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खेत हो गए ठूंठ, फलियां, बालियां गई रूठ
ब्यूरो/ अमर उजाला, महोबा।
Updated Sat, 18 Apr 2015 11:44 PM IST
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जिले में ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से खेताें में खड़ी फसल की 90 फीसदी फलियां, बाली जमींदोज होने से निराश किसानों ने फसल काटने से ही मना कर दिया है। वजह यह है कि उन्हें अब फसल की कटाई की पैसा निकालना भी मुश्किल दिख रहा है।
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पिछले कई सालाें से सूखा, अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से परेशान तमाम किसानाें ने खेती-बाड़ी छोड़कर महानगराें के लिए पलायन कर लिया है। उनका कहना है कि अब खेती से घर चलाना तक मुश्किल है। परिवार का पेट भरने के लिए साहूकाराें से लिया गया कर्ज चुकाने के लिए अब वे महानगराें में काम करेंगे।
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बारिश और ओले ने पहले फरवरी-मार्च में फसल को भारी नुकसान पहुंचा और बची खुची फसल अप्रैल की बारिश ने पूरी कर दी। जिस वजह से कई किसानाें ने बची-खुची फसल को ग्रामीणाें से काट लेने को कह दिया है।
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खेताें में फसल के स्थान पर अब डंठल खड़े हैं। फ्री में फसल काटने के ऐलान के बाद भी कोई फसल काटने को तैयार नहीं है।
दिनभर कटाई कराने के बाद भी मजदूरी तक निकलना मुश्किल है। जिससे ग्रामीण खेताें में इक्का दुक्का पेड़ाें में लगे दानाें वाली फसल को काटने से कतरा रहे हैं।
अब फसल काटने के बजाए किसान मजदूरी को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। उनका कहना है कि खेताें में दिनभर कटाई करने के बाद भी दस किलो अनाज नहीं निकलता है। जबकि मजदूरी करने पर 250-300 रुपए एक दिन में मिल रहे हैं।
कभी बारिश तो कभी ओलावृष्टि से हो रही फसलाें की बर्बादी से किसानाें की लागत नहीं निकल रही है। सबसे ज्यादा नुकसान बटाईदार को हो रहा है।
अब बटाईदार खोजे नहीं मिल रहे हैं। मालूम हो कि अप्रैल में खलिहान उठने के बाद घराें में अनाज आने के बाद कम जमीन वाले किसान बटाई के लिए बड़े किसानाें के यहां चक्कर लगाने लगते थे।
फसल की बर्बादी होने पर बटाईदार कर्जदार हो जाता है। जिससे अब तमाम किसानाें ने बटाई पर खेत लेने से किनारा कर लिया है।
बलकट पर जमीन लेने वाले किसानाें को नुकसान हुआ है। कारण, नुकसान किसान का और चेकें जमीन मालिक को मिल रही हैं। जबकि किसानाें ने जमीन मालिक को बलकट का पैसा दे दिया लेकिन फसल ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से बर्बाद हो गई है।
फसल बर्बाद होने का नुकसान बलकट पर लेने वाले किसान को हुआ है। जबकि चेक जमीन मालिक को मिल रही है। इससे किसान बलकट का सौदा करने से भी कतराने लगा है।
जिले में दैवी आपदा से तबाह हुई फसलाें से आहत किसानाें की मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बर्बाद फसल और बेटी की शादियों की चिंता को लेकर परेशान दो किसानाें की शनिवार को सदमे से मौत हो गई।
कस्बा कुलपहाड़ के मोहल्ला राजावार्ड निवासी लालता प्रसाद (55) पुत्र बल्ली ने सात बीघा खेत में मटर, चना और गेहूं की फसल की बुवाई की थी।
चार दिन पहले हुई तेज बारिश से खेत और खलिहानाें में रखी फसल भीग गई और सड़ने लगी। शनिवार को लालता प्रसाद ने काली पड़ गई फसल को देखकर उसे गहरा सदमा लगा।
उसी समय उसके सीने में दर्द उठा। यह देख परिजनों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुलपहाड़ में भर्ती कराया। जहां डॉक्टराें ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया लेकिन अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
उप जिलाधिकारी कुलपहाड़ मोहम्मद रिजवान का कहना है कि किसान की मौत की जानकारी मिली है। किसान की मौत सदमे से हुई या नहीं, इसकी जांच कराई जा रही है।
कोतवाली के ग्राम रिवई निवासी करन सिंह (55) पुत्र जुझार सिंह ने अपने 22 बीघा खेत में मटर और गेहूं की फसल की थी। दैवी आपदा से पूरी फसल चौपट हो गई। उसकी बेटी की 27 अप्रैल को शादी होनी थी, जिसे लेकर वह तनाव में रहता था।
चार दिन पहले हुई बारिश से बची खुची फसल भी बर्बाद हो गई। इससे उसे सदमा लगा। बेटी की शादी की चिंता में उसके सीने में दर्द हुआ। परिजन उसे आनन फानन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चरखारी ले गए। लेकिन चिकित्सकाें ने उसे मेडिकल कॉलेज झांसी रेफर कर दिया। जहां शनिवार को उसकी मौत हो गई।
उधर उप जिलाधिकारी चरखारी नन्हकू का कहना है कि किसान के मौत की सूचना नहीं मिली है, फिर भी जांच कराई जा रही है।