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बर्ड फ्लू : भाव गिरे, नहीं मिल रहे खरीदार
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महोबा। बर्ड फ्लू का असर अब चिकन की डिमांड पर नजर आने लगा है। चिकन और अंडों के शौकीन लोगों ने दूरी बनानी शुरू कर दी है। यही वजह है कि महोबा के पोल्ट्री फार्म मालिक 65 से 75 रुपये किलोग्राम के हिसाब से चिकन बेच रहे है। बावजूद इसके ग्राहक नहीं हैं। इससे पोल्ट्री फार्म मालिकों को नुकसान हो रहा है।
राठ रोड स्थित पोल्ट्री फार्म के मालिक कमर बेग ने बताया कि अब मुर्गे की बिक्री 25 फीसदी रह गई है। भाव में 120 रुपये प्रति किलोग्राम से घटकर 65 से 70 रुपये रह गया है। फिर भी खरीदार नहीं हैं। मुर्गे का चूजा 25 दिन के भीतर एक किलोग्राम और 45 दिन में दो किलोग्राम वजन का हो जाता है। दो किलोग्राम से ज्यादा होने पर मुर्गे को फार्म में नहीं रखा जाता है।
करहरा स्थित पोल्ट्री फार्म के मालिक एसएस राजपूत ने बताया कि अभी तो पोल्ट्री फार्म में मुर्गों के लिए दाने की व्यवस्था की जा रही है। अगर हालात नहीं सुधरे तो मुर्गों के लिए दाने की व्यवस्था नहीं हो पाएगी। ऐसी स्थिति में मुर्गों में आपस में खून खराबा शुरू हो जाएगा। इससे पोल्ट्री फार्म मालिकों का नुकसान और बढ़ने लगेगा।
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पोल्ट्री फार्म का किया निरीक्षण
पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने बुधवार को जिले में स्थित 28 से ज्यादा पोल्ट्री फार्मों का निरीक्षण किया। कई जगह पर मुर्गों की हालत देखी। हालांकि, किसी भी पोल्ट्री फार्म में बड़ी संख्या में मुर्गों के मरने का मामला सामने नहीं आया है। सभी जगह पर सब ठीक-ठाक पाया गया है।
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राठ रोड स्थित पोल्ट्री फार्म के मालिक कमर बेग ने बताया कि अब मुर्गे की बिक्री 25 फीसदी रह गई है। भाव में 120 रुपये प्रति किलोग्राम से घटकर 65 से 70 रुपये रह गया है। फिर भी खरीदार नहीं हैं। मुर्गे का चूजा 25 दिन के भीतर एक किलोग्राम और 45 दिन में दो किलोग्राम वजन का हो जाता है। दो किलोग्राम से ज्यादा होने पर मुर्गे को फार्म में नहीं रखा जाता है।
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करहरा स्थित पोल्ट्री फार्म के मालिक एसएस राजपूत ने बताया कि अभी तो पोल्ट्री फार्म में मुर्गों के लिए दाने की व्यवस्था की जा रही है। अगर हालात नहीं सुधरे तो मुर्गों के लिए दाने की व्यवस्था नहीं हो पाएगी। ऐसी स्थिति में मुर्गों में आपस में खून खराबा शुरू हो जाएगा। इससे पोल्ट्री फार्म मालिकों का नुकसान और बढ़ने लगेगा।
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पोल्ट्री फार्म का किया निरीक्षण
पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने बुधवार को जिले में स्थित 28 से ज्यादा पोल्ट्री फार्मों का निरीक्षण किया। कई जगह पर मुर्गों की हालत देखी। हालांकि, किसी भी पोल्ट्री फार्म में बड़ी संख्या में मुर्गों के मरने का मामला सामने नहीं आया है। सभी जगह पर सब ठीक-ठाक पाया गया है।