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माैसम की मार : एसएनसीयू वार्ड में 32 बेड पर 50 नवजात भर्ती
Wed, 18 Jun 2025 12:42 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Wed, 18 Jun 2025 12:42 AM IST
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महराजगंज। भीषण गर्मी नवजातों को बीमार कर रही है। जिला अस्पताल के एसएनसीयू (विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई) वार्ड में 32 बेड पर 50 बच्चे भर्ती हैं। वार्ड में बीते 10 दिनों से क्षमता से अधिक बच्चे हैं। यहां डॉक्टरों की शिफ्टवार टीम लगाई गई है।
वार्ड में बच्चों को भर्ती करने के लिए बेड कम पड़ जा रहे हैं। एक बेड पर दो-दो नवजातों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रंजन मिश्रा ने बताया कि (एसएनसीयू) वार्ड में बच्चों को भर्ती कर बेहतर ढंग से इलाज किया जाता है। इसमें ऐसे बच्चों को भर्ती किया जाता है जिनका जन्म के समय वजन कम है अथवा पीलिया या सांस फूलने की समस्या से ग्रसित हैं।
इस वार्ड में जन्म लेने के साथ सांस फूलने, पीलिया, दूध नहीं पीने, निर्धारित वजन से कम, नौ माह के पहले जन्म लेने, अविकसित शिशुओं को भर्ती कर इलाज किया जाता है।
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जन्में कई ऐसे नवजात होते हैं, जिन्हें जन्म के बाद से लगभग आठ से 10 दिनों के लिए इसमें रखना पड़ता है। आए-दिन कम से कम चार से पांच नवजात इस तरह के आ रहे हैं।
सीएमएस डॉ. एके द्विवेदी ने बताया कि जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में इलाज की बेहतर व्यवस्था है। इस वार्ड में डॉक्टरों की टीम समय समय पर निगरानी करती है। प्रयास है कि सभी मरीजों का बेहतर ढंग से इलाज हो।
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वार्ड में बच्चों को भर्ती करने के लिए बेड कम पड़ जा रहे हैं। एक बेड पर दो-दो नवजातों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रंजन मिश्रा ने बताया कि (एसएनसीयू) वार्ड में बच्चों को भर्ती कर बेहतर ढंग से इलाज किया जाता है। इसमें ऐसे बच्चों को भर्ती किया जाता है जिनका जन्म के समय वजन कम है अथवा पीलिया या सांस फूलने की समस्या से ग्रसित हैं।
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इस वार्ड में जन्म लेने के साथ सांस फूलने, पीलिया, दूध नहीं पीने, निर्धारित वजन से कम, नौ माह के पहले जन्म लेने, अविकसित शिशुओं को भर्ती कर इलाज किया जाता है।
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जन्में कई ऐसे नवजात होते हैं, जिन्हें जन्म के बाद से लगभग आठ से 10 दिनों के लिए इसमें रखना पड़ता है। आए-दिन कम से कम चार से पांच नवजात इस तरह के आ रहे हैं।
सीएमएस डॉ. एके द्विवेदी ने बताया कि जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में इलाज की बेहतर व्यवस्था है। इस वार्ड में डॉक्टरों की टीम समय समय पर निगरानी करती है। प्रयास है कि सभी मरीजों का बेहतर ढंग से इलाज हो।