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Maharajganj News: बांस-बल्ली से बने पुल के सहारे नदी पार करते हैं ग्रामीण, हादसे का खतरा

Wed, 08 Jan 2025 11:56 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Wed, 08 Jan 2025 11:56 PM IST
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Villagers cross the river with the help of a bridge made of bamboo sticks, danger of accident
- करीब तीन किमी दूर पैदल चलकर आना पड़ता है कुंअहवा घाट
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संवाद न्यूज एजेंसी
नौतनवा। क्षेत्र का सेमरहवा गांव आजादी से अभी तक आवागमन के लिए पुल की बाट जोह रहा है। नदी में बने बांस-बल्ली के पुल के सहारे ग्रामीण नदी पार कर आते-जाते हैं। पुल न होने से गांव के लोगों को कोई इमरजेंसी सेवा का लाभ नहीं मिल पाता है। लोकसभा चुनाव के दौरान ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार किया था, लेकिन बाद में आश्वासन पर मतदान किया।

रोहिन और बघेला नदी के बीच में बसा सेमरहवा गांव तीन तरफ से जंगल से घिरा है। गांव की आबादी लगभग सात हजार है। यहां 2000 से अधिक मतदाता हैं। सेमरहवा खास, बरतानी, चराई और भठवा चार टोले हैं। इस समय बांस-बल्ली से बने पुल से ग्रामीण नदी पार करते हैं। गांव से लगभग तीन किलोमीटर दूर पैदल चलकर कुंअहवा घाट तक आना पड़ता है। नदी पार करने के बाद ही पिच मार्ग मिलता है ।
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बुधवार को बांस-बल्ली से बने पुल से नदी पार कर जा रही कलावती देवी ने बताया कि लोकसभा चुनाव में गांव के लोगों ने मतदान का बहिष्कार किया था, लेकिन बाद में आश्वासन पर मतदान किया गया। अभी तक कुछ नहीं हुआ है।
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वहीं संगम देवी ने बताया कि वह दवा कराने जा रही हैं। पुल न होने से साधन नहीं मिलता है। तीन किलोमीटर पैदल चलकर कर चखनी चौराहे से ई-रिक्शा मिलेगा। वहीं बृजेश कुमार ने बताया कि नदी पर पुल न होने से आने-जाने में काफी समस्या होती है।
इसके अलावा शारदा यादव ने बताया कि बांस-बल्ली के पुल से आने जाने पर गिरने का डर बना रहता है। नाविक धर्मराज ने बताया कि 20 हजार रुपये खर्च करके बांस-बल्ली का पुल बनाया है, लेकिन उसका खर्च नहीं निकल पाया। ग्राम प्रधान ने देने का आश्वासन दिया था, वह भी नहीं मिल पाया।


ग्राम प्रधान उपेंद्र यादव ने बताया कि चुनाव के दिन पुल की मांग को लेकर मतदान का बहिष्कार किया गया था। उच्च अधिकारियों से बात हुई तो आश्वासन दिया था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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