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Mahoba News: वाहनों की फिटनेस जांच के लिए अब लगानी होगी 150 किमी की दौड़
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-जनपद झांसी में होगी महोबा में पंजीकृत व्यावसायिक वाहनों की जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
महोबा। जनपद में पंजीकृत व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच कराने के लिए अब 150 किमी दूर स्थित झांसी की दौड़ लगानी पड़ेगी। नए नियम से ट्रांसपोर्टरों, ई-रिक्शा चालकों और वाहन चालकों को समय, ईंधन व टोल का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा। इससे वाहन चालकों की परेशानी बढ़ गई है।
एक जनवरी से मैनुअल फिटनेस जांच बंद कर ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) के माध्यम से अनिवार्य कर दी गई है। ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन महोबा में नहीं है। ऐसे में महोबा के वाहनों को फिटनेस के लिए जनपद झांसी भेजने के निर्देश दिए गए हैं। वहां वाहनों की फिटनेस जांच अब ऑटोमेटिक फिटनेस मैनेजमेंट सिस्टम (एएफएमएस) पर की जाएगी। इसके लिए वाहन स्वामियों को अब पहले ऑनलाइन स्लॉट बुक कराना होगा। इसके बाद फिटनेस जांच करानी होगी। यदि दिए स्लॉट की बुकिंग वाले दिन नहीं पहुंच पाए तो फिर से वही प्रक्रिया अपनानी होगी। अगर वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं होगा तो पहली बार पकड़े जाने पर पांच हजार रुपये तो दूसरी बार पकड़े जाने पर 10 हजार रुपये का चालान किया जाएगा।
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ई-रिक्शों की फिटनेस जांच कराना होगा चुनौती
महोबा। वैसे तो नए व्यावसायिक वाहनों को पंजीकरण के बाद आठ वर्ष तक हर दो साल पर और उसके बाद एक-एक वर्ष पर फिटनेस जांच कराने का नियम है। पेट्रोल व डीजल गाड़ियां तो जैसे-तैसे फिटनेस जांच कराने झांसी तक पहुंच जाएंगी लेकिन ई-रिक्शा चालकों को अपने वाहन की फिटनेस जांच कराने जाना चुनौती साबित होगा। 150 किमी दूरी पर स्थित जनपद झांसी तक जाने में ई-रिक्शाें की बैटरी डिस्चार्ज हो जाएगी।
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वर्जन
फिटनेस जांच के लिए वाहनों को जनपद झांसी भेजा जा रहा है। सरकार के निर्देश पर जिले में वाहनोंं की फिटनेस की प्रक्रिया बंद कर दी गई है। अभी शुरूआती दौर है, इससे वाहन संचालक झांसी जाने से कतरा रहे हैं। बिना फिटनेस जांच के वाहनों को सड़क पर नहीं दौड़ने दिया जाएगा। अनदेखी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। -दयाशंकर, एआरटीओ, महोबा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
महोबा। जनपद में पंजीकृत व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच कराने के लिए अब 150 किमी दूर स्थित झांसी की दौड़ लगानी पड़ेगी। नए नियम से ट्रांसपोर्टरों, ई-रिक्शा चालकों और वाहन चालकों को समय, ईंधन व टोल का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा। इससे वाहन चालकों की परेशानी बढ़ गई है।
एक जनवरी से मैनुअल फिटनेस जांच बंद कर ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) के माध्यम से अनिवार्य कर दी गई है। ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन महोबा में नहीं है। ऐसे में महोबा के वाहनों को फिटनेस के लिए जनपद झांसी भेजने के निर्देश दिए गए हैं। वहां वाहनों की फिटनेस जांच अब ऑटोमेटिक फिटनेस मैनेजमेंट सिस्टम (एएफएमएस) पर की जाएगी। इसके लिए वाहन स्वामियों को अब पहले ऑनलाइन स्लॉट बुक कराना होगा। इसके बाद फिटनेस जांच करानी होगी। यदि दिए स्लॉट की बुकिंग वाले दिन नहीं पहुंच पाए तो फिर से वही प्रक्रिया अपनानी होगी। अगर वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं होगा तो पहली बार पकड़े जाने पर पांच हजार रुपये तो दूसरी बार पकड़े जाने पर 10 हजार रुपये का चालान किया जाएगा।
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ई-रिक्शों की फिटनेस जांच कराना होगा चुनौती
महोबा। वैसे तो नए व्यावसायिक वाहनों को पंजीकरण के बाद आठ वर्ष तक हर दो साल पर और उसके बाद एक-एक वर्ष पर फिटनेस जांच कराने का नियम है। पेट्रोल व डीजल गाड़ियां तो जैसे-तैसे फिटनेस जांच कराने झांसी तक पहुंच जाएंगी लेकिन ई-रिक्शा चालकों को अपने वाहन की फिटनेस जांच कराने जाना चुनौती साबित होगा। 150 किमी दूरी पर स्थित जनपद झांसी तक जाने में ई-रिक्शाें की बैटरी डिस्चार्ज हो जाएगी।
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वर्जन
फिटनेस जांच के लिए वाहनों को जनपद झांसी भेजा जा रहा है। सरकार के निर्देश पर जिले में वाहनोंं की फिटनेस की प्रक्रिया बंद कर दी गई है। अभी शुरूआती दौर है, इससे वाहन संचालक झांसी जाने से कतरा रहे हैं। बिना फिटनेस जांच के वाहनों को सड़क पर नहीं दौड़ने दिया जाएगा। अनदेखी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। -दयाशंकर, एआरटीओ, महोबा।