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Mahoba News: मौसम में बदलाव से नाक, कान व गले में इंफेक्शन के मरीज बढ़े
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फोटो 07 एमएएचपी 04 परिचय-जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीज को देखते डॉ. नरेंद्र राजपूत। संवाद
महोबा। एक सप्ताह से मौसम में बदलाव से नाक, कान और गले में इन्फेक्शन के मरीज बढ़ गए हैं। जिला अस्पताल में ऐसे मरीजों की संख्या में 20 फीसदी का इजाफा हुआ है। ओपीडी में बुखार, डायरिया व त्वचा एलर्जी के भी मरीजों की भरमार है। ईएनटी ओपीडी में प्रतिदिन 80 से अधिक मरीज आ रहे हैं जिसमें अधिकांश बच्चे और युवा शामिल हैं।
कभी तेज धूप तो कभी भीषण गर्मी और बारिश से हर कोई परेशान हैं। इससे लोग संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। जिला अस्पताल के ईएनटी रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र राजपूत ने कहना है कि प्रतिदिन 80 से 90 मरीजों का उपचार करते हैं। सामान्य दिनों की अपेक्षा इस समय नाक में खून आना, जुकाम, खांसी, सांस फूलना, कान में खुजली, कान का बहना व कान दर्द के मरीजों में 20 फीसदी का इजाफा हुआ है।
बताया कि गले में सूखापन, खराश, ठंडी-गर्म हवा से नाक में इन्फेक्शन, नाक सूखना, नाक में पपड़ी जमना और पपड़ी निकालने पर खून आना आदि की शिकायत लेकर मरीज आ रहे हैं। बदलते मौसम में बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है।
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ऐसे करें बचाव
-पानी साफ पीएं और ताजा भोजन करें।
-धूप व धूल से बचाव करें।
-बाहर निकलने पर तौलिया से नाक-कान को अच्छे से ढकें।
-बाहर खुले में रखे खाद्य पदार्थ से परहेज करें।
-कान में लकड़ी, रुई, तेल और पानी न डालें।
-किसी प्रकार की दिक्कत होने पर चिकित्सक से संपर्क करें।
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कभी तेज धूप तो कभी भीषण गर्मी और बारिश से हर कोई परेशान हैं। इससे लोग संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। जिला अस्पताल के ईएनटी रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र राजपूत ने कहना है कि प्रतिदिन 80 से 90 मरीजों का उपचार करते हैं। सामान्य दिनों की अपेक्षा इस समय नाक में खून आना, जुकाम, खांसी, सांस फूलना, कान में खुजली, कान का बहना व कान दर्द के मरीजों में 20 फीसदी का इजाफा हुआ है।
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बताया कि गले में सूखापन, खराश, ठंडी-गर्म हवा से नाक में इन्फेक्शन, नाक सूखना, नाक में पपड़ी जमना और पपड़ी निकालने पर खून आना आदि की शिकायत लेकर मरीज आ रहे हैं। बदलते मौसम में बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है।
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ऐसे करें बचाव
-पानी साफ पीएं और ताजा भोजन करें।
-धूप व धूल से बचाव करें।
-बाहर निकलने पर तौलिया से नाक-कान को अच्छे से ढकें।
-बाहर खुले में रखे खाद्य पदार्थ से परहेज करें।
-कान में लकड़ी, रुई, तेल और पानी न डालें।
-किसी प्रकार की दिक्कत होने पर चिकित्सक से संपर्क करें।