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अन्याय व अत्याचार बढ़ने पर पृथ्वी में अवतार लेते हैं भगवान
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कबरई (महोबा)। कस्बा कबरई में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठवे दिन वृंदावनधाम से पधारे आचार्य मुकुलकृष्ण शास्त्री ने भागवत कथा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने भगवान कंश वध की कथा सुनाते हुए कहा कि धरती पर अन्याय और अत्याचार बढ़ने पर भगवान स्वयं पृथ्वी पर अवतार लेते हैं और दुष्टों का संहार करते हैं।
आचार्य ने रुकमणि विवाह की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि रुकमणि कुंदनपुर के राजा भीष्मक की कन्या थी और स्वयं लक्ष्मी का अवतार थी। राजा भीष्मक अपनी पुत्री का विवाह श्रीकृष्ण से करना चाहते थे लेकिन उसका पुत्र रुक्मैया राजी नही था। वह रुकमणि का विवाह शिशुपाल से करना चाहता था पर रुकमणि इसके लिए राजी नही थी। विवाह की रस्म के अनुसार जब रुकमणि माता पूजन के लिए आई तब श्रीकृष्ण जी उन्हें अपने रथ पर बैठाकर ले गए। इसके बाद रुकमणि का विवाह श्रीकृष्ण के साथ हुआ। आचार्य ने कहा कि ऐसी लीला भगवान के सिवाय दुनिया में कोई नही कर सकता। महारास में पांच अध्याय हैं। उनमें गाए जाने वाले पंच गीत भागवत में प्राण है जो भी ठाकुर जी के इन पांचों गीतों को भाव से गाता है वह भव सागर को पार हो जाता हैं। उन्हें वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती है। कथा सुनने के लिए भक्तों की भारी भीड़ जुटी रही।
दुष्टों की संहार करने को प्रभु लेते अवतार
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आचार्य ने रुकमणि विवाह की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि रुकमणि कुंदनपुर के राजा भीष्मक की कन्या थी और स्वयं लक्ष्मी का अवतार थी। राजा भीष्मक अपनी पुत्री का विवाह श्रीकृष्ण से करना चाहते थे लेकिन उसका पुत्र रुक्मैया राजी नही था। वह रुकमणि का विवाह शिशुपाल से करना चाहता था पर रुकमणि इसके लिए राजी नही थी। विवाह की रस्म के अनुसार जब रुकमणि माता पूजन के लिए आई तब श्रीकृष्ण जी उन्हें अपने रथ पर बैठाकर ले गए। इसके बाद रुकमणि का विवाह श्रीकृष्ण के साथ हुआ। आचार्य ने कहा कि ऐसी लीला भगवान के सिवाय दुनिया में कोई नही कर सकता। महारास में पांच अध्याय हैं। उनमें गाए जाने वाले पंच गीत भागवत में प्राण है जो भी ठाकुर जी के इन पांचों गीतों को भाव से गाता है वह भव सागर को पार हो जाता हैं। उन्हें वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती है। कथा सुनने के लिए भक्तों की भारी भीड़ जुटी रही।
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दुष्टों की संहार करने को प्रभु लेते अवतार