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Maharajganj News: किसानों के लिए कमाई का जरिया बनेगी नम भूमि
Wed, 22 Jan 2025 01:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Wed, 22 Jan 2025 01:16 AM IST
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महराजगंज। फरवरी की दो तारीख को विश्व नम भूमि दिवस (वेटलैंड डे) के रूप में मनाए जाने की परंपरा है। उद्देश्य है कि लोग इसका महत्व जान और समझकर इसके संरक्षण पर ध्यान दें।
महराजगंज जनपद में वेटलैंड की भूमि के सहारे कृषि विभाग ने बांस उत्पादन से लेकर गोपाल भोग धान उत्पादन तक की रूपरेखा तैयार की है, जिसे मूर्त रूप देने का काम फरवरी 2025 से शुरू करने की तैयारी है।
जनपद में नम भूमि का दायरा अधिक है। छोटी गंडकी नदी के अलावा अन्य नदियों के आसपास की भूमि वेटलैंड किस्म की है। कृषि विभाग की ऐसी 200 हेक्टेयर की भूमि वेटलैंड की है और वह किसानों के नाम दर्ज है।
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अब इस भूमि को किसानों के लिए खास बनाया जाएगा। इसमें कृषि विभाग ने राष्ट्रीय बांस मिशन से सहयोग प्राप्त करने की प्रक्रिया भी पूर्ण कर ली है।
वेटलैंड भूमि पर कृषि विभाग किसानों को तैयार कर भीमा बांस प्रजाति की रोपाई कराएगा और आगामी खरीफ के सीजन में गोपाल भोग धान की नई प्रजाति के उत्पादन को लेकर प्रयोग करेगा।
वेटलैंड में भीमा बांस उत्पादन का टेस्ट भी हो चुका है, जिसके बेहतर परिणाम सामने हैं। अब बड़े पैमाने पर किसानों को राष्ट्रीय बांस मिशन से अनुदान उपलब्ध कराकर वेटलैंड एरिया में इसकी खेती कराई जाएगी।
इससे भूमि सुधार की प्रक्रिया स्वत: होगी। सुधार वाले भूमि के दायरे में गोपाल भोग धान की आधुनिक प्रजाति की रोपाई होगी जो पानी से भरी दलदली भूमि पर भी उत्पादन देने में सक्षम है।
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महराजगंज जनपद में वेटलैंड की भूमि के सहारे कृषि विभाग ने बांस उत्पादन से लेकर गोपाल भोग धान उत्पादन तक की रूपरेखा तैयार की है, जिसे मूर्त रूप देने का काम फरवरी 2025 से शुरू करने की तैयारी है।
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जनपद में नम भूमि का दायरा अधिक है। छोटी गंडकी नदी के अलावा अन्य नदियों के आसपास की भूमि वेटलैंड किस्म की है। कृषि विभाग की ऐसी 200 हेक्टेयर की भूमि वेटलैंड की है और वह किसानों के नाम दर्ज है।
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अब इस भूमि को किसानों के लिए खास बनाया जाएगा। इसमें कृषि विभाग ने राष्ट्रीय बांस मिशन से सहयोग प्राप्त करने की प्रक्रिया भी पूर्ण कर ली है।
वेटलैंड भूमि पर कृषि विभाग किसानों को तैयार कर भीमा बांस प्रजाति की रोपाई कराएगा और आगामी खरीफ के सीजन में गोपाल भोग धान की नई प्रजाति के उत्पादन को लेकर प्रयोग करेगा।
वेटलैंड में भीमा बांस उत्पादन का टेस्ट भी हो चुका है, जिसके बेहतर परिणाम सामने हैं। अब बड़े पैमाने पर किसानों को राष्ट्रीय बांस मिशन से अनुदान उपलब्ध कराकर वेटलैंड एरिया में इसकी खेती कराई जाएगी।
इससे भूमि सुधार की प्रक्रिया स्वत: होगी। सुधार वाले भूमि के दायरे में गोपाल भोग धान की आधुनिक प्रजाति की रोपाई होगी जो पानी से भरी दलदली भूमि पर भी उत्पादन देने में सक्षम है।