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Mahoba News: किसानों को पता ही नहीं चला और फसल बीमा कराकर निकाल लिया क्लेम
Fri, 02 Jan 2026 12:31 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
Updated Fri, 02 Jan 2026 12:31 AM IST
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फोटाे 01 एमएएचपी 13 परिचय-किरन रिछारिया। संवाद
महोबा। जिले में हुए फसल बीमा घोटाले में ठगी का शिकार हुए किसान भी अब अपने हक के लिए आगे आने लगे हैं। अजनर क्षेत्र के भगारी गांव के छह से अधिक किसान बीमा क्लेम हड़पने वाले दलालों पर कार्रवाई की मांग को लेकर जिला मुख्यालय पहुंचे। सदर तहसील में चल रहे जय जवान जय किसान एसोसिएशन के धरने में शामिल होने के बाद किसानों ने डीएम गजल भारद्वाज से इस मामले में कार्रवाई की मांग की है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत जिले में बीमा कंपनी, कृषि व राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने दलालों के साथ मिलीभगत करके किसानों की जानकारी के बिना ही उनकी जमीनों पर फसल बीमा कराया और भारी भरकम क्लेम हड़प लिया। कई जगहों पर नदी, नालों, तालाबों और सरकारी जमीनों में भी फसल की बोआई दिखाकर फसल बीमा कराया गया। इस तरह से जिले के किसानों के हक के लिए आए 88 करोड़ रुपये में से करीब 40 करोड़ रुपये की रकम भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई और किसान ठगी का शिकार हो गए। मामले को हाल ही में सदर विधायक राकेश गोस्वामी ने विधानसभा में उठाकर मामले की एसआईटी से जांच कराने की मांग की है तो वहीं दूसरी ओर जय जवान जय किसान यूनियन के बैनर तले किसान सदर तहसील में करीब चार माह से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।
जांच में तेजी आने की उम्मीद के चलते अब ठगी का शिकार हुए किसान भी अपनी शिकायत लेकर जिला मुख्यालय पहुंचने लगे हैं। अजनर के भगारी गांव में कुल 143 किसानों के नाम पर फसल बीमा कराया गया। इसमें से साठगाठ करते हुए 12 लाख रुपये व्यक्तिगत क्लेम का भुगतान किया गया जबकि क्राॅप कटिंग में केवल तीन लाख रुपये का ही क्लेम दिया गया। यह ब्योरा सामने आते ही भगारी गांव के किसानों को उनके साथ हुई धोखाधड़ी की जानकारी हुई। बृहस्पतिवार को इस गांव के किसान जिला मुख्यालय में चल रहे धरने में शामिल होने पहुंचे और अपने साथ हुई ठगी की दास्तान सुनाते हुए जिला प्रशासन से कार्रवाई की मांग की। एसोसिएशन के अध्यक्ष गुलाब सिंह राजपूत का कहना है कि जिले में फसल बीमा घोटाला बड़ा है। हर दिन नए-नए मामले आ रहे हैं। जब तक मामले की उच्चस्तरीय जांच नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
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जब बीमा कराने गए तो घोटाले का पता चला
ब्लॉक जैतपुर के भगारी गांव निवासी किरन रिछारिया ने बताया कि जब वह खेत में बोई गई फसल का बीमा कराने के लिए जन सेवा केंद्र पहुंचीं तो पता चला कि पहले ही बीमा हो चुका है। दूसरे केंद्रों से बीमा के लिए आवेदन करने का प्रयास किया तो पता चला कि गांव के ही एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी के नाम से उसके खेत की फसल का बीमा करा लिया है। कुछ दिनों बाद उनके हिस्से का क्लेम भी उसी व्यक्ति ने ले लिया है। क्लेम लेने वाले व्यक्ति से संपर्क किया तो उसने इस संबंध में बात करने से ही इनकार कर दिया।
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दो खेतों की बीमा कराया, अब कार्रवाई भी नहीं हो रही
भगारी गांव के ही किसान वीरेंद्र कुमार दीक्षित के साथ भी फसल बीमा योजना में ठगी हुई। उनके दो अलग-अलग खेतों पर दलालों ने अपने नाम से बीमा कराया और लाखों रुपये का क्लेम हड़प लिया। जब फसल बीमा में घोटाला होने की जानकारी लगी तो उन्होंने भी अपने खेत के रिकॉर्ड के बारे में जानकारी जुटाई तो खुद के साथ ही ठगी हो जाने के बारे में पता चला। कई जगहों पर शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। रुपये निकालने वाला व्यक्ति खुलेआम घूम रहा है।
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आसपास के कई गांवों के किसान हुए हैं ठगी का शिकार
जिला मुख्यालय में ठगी के इस मामले की शिकायत करने आए ठाकुरदास ने बताया कि उसके खेत का फसल बीमा कराकर क्लेम ले लिया गया और उन्हें पता ही नहीं चला। इसी तरह से गांव के मोतीलाल सहित कई अन्य लोग भी ऐसे हैं जिनके नाम से बीमा क्लेम निकाल लिया गया लेकिन उन्हें पता ही नहीं चला है। जिन लोगों को पता चला उनकी सुनवाई भी नहीं हो रही है। भगारी के साथ ही बघोरा, कर्री, पसानाबाद, नगाराडांग आदि छह से अधिक गांवों में कई किसानों की जमीनों को दलालों ने अपनी जमीन बताकर फसल बीमा कराया और क्लेम हड़प लिया है।
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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत जिले में बीमा कंपनी, कृषि व राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने दलालों के साथ मिलीभगत करके किसानों की जानकारी के बिना ही उनकी जमीनों पर फसल बीमा कराया और भारी भरकम क्लेम हड़प लिया। कई जगहों पर नदी, नालों, तालाबों और सरकारी जमीनों में भी फसल की बोआई दिखाकर फसल बीमा कराया गया। इस तरह से जिले के किसानों के हक के लिए आए 88 करोड़ रुपये में से करीब 40 करोड़ रुपये की रकम भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई और किसान ठगी का शिकार हो गए। मामले को हाल ही में सदर विधायक राकेश गोस्वामी ने विधानसभा में उठाकर मामले की एसआईटी से जांच कराने की मांग की है तो वहीं दूसरी ओर जय जवान जय किसान यूनियन के बैनर तले किसान सदर तहसील में करीब चार माह से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।
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जांच में तेजी आने की उम्मीद के चलते अब ठगी का शिकार हुए किसान भी अपनी शिकायत लेकर जिला मुख्यालय पहुंचने लगे हैं। अजनर के भगारी गांव में कुल 143 किसानों के नाम पर फसल बीमा कराया गया। इसमें से साठगाठ करते हुए 12 लाख रुपये व्यक्तिगत क्लेम का भुगतान किया गया जबकि क्राॅप कटिंग में केवल तीन लाख रुपये का ही क्लेम दिया गया। यह ब्योरा सामने आते ही भगारी गांव के किसानों को उनके साथ हुई धोखाधड़ी की जानकारी हुई। बृहस्पतिवार को इस गांव के किसान जिला मुख्यालय में चल रहे धरने में शामिल होने पहुंचे और अपने साथ हुई ठगी की दास्तान सुनाते हुए जिला प्रशासन से कार्रवाई की मांग की। एसोसिएशन के अध्यक्ष गुलाब सिंह राजपूत का कहना है कि जिले में फसल बीमा घोटाला बड़ा है। हर दिन नए-नए मामले आ रहे हैं। जब तक मामले की उच्चस्तरीय जांच नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
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जब बीमा कराने गए तो घोटाले का पता चला
ब्लॉक जैतपुर के भगारी गांव निवासी किरन रिछारिया ने बताया कि जब वह खेत में बोई गई फसल का बीमा कराने के लिए जन सेवा केंद्र पहुंचीं तो पता चला कि पहले ही बीमा हो चुका है। दूसरे केंद्रों से बीमा के लिए आवेदन करने का प्रयास किया तो पता चला कि गांव के ही एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी के नाम से उसके खेत की फसल का बीमा करा लिया है। कुछ दिनों बाद उनके हिस्से का क्लेम भी उसी व्यक्ति ने ले लिया है। क्लेम लेने वाले व्यक्ति से संपर्क किया तो उसने इस संबंध में बात करने से ही इनकार कर दिया।
दो खेतों की बीमा कराया, अब कार्रवाई भी नहीं हो रही
भगारी गांव के ही किसान वीरेंद्र कुमार दीक्षित के साथ भी फसल बीमा योजना में ठगी हुई। उनके दो अलग-अलग खेतों पर दलालों ने अपने नाम से बीमा कराया और लाखों रुपये का क्लेम हड़प लिया। जब फसल बीमा में घोटाला होने की जानकारी लगी तो उन्होंने भी अपने खेत के रिकॉर्ड के बारे में जानकारी जुटाई तो खुद के साथ ही ठगी हो जाने के बारे में पता चला। कई जगहों पर शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। रुपये निकालने वाला व्यक्ति खुलेआम घूम रहा है।
आसपास के कई गांवों के किसान हुए हैं ठगी का शिकार
जिला मुख्यालय में ठगी के इस मामले की शिकायत करने आए ठाकुरदास ने बताया कि उसके खेत का फसल बीमा कराकर क्लेम ले लिया गया और उन्हें पता ही नहीं चला। इसी तरह से गांव के मोतीलाल सहित कई अन्य लोग भी ऐसे हैं जिनके नाम से बीमा क्लेम निकाल लिया गया लेकिन उन्हें पता ही नहीं चला है। जिन लोगों को पता चला उनकी सुनवाई भी नहीं हो रही है। भगारी के साथ ही बघोरा, कर्री, पसानाबाद, नगाराडांग आदि छह से अधिक गांवों में कई किसानों की जमीनों को दलालों ने अपनी जमीन बताकर फसल बीमा कराया और क्लेम हड़प लिया है।

फोटाे 01 एमएएचपी 13 परिचय-किरन रिछारिया। संवाद

फोटाे 01 एमएएचपी 13 परिचय-किरन रिछारिया। संवाद