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दो हजार लोगों को पान से मिल रहा रोजगार
Updated Mon, 30 Jul 2018 11:53 PM IST
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महोबा। रिमझिम बारिश के साथ ही पान बरेजों में देशावरी पान की फसल लहलहाने लगी। गर्मी और लू से बर्बाद हुई 20 लाख की पान की फसल की भरपाई के लिए अब किसान दिनरात मेहनत कर रहा है। पान की खेती में करीब दो हजार पान कृषक लगे हुए है। पान की हरीभरी फसल देख पान कृषक खासा खुश है।
देश विदेश में मशहूर महोबा का पान लबों की शान की खेती अब 600 एकड़ से सिमटकर 55 एकड़ में रह गई है लेकिन अभी भी अपने पुश्तैनी पान के कारोबार में दो हजार से ज्यादा पान किसान जुटा हुआ है। करारेपन के लिए मशहूर देशावरी पान समूचे देश के अलावा विदेशों में भी भेजा जाता है। इस साल तापमान बढ़ने से और गर्मी के चलते करीब 20 लाख रुपये की पान की फसल बर्बाद हो गई थी, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ था।
इस साल बारिश में मूसलाधार बारिश न होकर रिमझिम बारिश से पान की फसल लहलहाने लगी। पान बरेजों में हरे भरे पान के पत्ते इस बार किसानों को करीब डेढ़ गुना लाभ देंगे। हालांकि बीच में एक दो बार तेज बारिश होने से थोड़ा बहुत नीचे के हिस्से का पान खराब हुआ है। पान मंडी में इन दिनों पान की आमद बढ़ जाने से पान किसानों को पान की अच्छी कीमत नहीं मिल रही है। पान की फसल के लिए जाड़े का मौसम सबसे मुफीद होता है। इस मौसम में पुराने पान की अच्छी कीमत मिलती है।
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महोबा का पान बेहद करारेपन के लिए मशहूर है। सर्दी के मौसम में पान पुराना हो जाने के कारण ज्यादातर किसान इसका बेहतर रखरखाव करके मार्च तक तोड़ते है। यह पुराना पान पेड़ी का पान कहते है। इसी पेड़ी के पान की देश के बड़े बड़े शहरों के अलावा विदेशों में भी मांग की जाती है। यहां की पान की बेल खरीदने के लिए कानपुर, लखनऊ, उन्नाव, हरदोई और लखीमपुर खीरी सहित कई जिलों के लोग आते हैं। पान की बेल की भी अच्छी कीमत मिलती है। कभी ओलावृष्टि और कभी कोहरे कारण पान फसल खराब हो जाती है। जिससे तमाम पान किसानों ने कृषि कार्य से मुंह मोड़ लिया है।
डॉ. रामसेवक चौरसिया
पूर्व प्रधान वैज्ञानिक
पान अनुसंधान केंद्र, महोबा
दो हजार लोगों को पान से मिल रहा रोजगार
-महोबा का पान लबों की शान के लहलहाने से किसान खुश
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देश विदेश में मशहूर महोबा का पान लबों की शान की खेती अब 600 एकड़ से सिमटकर 55 एकड़ में रह गई है लेकिन अभी भी अपने पुश्तैनी पान के कारोबार में दो हजार से ज्यादा पान किसान जुटा हुआ है। करारेपन के लिए मशहूर देशावरी पान समूचे देश के अलावा विदेशों में भी भेजा जाता है। इस साल तापमान बढ़ने से और गर्मी के चलते करीब 20 लाख रुपये की पान की फसल बर्बाद हो गई थी, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ था।
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इस साल बारिश में मूसलाधार बारिश न होकर रिमझिम बारिश से पान की फसल लहलहाने लगी। पान बरेजों में हरे भरे पान के पत्ते इस बार किसानों को करीब डेढ़ गुना लाभ देंगे। हालांकि बीच में एक दो बार तेज बारिश होने से थोड़ा बहुत नीचे के हिस्से का पान खराब हुआ है। पान मंडी में इन दिनों पान की आमद बढ़ जाने से पान किसानों को पान की अच्छी कीमत नहीं मिल रही है। पान की फसल के लिए जाड़े का मौसम सबसे मुफीद होता है। इस मौसम में पुराने पान की अच्छी कीमत मिलती है।
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महोबा का पान बेहद करारेपन के लिए मशहूर है। सर्दी के मौसम में पान पुराना हो जाने के कारण ज्यादातर किसान इसका बेहतर रखरखाव करके मार्च तक तोड़ते है। यह पुराना पान पेड़ी का पान कहते है। इसी पेड़ी के पान की देश के बड़े बड़े शहरों के अलावा विदेशों में भी मांग की जाती है। यहां की पान की बेल खरीदने के लिए कानपुर, लखनऊ, उन्नाव, हरदोई और लखीमपुर खीरी सहित कई जिलों के लोग आते हैं। पान की बेल की भी अच्छी कीमत मिलती है। कभी ओलावृष्टि और कभी कोहरे कारण पान फसल खराब हो जाती है। जिससे तमाम पान किसानों ने कृषि कार्य से मुंह मोड़ लिया है।
डॉ. रामसेवक चौरसिया
पूर्व प्रधान वैज्ञानिक
पान अनुसंधान केंद्र, महोबा
दो हजार लोगों को पान से मिल रहा रोजगार
-महोबा का पान लबों की शान के लहलहाने से किसान खुश