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Maharajganj News: गढ़ते गए झूठे सबूत...जिंदा किशोरी के भाई-बाप को बना दिया कातिल
Sun, 12 Jan 2025 05:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sun, 12 Jan 2025 05:32 AM IST
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महराजगंज। अपनी ही बेटी की हत्या के आरोप में जेल जाने वाले पिता-पुत्र को न्यायालय ने दोष मुक्त कर दिया। पुलिस की ओर से विवेचना के दौरान हर कदम पर झूठा सबूत पेश कर अपनी बात सही की गई। जांच में विवेचकों की कलई खुल गई है।
इस पूरे प्रकरण में कानून के जानकार उच्चाधिकारियों की लापरवाही भी मान रहे हैं, लेकिन इसका रिपोर्ट में जिक्र नहीं है। कानून के जानकार बताते हैं कि जब रिपोर्ट उच्च अधिकारियों के पास पहुंची थी तो उसी वक्त क्यों नहीं छानबीन की गई? वहीं दूसरी ओर रिपोर्ट में विवेचकों ने अपनी सफाई तार्किक तथ्यों के जरिए कार्रवाई को सही करार देने की कोशिश की। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता ने इस पूरे प्रकरण को लेकर शुरू से ही मजबूती से न्यायालय के समझ तथ्यों को रखा। पीड़ित ने प्रार्थना पत्र में अपने को निर्दाेष बताने के साथ पुलिस उत्पीड़न की बातों को बताया। वहीं जिस बेटी की हत्या के आरोप में जेल गया था, उसे जिंदा होने की बात कही। शुरू में पुलिस ने भी इसे हल्के में लिया, लेकिन मामला तूल न पकड़े इसे देखते हुए आनन फानन पहले की विवेचक को निलंबित कर दिया गया।
वहीं तत्कालीन थानाध्यक्ष पर कार्रवाई जारी बताया जा रहा है। न्यायालय ने प्रकरण में पूरी रिपोर्ट देने का आदेश दिया तो पूरी कहानी सामने आ गई। पुलिस ने अपने हिसाब से कहानी गढ़कर पिता-पुत्र को जेल के अंदर कर दिया। अब इस प्रकरण की विवेचना फिर से शुरू हो गई है।
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स्टेशन पर मिली थी किशोरी : बिहार में शादी करने के बाद किशोरी वहीं रहने लगी। उससे एक बच्ची हुई है। किशोरी के पति का बयान भी दर्ज हुआ है। उसने भी पूरी कहानी बताई। उसके मुताबिक किशोरी बगहा रेलवे स्टेशन पर उसकी बहन को मिली थी। बहनों ने उससे बातचीत की तो वह रोने लगी। उसके मुंह और हाथ पर चोट के निशान थे।
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इस पूरे प्रकरण में कानून के जानकार उच्चाधिकारियों की लापरवाही भी मान रहे हैं, लेकिन इसका रिपोर्ट में जिक्र नहीं है। कानून के जानकार बताते हैं कि जब रिपोर्ट उच्च अधिकारियों के पास पहुंची थी तो उसी वक्त क्यों नहीं छानबीन की गई? वहीं दूसरी ओर रिपोर्ट में विवेचकों ने अपनी सफाई तार्किक तथ्यों के जरिए कार्रवाई को सही करार देने की कोशिश की। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता ने इस पूरे प्रकरण को लेकर शुरू से ही मजबूती से न्यायालय के समझ तथ्यों को रखा। पीड़ित ने प्रार्थना पत्र में अपने को निर्दाेष बताने के साथ पुलिस उत्पीड़न की बातों को बताया। वहीं जिस बेटी की हत्या के आरोप में जेल गया था, उसे जिंदा होने की बात कही। शुरू में पुलिस ने भी इसे हल्के में लिया, लेकिन मामला तूल न पकड़े इसे देखते हुए आनन फानन पहले की विवेचक को निलंबित कर दिया गया।
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वहीं तत्कालीन थानाध्यक्ष पर कार्रवाई जारी बताया जा रहा है। न्यायालय ने प्रकरण में पूरी रिपोर्ट देने का आदेश दिया तो पूरी कहानी सामने आ गई। पुलिस ने अपने हिसाब से कहानी गढ़कर पिता-पुत्र को जेल के अंदर कर दिया। अब इस प्रकरण की विवेचना फिर से शुरू हो गई है।
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स्टेशन पर मिली थी किशोरी : बिहार में शादी करने के बाद किशोरी वहीं रहने लगी। उससे एक बच्ची हुई है। किशोरी के पति का बयान भी दर्ज हुआ है। उसने भी पूरी कहानी बताई। उसके मुताबिक किशोरी बगहा रेलवे स्टेशन पर उसकी बहन को मिली थी। बहनों ने उससे बातचीत की तो वह रोने लगी। उसके मुंह और हाथ पर चोट के निशान थे।