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कजली मेले की शाम रही भजन गजल गायकों के नाम

Wed, 02 Sep 2015 11:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो महोबा।
अमर उजाला ब्यूरो महोबा। Updated Wed, 02 Sep 2015 11:40 PM IST
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Ghazal evening hymns are fair madrigal singers
कजली मेले का तीसरा दिन भजन गजल गायकों के नाम रहा। कार्यक्रम की गायक अवंतिका दुबे ने अपने सुंदर गीतों और गजलों के माध्यम से श्रोताओं के मन में एक अलग छाप छोड़ी। जहां पूरे दिन राई नृत्य और कछियाई नृत्य की धूम रही। कजली मेला स्थल पर बुंदेली नृत्य देखने और भजन और गजल सुनने के लिए लोगों की भारी भीड़ जुटी।
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उत्तर भारत का मशहूर कजली मेला दिन रात गुलजार है। पालिका प्रशासन द्वारा सांस्कृतिक मंच पर दूरदराज के नामीगिरामी कलाकारों द्वारा कभी लोक गीत, जगराता भजन, दीवारी नृत्य तो कभी गजल और भजन गायन कार्यक्रम प्रस्तुत किए जा रहे हैं। जिसके चलते कीरत सागर तट पर दिन रात खासी चहल-पहल बनी हुई है। सांस्कृतिक मंच पर अधिकारी भी रुचि लेकर बेहतर कार्यक्रम करा रहे  हैं। उधर आल्हा मंच के अध्यक्ष दाऊ तिवारी भी कभी आल्हा गायन, सांस्कृतिक कार्यक्रम, बुंदेली नृत्य तो कभी राई नृत्य के आयोजन कराकर बुंदेलखंड के लोगों का मनोरंजन करा रहे हैं। मंगलवार की रात को खजुराहो से आई भजन और गजल गायक अवंतिका दुबे द्वारा प्रस्तुत भजन और गजल का दर्शकों ने खूब लुत्फ उठाया। सुंदर गीतों और गजलों में अधिकारी भी देर रात क मेला परिसर पर डटे रहे। मेले में बाहर से आए बडे़-बड़े इलेक्ट्रिक झूले, दुकानें सारा दिन लोगों से खचाखच भरी रहीं। मेले में होने प्रतिदिन जुट रही हजारों की भीड़ से दुकानदार खासे गदगद हैं।  इस मौके पर आयोजित जादू कार्यक्रम जादूगर आरसी योगा द्वारा जादू के नायाब खेलों से लोगों को खूब गुदगुदाया। वहीं पहली दफा कजली मेले में आए ब्रेकडांस झूला भी बुंदेलियों को खूब भा रहा है। डरने के बाद भी महिला पुरुष झूले का जमकर आनंद ले रहे हैं। सांस्कृतिक मंच के मुख्य अतिथि जनपद न्यायाधीश चैतन्य कुमार कुलश्रेष्ठ रहे। उधर आल्हा मंच में सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष अजयराज यादव, शासकीय अधिवक्ता प्रमोद पालीवाल रहे। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से बुंदेली कलाकारों का उत्साह बढ़ता है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित होने चाहिए।
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राजकीय मेला घोषित पर नहीं मिला बजट
834 साल पुराने ऐतिहासिक कजली मेले को राजकीय मेले का दर्जा तो मिल गया, लेकिन राज्य स्तर से मेले का आयोजन के लिए कुछ नहीं मिला। जिससे आज भी कजली मेले का आयोजन पालिका प्रशासन द्वारा कराया जाता है। इतना है कि राजकीय मेला घोषित होने के बाद जिले के अधिकारियों ने कजली मेले के आयोजन में रुचि लेना शुरू कर दिया ह,ै राजकीय मेला घोषित होने से जिले के प्रशासनिक अधिकारी प्रतिदिन मेले में जाकर कलाकारों का उत्साहवर्धन भी कर रहे है। उल्लेखनीय है कि दो साल पहले राजकीय पालीटेक्निक महोबा में आए मुख्यमंत्री अखिलेेश यादव ने ऐतिहासिक कजली मेले को राजकीय मेला घोषित कर दिया था, लेकिन मेले के आयोजन के लिए सरकार ने कोई बजट घोषित नहीं किया गया।
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