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Mahoba News: मोबाइल का अत्यधिक उपयोग दे रहा डिप्रेशन
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कक्ष में मरीज को देखतीं नैदानिक मनोवैज्ञानिक अंकिता गुप्ता।
- फोटो : संवाद
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महोबा। मोबाइल का अधिक उपयोग मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन रहा है। जिला अस्पताल में डिप्रेशन के मरीजों की संख्या बढ़ी है। बच्चे भी इसकी चपेट में है। ओपीडी में पहले जहां करीब 20 डिप्रेशन के मरीज पहुंच रहे थे। अब इनकी संख्या 50 के पार पहुंच गई है। इसका मुख्य कारण मोबाइल बता रहे हैं।
जिला अस्पताल की नैदानिक मनोवैज्ञानिक अंकिता गुप्ता ने बताया कि ज्यादातर मामलों में इसका मुख्य कारण मोबाइल है। बताया कि जो लोग अकेले या फिर भावनात्मक रूप से कमजोर हो रहे हैं, उनमें चिंता व तनाव का स्तर सामान्य लोगों के मुकाबले कई गुना अधिक होता है।
उन्होंने किसी भी तरह की समस्या होने पर टेलीमानस हेल्पलाइन नंबर 14416 डायल कर परामर्श लेने की अपील की है। बताया कि जिन मरीजों की दवाई चल रही है वह लेते रहें। इसके अलावा लोग अपने मन की बात दूसरों के साथ साझा जरूर करें।
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केस-1
थाना श्रीनगर के एक गांव की महिला का सास से आए दिन विवाद होता था। इससे उसमें अवसाद लक्षण दिखने लगे। एक सप्ताह पहले वह दिखाने आई थी। उसकी लगातार काउंसलिंग किए जाने में काफी बदलाव देखने को मिला है। महिला मोबाइल का भी अधिक उपयोग करती थी। इससे उसे डिप्रेशन की समस्या हुई।
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केस-2
महोबा निवासी 12 वर्षीय किशोर की मां शिक्षिका हैं। बच्चे को व्यस्त रखने के लिए मोबाइल दिया। इससे वह धीरे-धीरे गेम अत्यधिक खेलने लगा। मोबाइल वापस लेने पर चिढ़चिढ़ापन, नोचना, मारना, टेढ़े मुंह बनाना आदि समस्या पैदा हो गई। किशोर की बिहेवियर थेरेपी चल रही है। तीन माह से उसके व्यवहार में काफी बदलाव दिखा है।
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सावधानियां
-घर से बाहर निकलें व साथियों के साथ समय व्यतीत करें।
-अच्छी डाइट लें, किसी चुनौती से डरें न उसका सामना करें।
-अनावश्यक रूप से मोबाइल न चलाएं, व्यायाम अवश्य करें।
-दौरा या अन्य कोई एंग्जाइटी की समस्या आए तो चिकित्सक से मिलें।
-खाली समय में धार्मिक ग्रंथ पढ़ें, मनोरंजन के लिए गाने सुनें।
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जिला अस्पताल की नैदानिक मनोवैज्ञानिक अंकिता गुप्ता ने बताया कि ज्यादातर मामलों में इसका मुख्य कारण मोबाइल है। बताया कि जो लोग अकेले या फिर भावनात्मक रूप से कमजोर हो रहे हैं, उनमें चिंता व तनाव का स्तर सामान्य लोगों के मुकाबले कई गुना अधिक होता है।
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उन्होंने किसी भी तरह की समस्या होने पर टेलीमानस हेल्पलाइन नंबर 14416 डायल कर परामर्श लेने की अपील की है। बताया कि जिन मरीजों की दवाई चल रही है वह लेते रहें। इसके अलावा लोग अपने मन की बात दूसरों के साथ साझा जरूर करें।
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केस-1
थाना श्रीनगर के एक गांव की महिला का सास से आए दिन विवाद होता था। इससे उसमें अवसाद लक्षण दिखने लगे। एक सप्ताह पहले वह दिखाने आई थी। उसकी लगातार काउंसलिंग किए जाने में काफी बदलाव देखने को मिला है। महिला मोबाइल का भी अधिक उपयोग करती थी। इससे उसे डिप्रेशन की समस्या हुई।
केस-2
महोबा निवासी 12 वर्षीय किशोर की मां शिक्षिका हैं। बच्चे को व्यस्त रखने के लिए मोबाइल दिया। इससे वह धीरे-धीरे गेम अत्यधिक खेलने लगा। मोबाइल वापस लेने पर चिढ़चिढ़ापन, नोचना, मारना, टेढ़े मुंह बनाना आदि समस्या पैदा हो गई। किशोर की बिहेवियर थेरेपी चल रही है। तीन माह से उसके व्यवहार में काफी बदलाव दिखा है।
सावधानियां
-घर से बाहर निकलें व साथियों के साथ समय व्यतीत करें।
-अच्छी डाइट लें, किसी चुनौती से डरें न उसका सामना करें।
-अनावश्यक रूप से मोबाइल न चलाएं, व्यायाम अवश्य करें।
-दौरा या अन्य कोई एंग्जाइटी की समस्या आए तो चिकित्सक से मिलें।
-खाली समय में धार्मिक ग्रंथ पढ़ें, मनोरंजन के लिए गाने सुनें।