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कोरोना से जीते अब सेप्टिसीमिया का बढ़ रहा खतरा
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अस्पताल में भर्ती बच्चे को लगा ऑक्सीजन
- फोटो : MAHOBA
महोबा। जिले में संक्रमण, डेंगू व निमोनिया का खतरा अभी टला नहीं है। अस्पताल में मरीज इलाज करा रहे हैं। वहीं अब सेप्टीसीमिया का खतरा बढ़ा है। जिला अस्पताल में सेप्टीसीमिया से ग्रसित कई बच्चों का इलाज हो रहा है।
जिला अस्पताल के सीएमएस व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी मिश्रा का कहना है कि सेप्टीसीमिया बीमारी के लक्षण अधिकांशता नवजात बच्चों में खासकर शून्य से लेकर तीन माह तक के बच्चों में देखने को मिलते हैं। इस मौसम में बच्चों को विशेष देखरेख करने की आवश्यकता है। अगर बच्चे को समस्या हो तो तुरंत जिला अस्पताल में दिखाएं। उन्होंने बताया कि पिछले 24 घंटे में 15 बच्चे भर्ती हुए हैं। वहीं अब वार्ड में 45 बच्चे भर्ती हैं। पांच बच्चों में सेप्टिसीमिया के लक्षण भी मिले हैं जिनका उपचार किया जा रहा है।
ये हैं लक्षण
बच्चों में तेज सांस लेना, धड़कन बढ़ना, त्वचा पर चकत्ते, कमजोरी या मांसपेशियों में दर्द, पेशाब रुकना, अधिक गर्मी या ठंड लगना, कंपकंपी, उलझन महसूस होना ये सभी सेप्टीसीमिया के लक्षण हैं।
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लक्षण दिखें तो तुुरंत पहुंचे अस्पताल
डॉ. कृपाराम राजपूत का कहना है कि मौसम के उतार चढ़ाव में इस समय बीमारी के चपेट में आने का खतरा अधिक है। ऐसे में बच्चों को लेकर सावधानी बरतने की आवश्यकता है। अगर बच्चा कमजोर या कुपोषित है तो उसे तुरंत अस्पताल में दिखाएं। इसमें लापरवाही न बरतें।
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जिला अस्पताल के सीएमएस व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी मिश्रा का कहना है कि सेप्टीसीमिया बीमारी के लक्षण अधिकांशता नवजात बच्चों में खासकर शून्य से लेकर तीन माह तक के बच्चों में देखने को मिलते हैं। इस मौसम में बच्चों को विशेष देखरेख करने की आवश्यकता है। अगर बच्चे को समस्या हो तो तुरंत जिला अस्पताल में दिखाएं। उन्होंने बताया कि पिछले 24 घंटे में 15 बच्चे भर्ती हुए हैं। वहीं अब वार्ड में 45 बच्चे भर्ती हैं। पांच बच्चों में सेप्टिसीमिया के लक्षण भी मिले हैं जिनका उपचार किया जा रहा है।
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ये हैं लक्षण
बच्चों में तेज सांस लेना, धड़कन बढ़ना, त्वचा पर चकत्ते, कमजोरी या मांसपेशियों में दर्द, पेशाब रुकना, अधिक गर्मी या ठंड लगना, कंपकंपी, उलझन महसूस होना ये सभी सेप्टीसीमिया के लक्षण हैं।
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लक्षण दिखें तो तुुरंत पहुंचे अस्पताल
डॉ. कृपाराम राजपूत का कहना है कि मौसम के उतार चढ़ाव में इस समय बीमारी के चपेट में आने का खतरा अधिक है। ऐसे में बच्चों को लेकर सावधानी बरतने की आवश्यकता है। अगर बच्चा कमजोर या कुपोषित है तो उसे तुरंत अस्पताल में दिखाएं। इसमें लापरवाही न बरतें।