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नामचीन खिलाड़ियों के हुनर का गवाह है डाक बंगला मैदान
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महोबा। रियासत की नगरी चरखारी में राष्ट्रीय खेल हॉकी की टीमों के मुकाबले की प्रति वर्ष मेजबानी करने वाला डाक बंगला मैदान सुविधाओ और संसाधनों से उपेक्षित है। मैदान बदहाली के आंसू बहा रहा है। जिससे नगर की प्रतिभाओं को अपने हुनर को निखारने का मौका नहीं मिल रहा है।
जिले के चरखारी में हर साल गोवर्धन नाथ मेला के अवसर पर आयोजित होने वाले बुंदेलखंड अखिल भारतीय हॉकी टूर्नामेंट में हॉकी टीमों के बीच डाक बंगला मैदान का आयोजन आजादी के बाद से लोकप्रिय रहा है। दो वर्ष करोना काल को छोड़कर इस मैदान में होने वाले मुकाबलों में नगर और आसपास के प्रतिभाशाली खिलाड़ीयो के यह मैदान महत्त्वपूर्ण रहा है।
मैदान में पर्याप्त जगह होने के बाद भी यहां ट्रेनर तो दूर खेलकूद को सिखाने के लिए संसाधन तक नहीं हैं।
मैदान के आसपास साफ सफाई सुविधा न होने से यहां कभी कभार ही खेलकूद तैयारी के लिए युवा अब आते हैं।
हॉकी के प्रसिद्ध खिलाड़ी रहे वर्तमान नगर पालिका परिषद अध्यक्ष मूलचंद्र अनुरागी ने बताया कि देश की हाकी टीम कप्तान बनकर 1980 में ओलंपिक में पदक दिलाने वाले खिलाड़ी असलम शेर खां के खेल का गवाह यही मैदान है। उनके साथ देश की हाकी टीम के गौरव ध्यानचंद के पुत्र अशोक कुमार, राजकुमार, गोविंद कुमार जैसे खिलाड़ी वर्ष 1973 से 1975 के बीच इसी मैदान में खेले है। अखिल भारतीय हॉकी फेडरेशन से मान्यता प्राप्त तहसील स्तर पर होने वाला एक मात्र अखिल भारतीय हॉकी टूर्नामेंट इसी मैदान में होता रहा है। जिसमें देश भर की टीमें हर साल खेलती रहीं हैं। लेकिन कोरोना काल में पिछले दो साल से प्रतियोगिताएं आयोजित नहीं हो रहीं हैं।
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ध्यानचंद ने दी थी शाबाशी
पालिका अध्यक्ष मूलचन्द्र ने बताया की इसी मैदान से तैयारी के बल पर 1974 में प्रदेश की टीम में चयन हो गया था। समय पर सूचना न मिलने से टीम में शामिल नहीं हो पाया। इसका अब तक मलाल है। देश की टीम के गौरव दादा ध्यानचंद ने 1970 में जालौन और 1971में बांदा मुख्यालय में हुए मैच में मेरे खेल के तरीके पर नजदीक आकर शाबाशी दी थी।
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सुविधा और संसाधन की कमी
हॉकी खिलाड़ी और अखिल भारती हॉकी टूर्नामेंट आयोजन समिति महासचिव सादिक इस्लाम ने बताया डाक बंगला मैदान युवा वर्ग के खेलकूद का बड़ा आधार बन सकता है। खिलाड़ियों को सुविधा के उपकरण और कोच की व्यवस्था हो जाए तो गांव की प्रतिभाओं को भी अवसर मिलने लगेगा जो देश स्तर पर पहचान बना सकते है।
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स्पोर्ट्स स्टेडियम में बिना कोच के ही तैयारी कर रहे खिलाड़ी
महोबा। जिले में एक मात्र स्पो र्ट्स स्टेडियम हैं। जहां रोजाना खिलाड़ी अभ्यास करने के लिए पहुंचते हैं लेकिन यहां पर उन्हे बेहतर सुविधाएं न मिल पाने से वह आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। मैदान में रोजाना फुटबाल, हाकी, एथलेटिक्स, क्रिकेट, बैड मिंटन, वॉलीवाल, बास्केट बाल, लॉन टेनिस, जिमनेजियम के खिलाड़िए आते हैं। स्टेडियम में खिलाड़ी खुद से ही तैयारी कर रहे हैं। जिसमें क्रिकेट, हॉकी, एथलेटिक्स, वालीवाल, बॉस्केट बाल, लान टेनिस, टीटी हाल के लिए कोई भी कोच नहीं हैं। जिससे खिलाड़ियों में मायूसी है।
वर्जन-
उप क्रीड़ाधिकारी राम चन्द्र ने बताया कि स्पोर्टस स्डेडियम में फुटबाल, बैडमिंटन और जिमने जियम के कोच हैं। वहीं अन्य विधा के खिलाड़ियों के मार्गदर्शन के लिए कोच उपलब्ध नहीं है जिसके लिए शासन को पत्र लिखा जा चुका है।
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जिले के चरखारी में हर साल गोवर्धन नाथ मेला के अवसर पर आयोजित होने वाले बुंदेलखंड अखिल भारतीय हॉकी टूर्नामेंट में हॉकी टीमों के बीच डाक बंगला मैदान का आयोजन आजादी के बाद से लोकप्रिय रहा है। दो वर्ष करोना काल को छोड़कर इस मैदान में होने वाले मुकाबलों में नगर और आसपास के प्रतिभाशाली खिलाड़ीयो के यह मैदान महत्त्वपूर्ण रहा है।
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मैदान में पर्याप्त जगह होने के बाद भी यहां ट्रेनर तो दूर खेलकूद को सिखाने के लिए संसाधन तक नहीं हैं।
मैदान के आसपास साफ सफाई सुविधा न होने से यहां कभी कभार ही खेलकूद तैयारी के लिए युवा अब आते हैं।
हॉकी के प्रसिद्ध खिलाड़ी रहे वर्तमान नगर पालिका परिषद अध्यक्ष मूलचंद्र अनुरागी ने बताया कि देश की हाकी टीम कप्तान बनकर 1980 में ओलंपिक में पदक दिलाने वाले खिलाड़ी असलम शेर खां के खेल का गवाह यही मैदान है। उनके साथ देश की हाकी टीम के गौरव ध्यानचंद के पुत्र अशोक कुमार, राजकुमार, गोविंद कुमार जैसे खिलाड़ी वर्ष 1973 से 1975 के बीच इसी मैदान में खेले है। अखिल भारतीय हॉकी फेडरेशन से मान्यता प्राप्त तहसील स्तर पर होने वाला एक मात्र अखिल भारतीय हॉकी टूर्नामेंट इसी मैदान में होता रहा है। जिसमें देश भर की टीमें हर साल खेलती रहीं हैं। लेकिन कोरोना काल में पिछले दो साल से प्रतियोगिताएं आयोजित नहीं हो रहीं हैं।
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ध्यानचंद ने दी थी शाबाशी
पालिका अध्यक्ष मूलचन्द्र ने बताया की इसी मैदान से तैयारी के बल पर 1974 में प्रदेश की टीम में चयन हो गया था। समय पर सूचना न मिलने से टीम में शामिल नहीं हो पाया। इसका अब तक मलाल है। देश की टीम के गौरव दादा ध्यानचंद ने 1970 में जालौन और 1971में बांदा मुख्यालय में हुए मैच में मेरे खेल के तरीके पर नजदीक आकर शाबाशी दी थी।
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सुविधा और संसाधन की कमी
हॉकी खिलाड़ी और अखिल भारती हॉकी टूर्नामेंट आयोजन समिति महासचिव सादिक इस्लाम ने बताया डाक बंगला मैदान युवा वर्ग के खेलकूद का बड़ा आधार बन सकता है। खिलाड़ियों को सुविधा के उपकरण और कोच की व्यवस्था हो जाए तो गांव की प्रतिभाओं को भी अवसर मिलने लगेगा जो देश स्तर पर पहचान बना सकते है।
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स्पोर्ट्स स्टेडियम में बिना कोच के ही तैयारी कर रहे खिलाड़ी
महोबा। जिले में एक मात्र स्पो र्ट्स स्टेडियम हैं। जहां रोजाना खिलाड़ी अभ्यास करने के लिए पहुंचते हैं लेकिन यहां पर उन्हे बेहतर सुविधाएं न मिल पाने से वह आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। मैदान में रोजाना फुटबाल, हाकी, एथलेटिक्स, क्रिकेट, बैड मिंटन, वॉलीवाल, बास्केट बाल, लॉन टेनिस, जिमनेजियम के खिलाड़िए आते हैं। स्टेडियम में खिलाड़ी खुद से ही तैयारी कर रहे हैं। जिसमें क्रिकेट, हॉकी, एथलेटिक्स, वालीवाल, बॉस्केट बाल, लान टेनिस, टीटी हाल के लिए कोई भी कोच नहीं हैं। जिससे खिलाड़ियों में मायूसी है।
वर्जन-
उप क्रीड़ाधिकारी राम चन्द्र ने बताया कि स्पोर्टस स्डेडियम में फुटबाल, बैडमिंटन और जिमने जियम के कोच हैं। वहीं अन्य विधा के खिलाड़ियों के मार्गदर्शन के लिए कोच उपलब्ध नहीं है जिसके लिए शासन को पत्र लिखा जा चुका है।