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Maharajganj News: विकास की रफ्तार... शहर जैसे दिखने लगे गांव, बदल गई जीवनशैली
Tue, 23 Jul 2024 05:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Tue, 23 Jul 2024 05:04 AM IST
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महराजगंज। नगर की तस्वीर अब बदल गई है। आसपास के गांव तक शहर का दायरा बढ़ गया है। गांव भी अब शहर की तरह दिखने लगे हैं, वहां भी लोगों के जीवन स्तर में बदलाव हो गया है। स्कूल काॅलेज, अस्पताल बनने के साथ ही सड़कें भी चौड़ी हो गई हैं।
वर्तमान में महराजगंज शहर 25 वार्डों में बंटा है, इसकी आबादी करीब 60,000 है। बीते 15 साल पहले और अब की तस्वीर में बहुत फासला है। महराजगंज शहर का दायर 15 साल पहले धनेवा से पहले ही था, अब दायरा बढ़ा तो मुंडेराकला से आगे तक विस्तार हो गया। इधर आसपास के गांवों तक जमीनें बिक रहीं हैं। पुलिस लाइन के सामने से जाने वाली रोड पर कई स्कूल बनें हैं। अब इधर प्लाटिंग भी हो चुकी है।
धीरे-धीरे आवासीय क्षेत्र बन गया है। गांव के लोगों का जीवन भी शहर की तरह से हो गया है। रोड से आगे बढ़ने पर पुल के पास सर्वेश प्रसाद मिले। उन्होंने बताया कि बीते 10 साल पहले क्षेत्र विरान सा लगता था। कोई इधर जमीनें खरीदना नहीं चाहता था। आज हालत यह है कि जमीनों के दाम आसमान छू रहे हैं। पुल से 50 मीटर आगे रामपुर की ओर से जाने वाली सड़क के किनारे तक जमीनें बिक चुकी हैं।
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इधर से प्रतापपुर जाने वाली सड़क के किनारे एक स्कूल बनकर तैयार हो चुका है। स्कूल के पास जितेंद्र यादव मिले, उन्होंने बताया कि अब तो इधर से रात में आने पर डर नहीं लगता है। पहले तो कोई आना-जाना नहीं चाहता था। गोरखपुर रोड की बात करें तो ऐसा लगता है कि शिकारपुर चौराहा तक शहर का दायरा बढ़ गया है। जय प्रकाश नगर के धीरेंद्रनाथ त्रिपाठी कहते हैं कि गुजरे वक्त में बैकुंठपुर से आगे बढ़ने पर कुछ नहीं था, अब जमीनें नहीं मिल रही हैं।
गौनरिया बाबू गांव के आगे तक सड़क के किनारे जमीनें नहीं मिल रहीं हैं। अब कहीं खाली भी है तो रेट अधिक है। आसपास के इलाकों की तस्वीर बदल गई है। गोरखपुर रोड पर कई होटल, मॉल, शोरूम समेत भारतीय स्टेट बैंक की शाखा है। इसके अलावा फरेंदा रोड पर महुअवा तक गुजरे वक्त में रात में कोई जाना नहीं चाहता था, लेकिन अब तो अमहवा चौराहे तक गुलजार हो गया है।
इसी रोड पर मेडिकल कॉलेज बनने से इलाके की तस्वीर बदल रही है। पकड़ी तक जाने में लगता ही नहीं है शहरी क्षेत्र में नहीं हैं। इससे आगे बढ़ने पर सड़क के किनारे आबादी क्षेत्र है। पकड़ी चौराहे के रामदरस कहते हैं कि अगर कोई 15 साल पहले चौराहे पर आया होगा तो अब पहचान नहीं पाएगा। आस पास गांव के किनारे तक बाहर से आने वाले लोग जमीन खरीद रहे हैं।
मल्टीप्लेक्स सिनेमा हाल, मेडिकल कॉलेज बना
महुअवा में मल्टीप्लेक्स सिनेमा हाल बना है। इससे आस पास का क्षेत्र गुलजार रहता है। वहीं मेडिकल काॅलेज भी बना है। रम्हौली के पास मेडिकल काॅलेज की एकेडमिक बिल्डिंग बनी है। फरेंदा रोड पर होटल व शोरूम भी बन चुका है। पहले यह सब नहीं था। शहर में चौक रोड पर गबडुआ से आगे बढ़ने पर आसपास की जमीनें बिक चुकी हैं। सोनरा तक जाने पर पता ही नहीं चलता कि कब यहां पहुंच गए। सड़क बेहतर बन गई है। नर्वदेश्वर वर्मा ने बताया कि पहले सोनरा तक जाने में लगता था कि दूरी अधिक है, लेकिन अब तो सोनरा तक जाने में समय ही नहीं लगता है।
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वर्तमान में महराजगंज शहर 25 वार्डों में बंटा है, इसकी आबादी करीब 60,000 है। बीते 15 साल पहले और अब की तस्वीर में बहुत फासला है। महराजगंज शहर का दायर 15 साल पहले धनेवा से पहले ही था, अब दायरा बढ़ा तो मुंडेराकला से आगे तक विस्तार हो गया। इधर आसपास के गांवों तक जमीनें बिक रहीं हैं। पुलिस लाइन के सामने से जाने वाली रोड पर कई स्कूल बनें हैं। अब इधर प्लाटिंग भी हो चुकी है।
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धीरे-धीरे आवासीय क्षेत्र बन गया है। गांव के लोगों का जीवन भी शहर की तरह से हो गया है। रोड से आगे बढ़ने पर पुल के पास सर्वेश प्रसाद मिले। उन्होंने बताया कि बीते 10 साल पहले क्षेत्र विरान सा लगता था। कोई इधर जमीनें खरीदना नहीं चाहता था। आज हालत यह है कि जमीनों के दाम आसमान छू रहे हैं। पुल से 50 मीटर आगे रामपुर की ओर से जाने वाली सड़क के किनारे तक जमीनें बिक चुकी हैं।
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इधर से प्रतापपुर जाने वाली सड़क के किनारे एक स्कूल बनकर तैयार हो चुका है। स्कूल के पास जितेंद्र यादव मिले, उन्होंने बताया कि अब तो इधर से रात में आने पर डर नहीं लगता है। पहले तो कोई आना-जाना नहीं चाहता था। गोरखपुर रोड की बात करें तो ऐसा लगता है कि शिकारपुर चौराहा तक शहर का दायरा बढ़ गया है। जय प्रकाश नगर के धीरेंद्रनाथ त्रिपाठी कहते हैं कि गुजरे वक्त में बैकुंठपुर से आगे बढ़ने पर कुछ नहीं था, अब जमीनें नहीं मिल रही हैं।
गौनरिया बाबू गांव के आगे तक सड़क के किनारे जमीनें नहीं मिल रहीं हैं। अब कहीं खाली भी है तो रेट अधिक है। आसपास के इलाकों की तस्वीर बदल गई है। गोरखपुर रोड पर कई होटल, मॉल, शोरूम समेत भारतीय स्टेट बैंक की शाखा है। इसके अलावा फरेंदा रोड पर महुअवा तक गुजरे वक्त में रात में कोई जाना नहीं चाहता था, लेकिन अब तो अमहवा चौराहे तक गुलजार हो गया है।
इसी रोड पर मेडिकल कॉलेज बनने से इलाके की तस्वीर बदल रही है। पकड़ी तक जाने में लगता ही नहीं है शहरी क्षेत्र में नहीं हैं। इससे आगे बढ़ने पर सड़क के किनारे आबादी क्षेत्र है। पकड़ी चौराहे के रामदरस कहते हैं कि अगर कोई 15 साल पहले चौराहे पर आया होगा तो अब पहचान नहीं पाएगा। आस पास गांव के किनारे तक बाहर से आने वाले लोग जमीन खरीद रहे हैं।
मल्टीप्लेक्स सिनेमा हाल, मेडिकल कॉलेज बना
महुअवा में मल्टीप्लेक्स सिनेमा हाल बना है। इससे आस पास का क्षेत्र गुलजार रहता है। वहीं मेडिकल काॅलेज भी बना है। रम्हौली के पास मेडिकल काॅलेज की एकेडमिक बिल्डिंग बनी है। फरेंदा रोड पर होटल व शोरूम भी बन चुका है। पहले यह सब नहीं था। शहर में चौक रोड पर गबडुआ से आगे बढ़ने पर आसपास की जमीनें बिक चुकी हैं। सोनरा तक जाने पर पता ही नहीं चलता कि कब यहां पहुंच गए। सड़क बेहतर बन गई है। नर्वदेश्वर वर्मा ने बताया कि पहले सोनरा तक जाने में लगता था कि दूरी अधिक है, लेकिन अब तो सोनरा तक जाने में समय ही नहीं लगता है।