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Maharajganj News: सेमरहवा गांव की नाव ही खेवनहार... मसीहा का इंतजार
Tue, 09 Jul 2024 04:48 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Tue, 09 Jul 2024 04:48 AM IST
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सेमरहवा गांव के कुअहवा घाट पर नाव से रोहिन नदी पार करते लोग
महराजगंज। नौतनवा तहसील क्षेत्र के गांव सेमरहवा के लोग आजादी के बाद से अब तक नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। यह गांव सड़क मार्ग से नहीं जुड़ सका है। बारिश का मौसम हो या सामान्य यहां के लोगों का नाव ही खेवनहार है। लोग रोहुआ और रोहिन नदी नाव से पार कर अपनी रोजमर्रा की जरूरत की पूर्ति करते हैं। उनके दर्द पर मरहम लगाने वाला कोई नहीं है। वह मसीहा की राह देख रहे हैं।
भौगोलिक दृष्टि से सेमरहवा गांव काफी विषम है। यह रोहिन और बघेला नदी के बीच में बसा हुआ है। यह गांव तीन तरफ से नदी और एक तरफ से जंगल से घिरा हुआ है। गांव की आबादी छह हजार से अधिक है। यहां 2000 मतदाता हैं। सेमरहवा खास, बरतानी, चराई और भठवा चार टोले हैं। बरसात के मौसम में गांव में जाने के लिए एक मात्र सहारा नाव ही है। ग्रामीणों को लगभग तीन किलोमीटर दूर पैदल चलकर रोहिन नदी कुंअहवा घाट तक आना पड़ता है। वहां से नाव से नदी पार कर धोतिअहवा गांव के चखनी चौराहे पर जाते हैं, तब जाकर पिच मार्ग मिलता है।
बरसात के समय सेमरहवा गांव के लोगों को काफी दुश्वारियों का सामना करना पड़ता है। इस समय कोई बीमार होता है या किसी जंगली जानवर के घायल करने पर तथा गर्भवती महिलाओं को इलाज कराने जाने में काफी समस्या होती है। गांव के लोगों को लगभग तीन किलोमीटर पैदल चलकर जाना पड़ता और नाव से नदी पार करने के बाद ही लोगों को साधन मिल पाता है। सोमवार को लोग नाव से नदी पार करके आ जा रहे थे।
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इस दौरान गांव के बरतानी टोले के सुरेश राजभर मिले वह इलाज कराकर घर लौट रहे थे। परिजन उन्हें चारपाई पर लेकर जा रहे थे। उन्होंने बताया की बीते सप्ताह उन्हें मगरमच्छ ने काटकर घायल कर दिया था। बताया की चखनी चौराहे तक चारपाई पर आना पड़ता है। सेमरहवा गांव की बासमती ने बताया कि बरसात आते ही नदी में बाढ़ आ जाती है, जिससे नाव से नदी पार करने में दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। राधेश्याम राजभर ने बताया कि बीमार होने पर अथवा अन्य परेशानी आने पर समय से अस्पताल नहीं पहुंच पाते हैं। नागेंद्र सहानी का कहना है कि चुनाव के समय वोट लेने के लिए लोग पुल बनवाने का वादा करते हैं, चुनाव बीतने के बाद वादे भूल जाते हैं। मजबूरी में दुश्वारियों के बीच जीवन यापन करना पड़ता है।
700 मीटर तक नाव का सफर करना अभी भी मजबूरी
सोहगीबरवा के ग्रामीण कोमल यादव, शिव शरण पटेल, नागेंद्र पांडेय, पप्पू पटेल आदि लोगों ने कहा की जरूरत का सामान लेने के लिए उन्हें बिहार राज्य के बाजारों में जाना पड़ता है। यहां पहुंचने के लिए एकमात्र रास्ता रोहुआ नाला पार कर जाना पड़ता है। अभी भी रोहुआ नाला पार करने के लिए उन लोगों को लगभग 700 मीटर की दूरी नाव से सफर करना पड़ रहा है। उसके बाद वह लोग बिहार राज्य के सीमा क्षेत्र में पहुंच रहें हैं। ऐसे में लोगों को हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी तमाम दुश्वारियां झेलनी पड़ रहीं हैं।
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भौगोलिक दृष्टि से सेमरहवा गांव काफी विषम है। यह रोहिन और बघेला नदी के बीच में बसा हुआ है। यह गांव तीन तरफ से नदी और एक तरफ से जंगल से घिरा हुआ है। गांव की आबादी छह हजार से अधिक है। यहां 2000 मतदाता हैं। सेमरहवा खास, बरतानी, चराई और भठवा चार टोले हैं। बरसात के मौसम में गांव में जाने के लिए एक मात्र सहारा नाव ही है। ग्रामीणों को लगभग तीन किलोमीटर दूर पैदल चलकर रोहिन नदी कुंअहवा घाट तक आना पड़ता है। वहां से नाव से नदी पार कर धोतिअहवा गांव के चखनी चौराहे पर जाते हैं, तब जाकर पिच मार्ग मिलता है।
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बरसात के समय सेमरहवा गांव के लोगों को काफी दुश्वारियों का सामना करना पड़ता है। इस समय कोई बीमार होता है या किसी जंगली जानवर के घायल करने पर तथा गर्भवती महिलाओं को इलाज कराने जाने में काफी समस्या होती है। गांव के लोगों को लगभग तीन किलोमीटर पैदल चलकर जाना पड़ता और नाव से नदी पार करने के बाद ही लोगों को साधन मिल पाता है। सोमवार को लोग नाव से नदी पार करके आ जा रहे थे।
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इस दौरान गांव के बरतानी टोले के सुरेश राजभर मिले वह इलाज कराकर घर लौट रहे थे। परिजन उन्हें चारपाई पर लेकर जा रहे थे। उन्होंने बताया की बीते सप्ताह उन्हें मगरमच्छ ने काटकर घायल कर दिया था। बताया की चखनी चौराहे तक चारपाई पर आना पड़ता है। सेमरहवा गांव की बासमती ने बताया कि बरसात आते ही नदी में बाढ़ आ जाती है, जिससे नाव से नदी पार करने में दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। राधेश्याम राजभर ने बताया कि बीमार होने पर अथवा अन्य परेशानी आने पर समय से अस्पताल नहीं पहुंच पाते हैं। नागेंद्र सहानी का कहना है कि चुनाव के समय वोट लेने के लिए लोग पुल बनवाने का वादा करते हैं, चुनाव बीतने के बाद वादे भूल जाते हैं। मजबूरी में दुश्वारियों के बीच जीवन यापन करना पड़ता है।
700 मीटर तक नाव का सफर करना अभी भी मजबूरी
सोहगीबरवा के ग्रामीण कोमल यादव, शिव शरण पटेल, नागेंद्र पांडेय, पप्पू पटेल आदि लोगों ने कहा की जरूरत का सामान लेने के लिए उन्हें बिहार राज्य के बाजारों में जाना पड़ता है। यहां पहुंचने के लिए एकमात्र रास्ता रोहुआ नाला पार कर जाना पड़ता है। अभी भी रोहुआ नाला पार करने के लिए उन लोगों को लगभग 700 मीटर की दूरी नाव से सफर करना पड़ रहा है। उसके बाद वह लोग बिहार राज्य के सीमा क्षेत्र में पहुंच रहें हैं। ऐसे में लोगों को हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी तमाम दुश्वारियां झेलनी पड़ रहीं हैं।