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बच्चों को गौरैया के बारे में दी जानकारी
Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
Anonymous User
ब्यूरो अमर उजाला मैनपुरी
ब्यूरो अमर उजाला मैनपुरी
Published by: Anonymous User
Updated Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
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मैनपुरी। सामाजिक वन प्रभाग एवं बालवन कार्यक्रम के तहत श्रीरामप्रकाश उच्चतर माध्यमिक विद्यालय एवं आदेश कुमारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मलिखानपुर में विश्व गौरैया संरक्षण जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसमें बच्चों को गौरैया के बारे में जानकारी दी।
कार्यक्रम में परियोजना समन्वयक डीडी रिखारी ने बच्चों को प्रोजेक्टर के माध्यम से फिल्म दिखाकर गौरैया को बचाने के विषय में बताया। वन विभाग द्वारा तैयार कराए गए गौरैया के घरों की विशेषता को समझाते हुए उसको लगाने के तरीके समझाए। साथ ही विद्यालय में लगाने के लिए गौरैया के घर वितरित किए। कार्यक्रम में मौजूद सामाजिक कार्यकर्ता धर्मवीर राही ने भी गौरैया के बारे में जानकारी दी। सह समन्वयक विष्णुकांत सिंह ने कहा कि गौरैया छह प्रकार की होती हैं जिसमें घरेलू गौरैया, स्पेनिश गौरैया, इटेलियन गौरैया, रसट गौरैया व सिंध गौरैया शामिल हैं। मुख्य रूप से घरेलू गौरैया हमारे घरों में पाई जाती हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों में गौरैया की संख्या में एक दम से कमी आई है। इसका मुख्य कारण कच्चे घरों के स्थान पर पक्के घरों का बनना, छोटी-छोटी झाड़ियों का नष्ट होना, मोबाइल टावरों से व फोन से निकलने वाली खतरनाक तरंगे आदि गौरैया की अंडे देने की क्षमता को कम कर देती हैं। इसके चलते गौरैया की संख्या में कमी आई है। कार्यक्रम में 150 से अधिक बच्चों ने प्रतिभाग किया। इस मौके पर परियोजना सह समन्वयक विष्णुकांत सिंह, कामिनी साहू, अध्यापक रामप्रकाश यादव आदि मौजूद थे।
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कार्यक्रम में परियोजना समन्वयक डीडी रिखारी ने बच्चों को प्रोजेक्टर के माध्यम से फिल्म दिखाकर गौरैया को बचाने के विषय में बताया। वन विभाग द्वारा तैयार कराए गए गौरैया के घरों की विशेषता को समझाते हुए उसको लगाने के तरीके समझाए। साथ ही विद्यालय में लगाने के लिए गौरैया के घर वितरित किए। कार्यक्रम में मौजूद सामाजिक कार्यकर्ता धर्मवीर राही ने भी गौरैया के बारे में जानकारी दी। सह समन्वयक विष्णुकांत सिंह ने कहा कि गौरैया छह प्रकार की होती हैं जिसमें घरेलू गौरैया, स्पेनिश गौरैया, इटेलियन गौरैया, रसट गौरैया व सिंध गौरैया शामिल हैं। मुख्य रूप से घरेलू गौरैया हमारे घरों में पाई जाती हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों में गौरैया की संख्या में एक दम से कमी आई है। इसका मुख्य कारण कच्चे घरों के स्थान पर पक्के घरों का बनना, छोटी-छोटी झाड़ियों का नष्ट होना, मोबाइल टावरों से व फोन से निकलने वाली खतरनाक तरंगे आदि गौरैया की अंडे देने की क्षमता को कम कर देती हैं। इसके चलते गौरैया की संख्या में कमी आई है। कार्यक्रम में 150 से अधिक बच्चों ने प्रतिभाग किया। इस मौके पर परियोजना सह समन्वयक विष्णुकांत सिंह, कामिनी साहू, अध्यापक रामप्रकाश यादव आदि मौजूद थे।
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