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ट्रकों के न आने से पत्थर कारोबार प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो महोबा
Updated Tue, 23 Jun 2015 11:00 PM IST
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हमीरपुर के यमुना पुल के क्षतिग्रस्त होने से ट्रकों की आवाजाही पर रोक लग जाने के कारण पत्थर कारोबार पर संकट छा गया है। जिससे तमाम क्रेशर प्लांटों में काम बंद हो गया है। ट्रकों की आवाजाही कम होने और माल निकासी न होने से पत्थर कारोबार प्रभावित हो रहा है। पत्थर मंडी कबरई, डहर्रा और गंज में सन्नाटा छा गया है।
गौरतलब है कि पत्थर मंडी कबरई से प्रतिदिन 1500 से 2000 ट्रक गिट्टी लेकर कानपुर, लखनऊ, रायबरेली, प्रतापगढ़ सहित तमाम जनपदों में जाते है। जिससे कानपुर सागर राष्ट्रीय राजमार्ग पर दिन रात ट्रकों की लाइन लग रही है। कबरई मंडी में सिर्फ पत्थर का कारोबार होने से यहां का काम प्रभावित होने से सैकड़ों मजदूरों के सामने रोजी रोटी का संकट बढ़ गया है। गिट्टी की सप्लाई कम हो जाने से क्रेशर प्लांट ठप पड़े हैं। जिससे क्रेशर संचालक बहुत थोड़ी गिट्टी तैयार कर रहे हैं। मालूम हो कि यमुना पुल के क्षति ग्रस्त होने से अब ट्रक चालक वाया बांदा होते हुए घूमकर कानपुर, लखनऊ व अन्य जिलाें की तरफ जा रहे हैं। घूमकर जाने से ट्रकों में डीजल और समय अधिक लगने के कारण भाड़ा महंगा हो गया है, जिससे अब लोग कबरई के बजाय अन्य पत्थर मंडियों से पत्थर लाने लगे है। जिससे पत्थर मंडी कबरई में ट्रकों की आवाजाही कम होने से सन्नाटा छाया हुआ है। हालत यह है कि 2000 ट्र्रकों के सापेक्ष अब प्रतिदिन 700 से 1000 ट्रक ही आ रहे हैं।
ट्रकों ने किया झांसी मंडी की तरफ रुख
यमुना पुल के क्षति ग्रस्त होने से भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लग गई है, जिस कारण दूर-दूर से वाया हमीरपुर, मौदहा होते हुए कबरई आने वाले ट्रकों पर अब ब्रेक सा लग गया है। कारण, कबरई तक आना जाना महंगा पड़ने से ट्रक चालकों ने पत्थर मंडी झांसी की तरफ रुख कर लिया है और कबरई की बजाय अब झांसी पत्थर मंडी से गिट्टी अन्य जिलों में सप्लाई की जा रही है।
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ट्रक न आने से लाखों की राजस्व की क्षति
पत्थर मंडी कबरई का कारोबार प्रभावित होने से शासन को प्रतिदिन लाखों रुपये कि राजस्व की क्षति हो रही है। बाहर भेेजे जाने वाली ग्रिट की बिक्री प्रभावित होने से इसका सीधा असर राजस्व पर पड़ रहा है, लेकिन अभी तक पुल की मरम्मत का कार्य शुरू नहीं हो सका है, जिसके चलते ट्रकों की आवाजाही शुरू होना मुश्किल दिखाई दे रही है। यदि एक सप्ताह तक पुल की मरम्मत का कार्य पूरा नहीं हुआ तो सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान होना तय माना जा रहा है।
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गौरतलब है कि पत्थर मंडी कबरई से प्रतिदिन 1500 से 2000 ट्रक गिट्टी लेकर कानपुर, लखनऊ, रायबरेली, प्रतापगढ़ सहित तमाम जनपदों में जाते है। जिससे कानपुर सागर राष्ट्रीय राजमार्ग पर दिन रात ट्रकों की लाइन लग रही है। कबरई मंडी में सिर्फ पत्थर का कारोबार होने से यहां का काम प्रभावित होने से सैकड़ों मजदूरों के सामने रोजी रोटी का संकट बढ़ गया है। गिट्टी की सप्लाई कम हो जाने से क्रेशर प्लांट ठप पड़े हैं। जिससे क्रेशर संचालक बहुत थोड़ी गिट्टी तैयार कर रहे हैं। मालूम हो कि यमुना पुल के क्षति ग्रस्त होने से अब ट्रक चालक वाया बांदा होते हुए घूमकर कानपुर, लखनऊ व अन्य जिलाें की तरफ जा रहे हैं। घूमकर जाने से ट्रकों में डीजल और समय अधिक लगने के कारण भाड़ा महंगा हो गया है, जिससे अब लोग कबरई के बजाय अन्य पत्थर मंडियों से पत्थर लाने लगे है। जिससे पत्थर मंडी कबरई में ट्रकों की आवाजाही कम होने से सन्नाटा छाया हुआ है। हालत यह है कि 2000 ट्र्रकों के सापेक्ष अब प्रतिदिन 700 से 1000 ट्रक ही आ रहे हैं।
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ट्रकों ने किया झांसी मंडी की तरफ रुख
यमुना पुल के क्षति ग्रस्त होने से भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लग गई है, जिस कारण दूर-दूर से वाया हमीरपुर, मौदहा होते हुए कबरई आने वाले ट्रकों पर अब ब्रेक सा लग गया है। कारण, कबरई तक आना जाना महंगा पड़ने से ट्रक चालकों ने पत्थर मंडी झांसी की तरफ रुख कर लिया है और कबरई की बजाय अब झांसी पत्थर मंडी से गिट्टी अन्य जिलों में सप्लाई की जा रही है।
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ट्रक न आने से लाखों की राजस्व की क्षति
पत्थर मंडी कबरई का कारोबार प्रभावित होने से शासन को प्रतिदिन लाखों रुपये कि राजस्व की क्षति हो रही है। बाहर भेेजे जाने वाली ग्रिट की बिक्री प्रभावित होने से इसका सीधा असर राजस्व पर पड़ रहा है, लेकिन अभी तक पुल की मरम्मत का कार्य शुरू नहीं हो सका है, जिसके चलते ट्रकों की आवाजाही शुरू होना मुश्किल दिखाई दे रही है। यदि एक सप्ताह तक पुल की मरम्मत का कार्य पूरा नहीं हुआ तो सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान होना तय माना जा रहा है।