{"_id":"63b9b6d853eda561f1796fab","slug":"civic-mahoba-news-knp737602980","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mahoba News: ग्रामीणों ने बनाई गोशाला, चारे का भी इंतजाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mahoba News: ग्रामीणों ने बनाई गोशाला, चारे का भी इंतजाम
विज्ञापन
मौजा गहरा में अस्थायी गोशाला में संरक्षित किए गए मवेशी।
- फोटो : MAHOBA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कबरई (महोबा)। छह गांवों के किसानों ने खाली जमीन पर न अस्थायी गोशाला बनाई है। चंदे से पशुओं के चारे का इंतजाम कर रहे हैं।
मौजा गहरा में अस्थायी गोशाला बनाकर चारों ओर तारबाड़ी की गई है। गोशाला में गहरा, बघारी, धरौन, उटियां, सिचौरा, लिलवाही, परसाहा व छानीकलां में अन्ना घूम रहे मवेशियों को संरक्षित किया गया है। आपसी सहयोग से किसान भूसा-चारे की व्यवस्था कर रहे हैं। उधर खंड विकास अधिकारी कबरई राहुल पांडेय का कहना है कि अस्थायी गोशाला क्षेत्रीय किसानों के सहयोग से संचालित की जा रही है। संरक्षित किए गए गोवंशों के भूसे-चारे के लिए सात ग्राम पंचायतों से पांच-पांच हजार रुपये दिलाए गए हैं। शीघ्र ही इस गोशाला के मवेशियों को गांवों की गोशालाओं में भेज दिया जाएगा।
लिलवाही के किसान चेता पाल बताते हैं कि अन्ना मवेशियों से फसल नहीं बच पा रही थी। इससे परेशान होकर आपसी सहयोग से अस्थायी गोशाला का संचालन कर रहे हैं। गहरा निवासी अर्जुन सिंह ने बताया कि गांव में संचालित गोशाला के मवेशियों को रात में छोड़ दिया जाता है, जो फसल नष्ट करते हैं। इसलिए सभी की सहमति पर अस्थायी गोशाला बनाई गई है।
विज्ञापन
मौजा गहरा में अस्थायी गोशाला बनाकर चारों ओर तारबाड़ी की गई है। गोशाला में गहरा, बघारी, धरौन, उटियां, सिचौरा, लिलवाही, परसाहा व छानीकलां में अन्ना घूम रहे मवेशियों को संरक्षित किया गया है। आपसी सहयोग से किसान भूसा-चारे की व्यवस्था कर रहे हैं। उधर खंड विकास अधिकारी कबरई राहुल पांडेय का कहना है कि अस्थायी गोशाला क्षेत्रीय किसानों के सहयोग से संचालित की जा रही है। संरक्षित किए गए गोवंशों के भूसे-चारे के लिए सात ग्राम पंचायतों से पांच-पांच हजार रुपये दिलाए गए हैं। शीघ्र ही इस गोशाला के मवेशियों को गांवों की गोशालाओं में भेज दिया जाएगा।
लिलवाही के किसान चेता पाल बताते हैं कि अन्ना मवेशियों से फसल नहीं बच पा रही थी। इससे परेशान होकर आपसी सहयोग से अस्थायी गोशाला का संचालन कर रहे हैं। गहरा निवासी अर्जुन सिंह ने बताया कि गांव में संचालित गोशाला के मवेशियों को रात में छोड़ दिया जाता है, जो फसल नष्ट करते हैं। इसलिए सभी की सहमति पर अस्थायी गोशाला बनाई गई है।
विज्ञापन