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डांस के लिए रियलिटी शो बने संजीवनी
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Thu, 28 Apr 2016 11:10 PM IST
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रियलिटी शो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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युवाओं में डांस के प्रति क्रेेज तेजी से बढ़ रहा है लेकिन लोकनृत्य से दूर हो रहे हैं। टीवी पर आने वाले रियलिटी शोज ने युवाओं मेें वेस्टर्न, हिपऑप और टैप डांस की ललक पैदा की है। भारतीय नृत्यों के प्रति नई पीढ़ी को जागरूक करने के लिए और अधिक प्रयास करने की जरूरत है।
आरसी डिग्री कालेज की शिक्षिका शैफाली यादव का कहना है कि लोक नृत्य के लिए कड़ी मेहनत और लंबी साधना की जरूरत पड़ती है। आधुनिक युग में करियर की चिंता करने वाले युवाओं के पास इतना समय नहीं है कि वो अधिक समय नृत्य को दे सकें। हालांकि रियलिटी शो के चलते युवाओं में डांस के प्रति रुझान बढ़ा है। शहर के युवा हर्ष कुमार का कहना है कि नई पीढ़ी वेस्टर्न डांस के लिए दीवानी है। हर्ष ने बताया उन्होंने इंडियन और वेस्टर्न की शिक्षा मुंबई में रहकर प्राप्त की है। वे जहां भी जाते हैं लोग उनसे वेस्टर्न डांस करने की बात कहते हैं। भारतीय लोक नृत्य देखने में उनकी रुचि नहीं होती है। वे शहर में एक डांस एकेडमी चलाते हैं। यहां पर आने वाले बच्चे और अभिभावक भी वेस्टर्न डांस सीखने को ही तव्वजो देते हैं।
वो कहते हैं कि रियलिटी शो के चलते पिछले कुछ समय में युवाओं में इसके प्रति जागरूकता बढ़ी है लेकिन वह नाकाफी है। उनका कहना है कि बच्चों और युवाओं से ज्यादा अभिभावकों को जागरूक करने की आवश्यकता है। ताकि नृत्य को एक नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सके।
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आरसी डिग्री कालेज की शिक्षिका शैफाली यादव का कहना है कि लोक नृत्य के लिए कड़ी मेहनत और लंबी साधना की जरूरत पड़ती है। आधुनिक युग में करियर की चिंता करने वाले युवाओं के पास इतना समय नहीं है कि वो अधिक समय नृत्य को दे सकें। हालांकि रियलिटी शो के चलते युवाओं में डांस के प्रति रुझान बढ़ा है। शहर के युवा हर्ष कुमार का कहना है कि नई पीढ़ी वेस्टर्न डांस के लिए दीवानी है। हर्ष ने बताया उन्होंने इंडियन और वेस्टर्न की शिक्षा मुंबई में रहकर प्राप्त की है। वे जहां भी जाते हैं लोग उनसे वेस्टर्न डांस करने की बात कहते हैं। भारतीय लोक नृत्य देखने में उनकी रुचि नहीं होती है। वे शहर में एक डांस एकेडमी चलाते हैं। यहां पर आने वाले बच्चे और अभिभावक भी वेस्टर्न डांस सीखने को ही तव्वजो देते हैं।
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वो कहते हैं कि रियलिटी शो के चलते पिछले कुछ समय में युवाओं में इसके प्रति जागरूकता बढ़ी है लेकिन वह नाकाफी है। उनका कहना है कि बच्चों और युवाओं से ज्यादा अभिभावकों को जागरूक करने की आवश्यकता है। ताकि नृत्य को एक नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सके।
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