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75 फीसदी खनन पट़्टे ह़ुए समाप्त, कबरई मंडी में हजारों श्रमिक हुए बेरोजगार
Updated Wed, 11 Jul 2018 10:53 PM IST
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कबरई महोबा। तीन साल पहले कबरई पत्थर मंडी में तीन सौ से अधिक खनन पट्टे थे। जिनकी समयावधि पूरी होने के बाद 75 फीसदी खनन क्षेत्र रिक्त हो गए और समय समय पर खनिज नीति स्पष्ट न होने के कारण न तो पट्टे किए गए और न ही उनकी नीलामी की गई। जिससे ढ़ाई सैकड़ा से अधिक खनन क्षेत्र बंद होने से हजारों श्रमिक बेरोजगार हो गए और रोजी रोटी की तलाश में महानगरों को पलायन करना पड़ा।
कबरई पत्थर मंडी में वर्ष 2012 तक 350 से अधिक खनन पट्टे संचालित थे। जिनकी समयावधि पूरी होने के उपरांत सपा सरकार में नए पट्टे स्वीकृत नहीं किए गए और कोर्ट कचहरी में खनिज नीति विवादित हो गई। जिससे सैकड़ों खनन क्षेत्रों में काम कर रहे मजदूर बेरोजगार होकर महानगरों की ओर पलायन कर गए। 30 मई 2017 को प्रदेश सरकार ने नई खनिज नीति लागू की। जिसमें ई-नीलामी के माध्यम से 20 वर्ष की अवधि के लिए खनन पट्टे देने के आदेश जारी किए गए। दूषित खनिज नीति के चलते एक वर्ष के दौरान पूरे प्रदेश में एक भी खनन पट्टे का निष्पादन नहीं हो सका और खनन क्षेत्र रिक्त होने के कारण जहां पत्थर कारोबारी परेशान रहे वहीं श्रमिकों को भी रोजी रोटी के लाले पड़ गए।
कबरई मंडी में 300 से अधिक स्टोन क्रेशर संचालित है। जहां 15 हजार से अधिक मजदूर काम पर लगा हुआ है वहीं पहाड़ों पर खनन कार्य बंद हो जाने से 10 हजार मजदूर घर बैठ गए और पुन: खनन क्षेत्रों में काम शुरू न होने पर रोजी रोटी की तलाश में परिवार सहित दिल्ली, मुंबई व सूरत पलायन कर गए। जहां बिल्डिंग निर्माण व प्राइवेट कंपनियों में काम करने लगे। वहीं जिला प्रशासन द्वारा नई खनिज नीति लागू होने के बाद पिछले आठ माह से खनन पट्टे स्वीकृत करने की कवायद तेजी से की जा रही है लेकिन जटिल ई-नीलामी प्रक्रिया एवं डेढ़ सौ गुना स्टांप ड्यूटी में वृद्घि हो जाने के कारण व्यापारियों को यह नीति रास नहीं आ रही है और पट्टा लेने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
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इंसेट
दो माह के अंदर चालू करा दिए जाएंगे खनन पट्टे-खनिज अधिकारी
जिला खनिज अधिकारी अंजनी कुमार सिंह श्रमिकों को रोजगार देने के लिए सभी क्रेशर मालिकों को निर्देश दिए गए है कि मशीनरी हटाकर अधिक से अधिक काम श्रमिकों से लिया जाए। साथ ही श्रमिकों के हितों के संरक्षण के लिए श्रम विभाग में पंजीयन कराने के पत्थर कारोबारियों को निर्देश दिए गए है ताकि उन्हें श्रम विभाग की योजनाओं का लाभ दिलाया जा सके। रिक्त खनन क्षेत्रों के संबंध में खान अधिकारी ने बताया कि डेढ़ सौ से अधिक खनन पट्टों की ई-नीलामी कराई जा चुकी है। पट्टों के स्वीकृत पत्र जारी होने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जल्द ही सभी बोलीदाताओं को स्वीकृत पत्र जारी कर पर्यावरण, एनओसी की प्रक्रिया पूरी कराकर खनन पट्टों का निष्पादन कराया जाएगा। दो माह के अंदर अधिकांश पट्टे चालू करा दिए जाएंगे।
-75 फीसदी खनन पट्टे समाप्त होने का दिखने लगा परिणाम
-नई खनिज नीति में कमियों के कारण नहीं हो पा रहे पट्टे
-एक साल में जिले में एक भी पहाड़ का नहीं हुआ खनन पट्टा
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कबरई पत्थर मंडी में वर्ष 2012 तक 350 से अधिक खनन पट्टे संचालित थे। जिनकी समयावधि पूरी होने के उपरांत सपा सरकार में नए पट्टे स्वीकृत नहीं किए गए और कोर्ट कचहरी में खनिज नीति विवादित हो गई। जिससे सैकड़ों खनन क्षेत्रों में काम कर रहे मजदूर बेरोजगार होकर महानगरों की ओर पलायन कर गए। 30 मई 2017 को प्रदेश सरकार ने नई खनिज नीति लागू की। जिसमें ई-नीलामी के माध्यम से 20 वर्ष की अवधि के लिए खनन पट्टे देने के आदेश जारी किए गए। दूषित खनिज नीति के चलते एक वर्ष के दौरान पूरे प्रदेश में एक भी खनन पट्टे का निष्पादन नहीं हो सका और खनन क्षेत्र रिक्त होने के कारण जहां पत्थर कारोबारी परेशान रहे वहीं श्रमिकों को भी रोजी रोटी के लाले पड़ गए।
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कबरई मंडी में 300 से अधिक स्टोन क्रेशर संचालित है। जहां 15 हजार से अधिक मजदूर काम पर लगा हुआ है वहीं पहाड़ों पर खनन कार्य बंद हो जाने से 10 हजार मजदूर घर बैठ गए और पुन: खनन क्षेत्रों में काम शुरू न होने पर रोजी रोटी की तलाश में परिवार सहित दिल्ली, मुंबई व सूरत पलायन कर गए। जहां बिल्डिंग निर्माण व प्राइवेट कंपनियों में काम करने लगे। वहीं जिला प्रशासन द्वारा नई खनिज नीति लागू होने के बाद पिछले आठ माह से खनन पट्टे स्वीकृत करने की कवायद तेजी से की जा रही है लेकिन जटिल ई-नीलामी प्रक्रिया एवं डेढ़ सौ गुना स्टांप ड्यूटी में वृद्घि हो जाने के कारण व्यापारियों को यह नीति रास नहीं आ रही है और पट्टा लेने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
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दो माह के अंदर चालू करा दिए जाएंगे खनन पट्टे-खनिज अधिकारी
जिला खनिज अधिकारी अंजनी कुमार सिंह श्रमिकों को रोजगार देने के लिए सभी क्रेशर मालिकों को निर्देश दिए गए है कि मशीनरी हटाकर अधिक से अधिक काम श्रमिकों से लिया जाए। साथ ही श्रमिकों के हितों के संरक्षण के लिए श्रम विभाग में पंजीयन कराने के पत्थर कारोबारियों को निर्देश दिए गए है ताकि उन्हें श्रम विभाग की योजनाओं का लाभ दिलाया जा सके। रिक्त खनन क्षेत्रों के संबंध में खान अधिकारी ने बताया कि डेढ़ सौ से अधिक खनन पट्टों की ई-नीलामी कराई जा चुकी है। पट्टों के स्वीकृत पत्र जारी होने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जल्द ही सभी बोलीदाताओं को स्वीकृत पत्र जारी कर पर्यावरण, एनओसी की प्रक्रिया पूरी कराकर खनन पट्टों का निष्पादन कराया जाएगा। दो माह के अंदर अधिकांश पट्टे चालू करा दिए जाएंगे।
-75 फीसदी खनन पट्टे समाप्त होने का दिखने लगा परिणाम
-नई खनिज नीति में कमियों के कारण नहीं हो पा रहे पट्टे
-एक साल में जिले में एक भी पहाड़ का नहीं हुआ खनन पट्टा