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Maharajganj News: महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा कर पति की लंबी उम्र की कामना की
Thu, 06 Jun 2024 08:07 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 06 Jun 2024 08:07 PM IST
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महराजगंज/नौतनवा। शहर के छत्रपति साहू जी और गांधी नगर में महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा-अर्चना कर पति की लंबी उम्र की कामना की। वहीं नौतनवा के जानकीनगर स्थित बाबा झारखंडी महादेव मंदिर में व्रती महिलाओं ने वट वृक्ष की परिक्रमा की और कलावा बांधा
मान्यता है कि सावित्री ने अपने पति सत्यवान के जीवन के लिए यमराज की पूजा बरगद पेड़ के नीचे की थी। इसलिए इस व्रत में वट वृक्ष की पूजा का महत्व है।
शास्त्री नगर निवासी गीता गोयल ने बताया कि ज्येष्ठ माह में महिलाएं निर्जला उपवास रखती है, जो बेहद कठिन होता है। वट सावित्री व्रत रखने से वैवाहिक जीवन में चल रही समस्याओं में भी कमी आती है। साथ ही पति की तरक्की के भी योग बनते हैं। इस दौरान व्रती महिलाएं सुखी-जीवन की कामना करते हुए बरगद के पेड़ की परिक्रमा करती हैं और उसके चारों ओर कलावा बांधती हैं। व्रत में महिलाएं सारे सिंगार करके मीठी पूड़ी सीजन के फल सिंगर का सामान प्रसाद विशेष प्रसाद भीगा चना, फूल, बेलपत्र, दूब, दूध लेकर शंकर पार्वती की पूजा कर करती हैं।
सरिता मित्तल ने बताया पूजा के बाद अपनी मनोकामना ध्यान में रखते हुए श्रद्धा अनुसार पेड़ की 5, 7, 11, 21 या 108 परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत बांधती हैं। अल्पना अग्रवाल ने बताया इस व्रत को रखने से पति पर आए संकट चले जाते हैं और आयु लंबी हो जाती है। यही नहीं अगर दांपत्य जीवन में कोई परेशानी चल रही हो तो वह भी इस व्रत के प्रताप से दूर हो जाते हैं। निधि मित्तल ने बताया सभी व्रती महिलाएं प्रसाद के रूप में बरगद के पत्ते की नथिया बनाकर पहनती हैं और बरगद के फल (गोदा) को खाती हैं। इस मौके पर सीमा अग्रवाल, पूजा अग्रवाल, शोभा अग्रहरि, पूनम श्रीवास्तव आदि ने वट वृक्ष का पूजा किया।
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मान्यता है कि सावित्री ने अपने पति सत्यवान के जीवन के लिए यमराज की पूजा बरगद पेड़ के नीचे की थी। इसलिए इस व्रत में वट वृक्ष की पूजा का महत्व है।
शास्त्री नगर निवासी गीता गोयल ने बताया कि ज्येष्ठ माह में महिलाएं निर्जला उपवास रखती है, जो बेहद कठिन होता है। वट सावित्री व्रत रखने से वैवाहिक जीवन में चल रही समस्याओं में भी कमी आती है। साथ ही पति की तरक्की के भी योग बनते हैं। इस दौरान व्रती महिलाएं सुखी-जीवन की कामना करते हुए बरगद के पेड़ की परिक्रमा करती हैं और उसके चारों ओर कलावा बांधती हैं। व्रत में महिलाएं सारे सिंगार करके मीठी पूड़ी सीजन के फल सिंगर का सामान प्रसाद विशेष प्रसाद भीगा चना, फूल, बेलपत्र, दूब, दूध लेकर शंकर पार्वती की पूजा कर करती हैं।
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सरिता मित्तल ने बताया पूजा के बाद अपनी मनोकामना ध्यान में रखते हुए श्रद्धा अनुसार पेड़ की 5, 7, 11, 21 या 108 परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत बांधती हैं। अल्पना अग्रवाल ने बताया इस व्रत को रखने से पति पर आए संकट चले जाते हैं और आयु लंबी हो जाती है। यही नहीं अगर दांपत्य जीवन में कोई परेशानी चल रही हो तो वह भी इस व्रत के प्रताप से दूर हो जाते हैं। निधि मित्तल ने बताया सभी व्रती महिलाएं प्रसाद के रूप में बरगद के पत्ते की नथिया बनाकर पहनती हैं और बरगद के फल (गोदा) को खाती हैं। इस मौके पर सीमा अग्रवाल, पूजा अग्रवाल, शोभा अग्रहरि, पूनम श्रीवास्तव आदि ने वट वृक्ष का पूजा किया।
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