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गुलशने हिंद को लहू से सींचा है हमने...
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Sun, 23 Apr 2017 11:19 PM IST
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मुशायरा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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देश में गंगा जमुनी तहजीब के प्रतीक मुशायरे फिरका परस्त लोगों को संदेश देते हैं कि हिंदी और उर्दू को अलग नहीं किया जा सकता। समाज का ताना बाना हिंदू मुस्लिमों ने मिलकर बुना है। जिसको आजकल बचाए रखने की जरूरत है। यह बातें सांसद तेजप्रताप सिंह यादव ने कहीं।
श्रीदेवी मेला एवं ग्राम सुधार प्रदर्शनी के कादंबरी रंगमंच पर शनिवार की रात शफीउद्दीन मंसूरी के संयोजन में हुए आल इंडिया मुशायरा का सांसद ने फीता काटकर तथा यश भारती पुरस्कार से सम्मानित दीन मोहम्मद दीन ने शमा रोशन कर किया। मीशन गोपालपुरी ने पढ़ा- गुलशने हिंद को सींचा है लहू से हमने, बीज नफरत के किसी को बोने नहीं देंगे। अना देहलवी ने-अना दिल मेरे कोई तमन्ना है तो इतनी है अगर मर जाऊं तो मुझको तिरंगे का कफन देना, जौहर कानपुरी ने- मुझे बुझा दे इसी फिकर में तू मरता है, ये आफताब मेरी रोशनी से डरता है।
डा. कलीम कैसर ने-कोशिश में ज्यादा न कम से हुई है, तामीरे वतन मैं से नही हम से हुई है। डा. पापूलर मेरठी ने-अजब नहीं है जो तुक्का भी तीर हो जाए, न जाने कौन सा गुंडा बजीर हो जाए। हिना तैमूरी ने कहा- आस को प्यास के साए से बचा रखा है, ऐ दिया मैंने सरेराह जला रखा है। आदिल रशीद ने कहा- रोटी की फिक्र ने उसे रिक्शा थमा दिया, भटका बहुत वो हाथ में डिग्री लिए हुए। हाशिम फिरोजाबादी ने कहा- जिनके हाथों से तिरंगा न संभाला जाए, ऐसे नेताओं को संसद से निकाला जाए।
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दीन मोहम्मद दीन ने- वक्त ऐ नाजुक संभल कर चाल चलना है, जमीं जलने लगी बचकर निकलना है। मुशायरे में सुहेल लखनवी, डा. आरिफा शबनाम, साइस्ता शना, कलीम नूरी, आमिर इटावी, अज्म साबिरी, चरन सिंह वशर, सविता असीम ने अपने कलाम पेश किए। मुशायरे की अध्यक्षता दीन मोहम्मद दीन ने संचालन नदीम फारुखी ने किया। सांसद, विधायक ब्रजेश कठेरिया, एमएलसी अरविंद यादव, बिल्लू यादव, बलवीर सिंह यादव, सूरज सिंह यादव, एएसपी शिष्यपाल सिंह, डीएसओ विकास गौतम, एसडीएम सदर अमित सिंह, राजस्व अधिकारी रामचंद्र का संयोजक, सह संयोजक चंद्रमोहन शर्मा के अलावा आयोजन समिति के सदस्य आरिफ मंसूरी, नासिर अली, प्रभूदयाल भांवत, ऐजाज मंसूरी, हाजी शकील अहमद ने स्वागत किया।
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श्रीदेवी मेला एवं ग्राम सुधार प्रदर्शनी के कादंबरी रंगमंच पर शनिवार की रात शफीउद्दीन मंसूरी के संयोजन में हुए आल इंडिया मुशायरा का सांसद ने फीता काटकर तथा यश भारती पुरस्कार से सम्मानित दीन मोहम्मद दीन ने शमा रोशन कर किया। मीशन गोपालपुरी ने पढ़ा- गुलशने हिंद को सींचा है लहू से हमने, बीज नफरत के किसी को बोने नहीं देंगे। अना देहलवी ने-अना दिल मेरे कोई तमन्ना है तो इतनी है अगर मर जाऊं तो मुझको तिरंगे का कफन देना, जौहर कानपुरी ने- मुझे बुझा दे इसी फिकर में तू मरता है, ये आफताब मेरी रोशनी से डरता है।
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डा. कलीम कैसर ने-कोशिश में ज्यादा न कम से हुई है, तामीरे वतन मैं से नही हम से हुई है। डा. पापूलर मेरठी ने-अजब नहीं है जो तुक्का भी तीर हो जाए, न जाने कौन सा गुंडा बजीर हो जाए। हिना तैमूरी ने कहा- आस को प्यास के साए से बचा रखा है, ऐ दिया मैंने सरेराह जला रखा है। आदिल रशीद ने कहा- रोटी की फिक्र ने उसे रिक्शा थमा दिया, भटका बहुत वो हाथ में डिग्री लिए हुए। हाशिम फिरोजाबादी ने कहा- जिनके हाथों से तिरंगा न संभाला जाए, ऐसे नेताओं को संसद से निकाला जाए।
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दीन मोहम्मद दीन ने- वक्त ऐ नाजुक संभल कर चाल चलना है, जमीं जलने लगी बचकर निकलना है। मुशायरे में सुहेल लखनवी, डा. आरिफा शबनाम, साइस्ता शना, कलीम नूरी, आमिर इटावी, अज्म साबिरी, चरन सिंह वशर, सविता असीम ने अपने कलाम पेश किए। मुशायरे की अध्यक्षता दीन मोहम्मद दीन ने संचालन नदीम फारुखी ने किया। सांसद, विधायक ब्रजेश कठेरिया, एमएलसी अरविंद यादव, बिल्लू यादव, बलवीर सिंह यादव, सूरज सिंह यादव, एएसपी शिष्यपाल सिंह, डीएसओ विकास गौतम, एसडीएम सदर अमित सिंह, राजस्व अधिकारी रामचंद्र का संयोजक, सह संयोजक चंद्रमोहन शर्मा के अलावा आयोजन समिति के सदस्य आरिफ मंसूरी, नासिर अली, प्रभूदयाल भांवत, ऐजाज मंसूरी, हाजी शकील अहमद ने स्वागत किया।