवेक